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फरीदाबाद: फरीदाबाद के डीग गांव में इन दिनों किसान पन्ना की खीरे की खेती की खूब चर्चा है. उनके खेत में जितनी दूर नजर जाए बेलें ही बेलें फैली हैं और उन पर एक जैसे चमकदार खीरे लटके हैं. पहली नजर में ही समझ आ जाता है कि ये कोई आम खीरा नहीं कुछ अलग है. ये हाइब्रिड किस्म है आकार, रंग, पैदावार, सब मामले में साधारण से आगे.
पन्ना खुद बिहार के मोतिहारी जिले के रहने वाले हैं लेकिन अब उनकी जिंदगी फरीदाबाद की मिट्टी से जुड़ गई है. पहले अपने गांव में ही खेती करते थे खूब मेहनत करते थे, लेकिन आमदनी ठीक से नहीं होती थी. कमाई की तलाश में फरीदाबाद आ गए.
पन्ना बताते हैं मैंने डीग गांव में करीब एक एकड़ जमीन पट्टे पर ली है और वहीं हाइब्रिड खीरा उगाता हूं. ये वैरायटी बढ़िया है और बाजार में अच्छे दाम मिल जाते हैं. 15 दिन पहले ही बीज डाले थे पौधे शानदार निकल आए हैं. सब ठीक रहा तो इस बार भी अच्छा भाव मिलेगा.
कैसे करते हैं खेती
खेती की तैयारी का जिक्र करते हुए पन्ना कहते हैं पहले एक बार कंटी चलाते हैं फिर रोटावेटर से मिट्टी को दो-तीन बार और तैयार किया जाता है. उसके बाद लाइन बनाकर एक-एक फुट की दूरी पर दो-दो बीज डालते हैं. कुछ ही दिन में पूरा खेत बेलों से भर जाता है. वो मानते हैं हाइब्रिड बीज महंगे जरूर होते हैं लेकिन जो पैदावार मिलती है उससे सारा खर्च निकल आता है.
क्या आता है लागत
एक एकड़ में खीरे की खेती पर करीब 30 से 35 हजार रुपये खर्च आता है. इसमें बीज, दवा, खाद, मजदूरी सब कुछ शामिल है. लेकिन एक सीजन में ढाई से तीन लाख रुपये तक की फसल निकल जाती है. पन्ना कहते हैं ये सच में मुनाफे का सौदा है. जब खीरा तैयार हो जाता है तो वो बल्लभगढ़ मंडी ले जाते हैं. कई बार व्यापारी खुद खेत पर आकर माल उठा ले जाते हैं अगर फसल अच्छी हो.
कैसे करें देखभाल
गर्मी में हर चार-पांच दिन में सिंचाई करनी पड़ती है. कीड़े लग जाएं तो समय पर स्प्रे करना जरूरी है वरना पूरी बेल बर्बाद हो सकती है. पन्ना कहते हैं हाइब्रिड खेती में देखभाल ज्यादा करनी पड़ती है लेकिन कमाई भी उसी हिसाब से होती है.
पन्ना यहां अकेले रहते हैं परिवार बिहार में है. खेती से जो कमाई हुई उससे उन्होंने अपनी दोनों बेटियों की शादी कर दी. एक बेटा स्कूल में पढ़ रहा है दूसरा काम सीख रहा है. पन्ना कहते हैं घर का सारा खर्च इसी खेती से चलता है. गांव में इतनी आमदनी नहीं हो पाती थी यहां मेहनत का फल मिल जाता है.
सही फसल चुनना है जरूरी
जमीन का सालाना पट्टा 35 हजार रुपये प्रति एकड़ है. खर्च निकालने के बाद भी अच्छी बचत हो जाती है. पन्ना की कहानी यही बताती है…अगर फसल और जगह सही चुन ली जाए तो खेती आज भी सम्मान और मुनाफे का काम बन सकती है. घाटे का सौदा बिल्कुल नहीं.
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