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‘यह कोई न्यूज स्टोरी नहीं, एक आंदोलन बनना चाहिए’, इन्ना माकन ने अत्यंत पीड़ा के साथ यह शब्द मुझसे कहे। मैं सिर झुकाकर सहमति ही जता पाई। जब वे पीड़ा, गुस्से और अकेलेपन के चलते रो रही थीं, तो मैं भी बमुश्किल ही अपने आंसू रोक पाई। दिल्ली में ब्राइडल मेकअप स्टूडियो चलाने वाली इन्ना को कुछ दिन पहले तक हममें से ज्यादातर लोग नहीं जानते थे। आज उनकी त्रासदी का बोझ और उनके साहस की शक्ति हमारे सिस्टम को आईना दिखा रही है। इन्ना माकन के 23 साल के बेटे साहिल धनेशरा की हमारी राष्ट्रीय राजधानी की सड़कों पर हत्या कर दी गई। वह इसलिए मारा गया, क्योंकि उस दिन एक बिगड़ैल किशोर अपनी बहन को बगल में बिठाकर स्कॉर्पियो में घुमाने निकला था। दोनों तेज स्पीड में गाड़ी चलाते हुए रील्स बना रहे थे। स्कॉर्पियो ने एक मोटरसाइकिल को टक्कर मारी और साहिल की मौके पर ही मौत हो गई। सामने आए वीडियो में साफ दिख रहा है कि कैसे वह गाड़ी तेज रफ्तार पर दौड़ रही थी। यह खुलासा भी हुआ है कि अतीत में उसी गाड़ी के 13 चालान भी हुए हैं, जिनमें 9 तेज रफ्तार के लिए हैं। आरोपी नाबालिग है और उसके पास लाइसेंस नहीं था। उसने पुलिस से झूठ बोला कि उसकी उम्र 19 साल है, लेकिन दस्तावेजों से पता चला कि 16 का ही है। लेकिन किशोर न्याय बोर्ड ने उसे बोर्ड परीक्षाएं देने के लिए जमानत दे दी। हमारा सिस्टम कितना लचर है कि एक अमीर आदमी के बेटे का अहंकार भरा व्यवहार किसी दूसरे युवा के सपनों को चकनाचूर कर देता है। कानून के मुताबिक हम आरोपी या उसके पैरेंट्स का नाम नहीं ले सकते, क्योंकि नाबालिग अपराधी की पहचान सुरक्षित रखी जाती है। हम उस बहन का नाम भी नहीं ले सकते, जो कार में बैठकर सड़क पर खतरनाक हरकतें कर रहे भाई का वीडियो बना रही थी। कानून के अनुसार आरोपी को तो फिर से अपनी जिंदगी संवारने का मौका मिल सकता है, लेकिन साहिल का जीवन तो हमेशा के लिए खत्म हो गया। इन्ना माकन सिंगल मदर थीं और घर चलाने के लिए कड़ी मेहनत करती थीं, इसलिए साहिल ने ठाना था कि वह आर्थिक रूप से सक्षम होकर मां की मदद करेगा। उसके सपने बड़े थे। अपने कमरे की छत पर उसने लिखा था- ‘2025 विल बी द बेस्ट ईयर ऑफ माय लाइफ।’ हाथ से बने एक और पोस्टर पर लिखा था- ‘दे वांट टु फ्लाय फर्स्ट क्लास, आई वांट टु ओन द प्लेन।’ वह विदेश में पढ़ाई करने पर ध्यान दे रहा था। उसकी मौत के बाद 14 फरवरी को मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी से उसका एक्सेप्टेंस लेटर भी आया था। इन्ना ने कहा कि बेटे की मौत के 14 दिनों बाद तक उनके साथ खड़ा होने के लिए कोई नहीं आया। जब उन्होंने एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाला तो उसके वायरल होने के बाद सिस्टम हरकत में आया। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके बेटे की मौत को दुर्घटना न कहा जाए। और वे सही हैं। आरोपी के पिता ने माफी मांगी है, लेकिन इससे साहिल का जीवन तो वापस नहीं आएगा। अमीरों और उनके विशेषाधिकार प्राप्त बच्चों को दंड से मुक्ति के नियम को समाप्त किया जाना चाहिए। अगर तत्काल सख्त मिसाल पेश नहीं की गई तो कानून से बच निकलने का यह शगल बन जाएगा। मुंबई में इसी हफ्ते 33 साल के व्यवसायी ध्रुमिल पटेल की तेज रफ्तार एसयूवी की टक्कर से मौत हो गई और उसे भी एक किशोर ही चला रहा था। इस मामले में भी उसे किशोर न्याय बोर्ड ने जमानत और परीक्षाएं देने की अनुमति दे दी है। संभव है कि किशोरों संबंधी कानूनों के पीछे इरादे अच्छे रहे हों। लेकिन पैसे और ताकत के दुरुपयोग तले दबे सिस्टम में अब ये कानून अमीरों और लापरवाह लोगों के अहंकारी रवैये की रक्षा करने लगे हैं। संभव है कि किशोरों संबंधी कानूनों के पीछे इरादे अच्छे रहे हों। लेकिन पैसे और ताकत के दुरुपयोग तले दबे सिस्टम में अब ये कानून अमीरों और लापरवाह लोगों के अहंकारी रवैये की रक्षा करने लगे हैं। इनमें सुधार की जरूरत है।
(ये लेखिका के अपने विचार हैं)
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