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- Pandit Vijay Shankar Mehta Column: Build Grip On Small Family Activities
2 घंटे पहले
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पं. विजयशंकर मेहता
अब यह बात धीरे-धीरे स्थापित हो गई है कि पति-पत्नी का रिश्ता यदि बीमार हो तो तलाक उसकी दवा है। इस रिश्ते में जिस समझ की बात की जाती थी, वो भी अब दम तोड़ रही है। पहले लोग तलाक के लिए इसलिए कम सहमत थे कि बाद का जीवन बड़ा कठिन हो जाता था। लेकिन अब स्त्री-पुरुष मुक्त होकर जो जीवन जीते हैं, उसमें उनको तलाक बहुत अच्छा लगता है।
आजकल तो नए बच्चे आपस में बात करते हैं कि देखेंगे कितने दिन शादी चलेगी, नहीं तो तलाक तो है ही। इसीलिए बच्चे पैदा करने में भी आजकल के जोड़े समय लेते हैं। मैनेजमेंट में एक शब्द चलता है- ग्रिप। मजबूत पकड़।
अब प्रबंधकों को कहा जाता है कि कंट्रोल रखने के साथ-साथ ग्रिप भी बनाओ। इसे परिवार से जोड़ें। हमारे परिवारों में छोटी-छोटी एक्टिविटी पर हम ग्रिप बनाएं। पकड़ मजबूत रहेगी तो पति-पत्नी के सम्बंध भी आखिरी दम तक कोशिश करेंगे कि अलग ना हों। तलाक का विचार फैमिली लाइफ की ग्रिप को और कमजोर कर देता है।
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: हम परिवारों में छोटी-छोटी एक्टिविटी पर ग्रिप बनाएं


