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शहर की कुम्हार धर्मशाला में रविवार को अनुसूचित जाति ए और बी (डीएससी), बीसी ए और बी, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यक समुदाय की बैठक हुई। इसकी अध्यक्षता डीएससी समाज एकता मंच जींद के प्रधान रोशनलाल दुग्गल ने की। उन्होंने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर के शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो के मूलमंत्र पर विशेष बल दिया।
बैठक में वर्गों ने जिला स्तरीय संयुक्त संगठन बनाने का अहम निर्णय लिया, ताकि जातीय भेदभाव एवं उत्पीड़न पर अंकुश लगे तथा उन्हें सामाजिक न्याय, पूर्ण आरक्षण एवं समानता के अवसर मिले। बैठक में एससी, एसटी, डीएससी, बीसी और अन्य कमजोर वर्गों के लोगों के जातीय भेदभाव, उत्पीड़न, सामाजिक अन्याय जैसे मुद्दों एवं अन्य समस्याओं के समाधान एवं उनके हितों एवं अधिकारों की सामूहिक रूप से पैरवी करने का संकल्प लिया गया। इस मौके पर 21 सदस्यीय ड्राफ्टिंग कमेटी का गठन कर भविष्य की रूपरेखा तैयार करने का भी निर्णय लिया गया। बैठक में इन वर्गों की संयुक्त रूप से समन्वय समिति व संगठन को मजबूत बनाने,विधायिका,कार्यपालिका, न्यायपालिका समेत सभी क्षेत्रों में आबादी के अनुपात में प्रतिनिधित्व एवं हिस्सेदारी तथा यूजीसी के नए नियमों एवं प्रावधानों के समर्थन में विशेष रूप से चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि एससी की तर्ज पर बीसी के हितों के लिए विधायिका में भी 27 फीसदी आरक्षण का प्रावधान होना चाहिए ताकि पिछड़ा वर्ग ए और बी का भी उत्थान हो सके। इसके लिए उन्होंने संयुक्त रूप से संगठित होकर संघर्ष करने की जरूरत बताई। बैठक में धर्मपाल तंवर, जयकुमार पंवार, पिछड़ा वर्ग कल्याण महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष रविंद्र शास्त्री सैन, सेवानिवृत डीआईपीआरओ सुरेंद्र वर्मा, सूरत सिंह बिश्नोई, राष्ट्रीय वाल्मीकि महासभा के जिलाध्यक्ष कमल चौहान, रामजीलाल कश्यप, कौशल विकास बोर्ड के पूर्व सदस्य विजय आर्य, अखिल भारतीय जांगड़ा महासभा के राष्ट्रीय उपप्रधान सुलतान सिंह आर्य, डॉ. बीआर आंबेडकर वेलफेयर सोसायटी जींद के कोषाध्यक्ष धर्मपाल सिंहमार, प्रधान राजेश पहलवान, जोगेंद्र सिंह, पालसिंह मौजूद रहे।
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