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फरीदाबाद के डीग गांव में किसान उगा रहे हैं खास नीलकंठ आलू…देखने में साधारण.. स्वाद में लाजवाब और डायबिटीज मरीजों के लिए भी बेहतर विकल्प. आम आलू से दोगुना दाम मिल रहा है लेकिन मेहनत भी ज्यादा. 90 दिन की खेती कई बार जुताई-सिंचाई और स्प्रे के बाद तैयार होता है ये अलग पहचान दिलाने वाला आलू.
फरीदाबाद. हरियाणा के फरीदाबाद के डीग गांव के खेतों में इन दिनों कुछ अलग ही हलचल है. यहां किसान आम आलू नहीं बल्कि नीलकंठ नाम का एक खास किस्म का आलू उगा रहे हैं. देखने में तो ये आलू थोड़ा अजीब सा लगता है, इतना सुंदर नहीं है लेकिन स्वाद ऐसा कि जिसने एक बार चखा वो फिर उसी के पीछे हो जाता है.
दरअसल, आपने एक कहावत सुनी होगी, रूप नहीं, गुण देखो और सच में ये आलू इस कहावत पर पूरी तरह खरा उतरता है. बाहर से भले ही मामूली लगे लेकिन जब इसका स्वाद जुबान पर आता है लोग इसके फैन हो जाते हैं.
किसान विकास ने Local18 से बातचीत में बताया कि उनके खेत में भी यही नीलकंठ आलू लगा है. एक एकड़ में करीब 250 से 300 बैग आलू निकल आते हैं. मंडी में एक बैग 300 रुपये का बिकता है, जिसमें 50 किलो आलू होता है. जबकि खुदरा बाजार में ये करीब 20 रुपये किलो के हिसाब से बिकता है. विकास की मानें तो अभी भाव अच्छे चल रहे हैं,नुकसान तो नहीं है लेकिन अगर दाम और गिरा तो दिक्कत आ सकती है.
फसल पूरी तरह तैयार होने में करीब 90 दिन लगते हैं
विकास बताते हैं कि आम आलू से नीलकंठ आलू काफी अलग है. इसका स्वाद कहीं ज्यादा अच्छा है. और सबसे खास बात ये शुगर फ्री है. कई लोग डायबिटीज के डर से आलू से दूर भागते है मगर इस आलू की सब्जी बनी तो स्वाद चिप्स जैसा आता है. इसीलिए जो एक बार खरीद ले वो दोबारा लेने जरूर आता है. विकास कहते हैं उन्हें खेत की कम से कम 10 बार जुताई करनी पड़ती है. पहले जैविक खाद डालते हैं फिर डीएपी, पोटाश, सल्फर मिलाते हैं. बीज अलीगढ़ से मंगवाए थे. फसल पूरी तरह तैयार होने में करीब 90 दिन लगते हैं. इस दौरान पांच बार सिंचाई करनी पड़ती है और 10 बार स्प्रे करना पड़ता है. मेहनत तो ज्यादा है लेकिन कमाई भी उसी के हिसाब से ठीक मिल जाती है.
खर्च की बात करें तो एक एकड़ में करीब 30 हजार रुपये लग जाते हैं. विकास फिलहाल दो एकड़ में खेती कर रहे हैं और पिछले 15 सालों से इसी में लगे हैं. खेत पट्टे पर लिए हैं जिसके लिए सालाना करीब 45 हजार रुपये किराया देना पड़ता है. पीछे से वे उत्तर प्रदेश के हैं लेकिन अब खेती ही उनका पूरा सहारा है.
साधारण आलू का बैग करीब 200 रुपये में बिकता
मंडी में साधारण आलू का बैग करीब 200 रुपये में बिकता है जबकि नीलकंठ आलू 300 रुपये में जाता है. खुदरा बाजार में भी फर्क साफ है आम आलू जहां 10 रुपये किलो बिकता है, वहीं, नीलकंठ 20 रुपये किलो तक पहुंच जाता है. हां, दिखने में अलग होने की वजह से ग्राहक शुरू में कम होते हैं लेकिन जिसने एक बार खरीद लिया वो फिर दूसरा आलू नहीं लेता. इसीलिए डीग गांव के किसान अब पारंपरिक खेती से हटकर नई किस्में आज़मा रहे हैं. मेहनत औक जोखिम अधिक है. लेकिन पहचान और दाम दोनों मिल रहे हैं. किसानों का कहना है कि भीड़ में वही टिकेगा, जो कुछ अलग करेगा और नीलकंठ आलू ने उन्हें अलग पहचान दे दी है.
About the Author
Vinod Kumar Katwal, a Season journalist with 14 years of experience across print and digital media. I have worked with some of India’s most respected news organizations, including Dainik Bhaskar, IANS, Punjab K…और पढ़ें
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