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Why Do I Wake Up At 3 AM Every Night: सफलता अक्सर खुशियां, सम्मान और समृद्धि लेकर आती है, लेकिन कई बार यही सफलता आसपास के लोगों के मन में हल्की असहजता भी पैदा कर देती है. हिंदू मान्यताओं में कहा गया है कि शनि की साढ़ेसाती के दौरान व्यक्ति के कर्म, धैर्य और विनम्रता की परीक्षा होती है. जब आप आगे बढ़ते हैं, आत्मविश्वास से भरते हैं और उपलब्धियां हासिल करते हैं, तो कुछ लोगों के भीतर छिपी तुलना और असुरक्षा सतह पर आ सकती है. यह आपकी गलती नहीं, बल्कि उनके अपने जीवन-पाठ का हिस्सा है. चलिए आपको हेल्थ के नजरिए से बताते हैं कि क्या होता है.
क्या हो रही है दिक्कत?
मेंटल और इमोशनल दबाव का असर सिर्फ रिश्तों पर ही नहीं, नींद पर भी पड़ता है. हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली संस्था Mayoclinic के अनुसार मेंटेनेंस इंसोम्निया यानी रात में बार-बार नींद खुल जाना, आजकल एक आम समस्या बनती जा रही है. इसका सबसे बड़ा कारण तनाव है.
जब मन लगातार सतर्क अवस्था में रहता है, तो शरीर गहरी नींद में नहीं जा पाता. काम का दबाव, परिवार की जिम्मेदारियां, पैसों की चिंता या स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां रात में जागने का कारण बनती हैं. तनाव बढ़ने पर शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो दिमाग को सक्रिय रखता है. कई बार बुरे सपने, पुराने चोट या नींद न आने की चिंता भी इसी चक्र को और मजबूत कर देती है.
किन कारणों से रात में नींद खुलती है?
शारीरिक असुविधा भी नींद टूटने की बड़ी वजह हो सकती है. कमर दर्द, गठिया, नसों का दर्द, एसिड रिफ्लक्स या बार-बार यूरिन आना रात में जागने के सामान्य कारण हैं. उम्र बढ़ने के साथ ये समस्याएं और बढ़ सकती हैं, जिससे नींद की क्लालिटी प्रभावित होती है.
शरीर में हल्की सी तकलीफ भी ब्रेन को संकेत देती है और गहरी नींद टूट जाती है. ऐसे में मूल कारण का इलाज जरूरी है. सही गद्दे और तकिए का चुनाव, डॉक्टर की सलाह और दर्द प्रबंधन से राहत मिल सकती है.
उम्र के साथ बदलता है नींद का पैटर्न
उम्र के साथ नींद का पैटर्न बदलना स्वाभाविक है. बढ़ती उम्र में नींद हल्की हो जाती है और बार-बार खुल सकती है. महिलाओं में रजोनिवृत्ति के आसपास हार्मोनल बदलाव, खासकर एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन में उतार-चढ़ाव, भी नींद को प्रभावित करते हैं. हॉट फ्लैश और मूड में बदलाव आराम को बाधित करते हैं.
आपका सोने का वातावरण भी अहम भूमिका निभाता है. कमरे में ज्यादा रोशनी, बाहर का शोर, असुविधाजनक तापमान या साथी के खर्राटे नींद में बाधा डाल सकते हैं. सोने से पहले मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल मेलाटोनिन के स्राव को कम करता है. बेहतर है कि कमरा शांत, अंधेरा और ठंडा रखा जाए और सोने से कम से कम आधा घंटा पहले स्क्रीन से दूरी बना ली जाए.
कैसे बचा जा सकता है?
क्रॉनिक अनिद्रा के इलाज में कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी फॉर इंसोम्निया को प्रभावी माना जाता है. यह थेरेपी निगेटिव सोच को बदलने और सोने की आदतों को सुधारने में मदद करती है. जरूरत पड़ने पर डॉक्टर सीमित समय के लिए दवा भी दे सकते हैं. नियमित सोने-जागने का समय तय करना, शाम को कैफीन से बचना, दिन में लंबी झपकी न लेना और गहरी सांस लेने जैसे अभ्यास अपनाने से सर्कैडियन रिदम बहाल किया जा सकता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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