Karnal News: प्रॉपर्टी डीलर एक पक्ष से केवल 0.5 प्रतिशत कमीशन लेने का हकदार Latest Haryana News

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करनाल। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने गुरुग्राम के प्रॉपर्टी डीलर को सेवा में कोताही और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी पाया। आयोग ने डीलर को निर्देश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को उसकी ओर से जमा करवाई गई एक लाख रुपये की राशि ब्याज सहित लौटाए। मानसिक परेशानी के लिए मुआवजा भी दे। आयोग ने हरियाणा सरकार की अधिसूचना का हवाला देते हुए कहा कि प्राॅपर्टी डीलर साैदा तय होने पर एक पक्ष से केवल 0.5 प्रतिशत कमीशन लेने के लिए हकदार है।

करनाल के सेक्टर-6 निवासी निशा ने उपभोक्ता आयोग के समक्ष शिकायत रखी थी कि उन्होंने नवंबर, 2021 में गुरुग्राम में आशियारा दो प्रोजेक्ट में दुकान खरीदने के लिए मेसर्स बिग एसेट्स इंफ्रा गुरुग्राम से संपर्क किया था। आरोप था कि डीलर ने दावा किया, वह खरीदार से कोई कमीशन नहीं लेगा और बुकिंग राशि को सीधे बिल्डर के खाते में ट्रांसफर कर देगा। शिकायतकर्ता ने 43 लाख 91 हजार 145 रुपये की दुकान की बुकिंग के लिए एक लाख रुपये की राशि डीलर को दी और एक लाख सीधे बिल्डर को भुगतान किए। बाद में बिल्डर ने किस्तों का भुगतान न होने का हवाला देते हुए आवंटन रद्द कर दिया। जांच में पता चला कि बिल्डर ने अपना हिस्सा तो वापस कर दिया, लेकिन ब्रोकर ने निशा से लिए गए एक लाख रुपये बिल्डर को ट्रांसफर ही नहीं किए थे। उन्हें ब्रोकरेज/कमीशन बताकर वापस करने से इनकार कर दिया।

विपक्षी दल मेसर्स बिग एसेट्स इंफ्रा गुरुग्राम ने अदालत में तर्क दिया कि मामला गुरुग्राम का है, इसलिए करनाल में सुनवाई नहीं हो सकती। हालांकि, आयोग ने स्पष्ट किया कि चूंकि शिकायतकर्ता करनाल की निवासी हैं और उसे रद्दीकरण पत्र करनाल में प्राप्त हुआ, इसलिए करनाल आयोग को इस मामले की सुनवाई का पूरा अधिकार है।

यह कहती है अधिसूचना

आयोग ने हरियाणा सरकार के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से 6 जनवरी, 2019 को जारी की गई अधिसूचना का हवाला देते हुए कहा कि प्रॉपर्टी डीलर सौदा तय होने पर एक प्रतिशत कमीशन लेने का हकदार है। इसमें 0.5 प्रतिशत खरीदार और 0.5 प्रतिशत विक्रेता की ओर से दिया जाता है। इस मामले में सौदा कभी पूरा ही नहीं हुआ, इसलिए डीलर का एक लाख रुपये अपने पास रखना अवैध है।

45 दिन में भुगतान करें

आयोग ने माना कि निशा उपभोक्ता की श्रेणी में आती है, क्योंकि उसने सेवा के बदले भुगतान किया था। आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह और सदस्यों नीरू अग्रवाल और सर्वजीत कौर की पीठ ने आदेश दिए कि डीलर शिकायतकर्ता को एक लाख रुपये की राशि वापस करेगा। इसके साथ ही मानसिक पीड़ा और कानूनी खर्च के लिए 20 हजार रुपये का अतिरिक्त भुगतान करना होगा। आयोग ने आदेश दिए कि यह भुगतान 45 दिनों के भीतर करना होगा। यदि देरी होती है, तो डीलर को नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा।

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Karnal News: प्रॉपर्टी डीलर एक पक्ष से केवल 0.5 प्रतिशत कमीशन लेने का हकदार