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मुंबई में पवई झील के प्रोमेनेड की कुछ शामें आमतौर पर शांति से भरी होती हैं। लेकिन उस शाम वो जगह निष्ठा की एक गहरी मिसाल की गवाह बनी। सत्तर से अस्सी वर्ष की आयु के कुछ सेवानिवृत्त व्यक्ति अपनी नियमित की गपशप के लिए बैठे थे। जैसे ही घड़ी ने पांच बजाए, उनमें से सबसे सलीके से कपड़े पहने हुए एक व्यक्ति उठ खड़े हुए। “अरे यार, रुक जाओ!’ एक ने आग्रह किया। “आइसक्रीम पांच मिनट में आ रही है। थोड़ी देर बैठो, फिर चले जाना।’ उन्होंने मना कर दिया और इस बात पर अड़े रहे कि उन्हें घर जाना है- पत्नी के साथ शाम की चाय के लिए। तभी एक तीसरे मित्र ने- जिनकी आवाज में हल्की-सी कड़वी उदासी थी- कहा, “इतनी जल्दी क्या है? वे तो डिमेंशिया की धुंध में खो चुकी हैं। उन्हें कुछ याद नहीं रहता। उन्हें क्या पता चलेगा कि तुम आए हो या नहीं?’ उन व्यक्ति ने मुड़कर देखा। उनकी नजर तीखी थी और आवाज में शाम की हवा को थाम लेने वाली स्थिरता। “उन्हें याद नहीं रहता,’ उन्होंने कहा, “लेकिन मुझे तो डिमेंशिया नहीं है। मुझे याद है वे कौन हैं और इसलिए उनके साथ वहां होना मेरी जिम्मेदारी है।’ उन शब्दों में इतना गुरुत्व था कि सभी लोग कुछ क्षणों के लिए मौन हो गए। वह प्रेम की चरम परिभाषा है- ऐसी प्रतिबद्धता, जो तब भी बनी रहती है जब उसे देखने-समझने वाला कोई नहीं रह जाता। मुझे कुछ साल पहले के अपने इस अनुभव की तब याद आई, जब शुक्रवार की रात एक पार्टी एंकर ने मुझसे पूछा, शादी के चालीस साल बाद भी वो क्या चीज है, जो रोमांस को जीवित रखती है? मेरा उत्तर सरल था : छोटे, अनदेखे जेस्चर्स। उसने मुझसे एक उदाहरण मांगा। शायद उसे किसी भव्य कथानक की अपेक्षा थी। लेकिन मैंने पब्लिक वॉशरूम्स की बात की। मैंने श्रोताओं को बताया कि हाईजीन के प्रति अपनी पत्नी की गहरी संवेदनशीलता को जानते हुए मैं सार्वजनिक स्थानों पर हमेशा नजर रखता हूं। जैसे ही मैं किसी हाउसकीपिंग टीम को अपना काम समाप्त करते देखता हूं, मैं उन्हें तुरंत बता देता हूं- वॉशरूम अभी साफ है। अगर उपयोग करना हो, तो यही सही समय है। एंकर भावुक हो उठीं। उन्होंने अपने गेस्ट्स से कहा कि देखिए, ये कितनी सही बात कह रहे हैं। रोमांस दुनिया को दिखाने के लिए हार्ट डिजाइन का चॉकलेट बॉक्स नहीं है। वह तो किसी के किए किया गया कोई सोचा-समझा, ‘अनदेखा’ काम है। मेरे लिए सच्चा प्रेम कोई परफॉर्मेंस नहीं है। वह उतना ही सरल हो सकता है, जितना मेरे पिता द्वारा दफ्तर से लौटते समय एक आने में खरीदा गया सुगंधित चमेली का गजरा, जो वे मेरी मां के लिए लाते थे। या फिर वह रोज, नियत समय पर, बिना चूके एक कप चाय के लिए उपस्थित होने का शांत निर्णय है- क्योंकि हृदय अपने कर्तव्य को कभी नहीं भूलता। रोमांस कोई ऐसी चीज नहीं है, जिसे किसी सांचे में ढाला जा सके। मैं ऐसे पतियों को जानता हूं, जो रसोई में तब स्टूल पर बैठकर धनिया साफ करने या सब्जियां काटने लग जाते हैं, जब उनकी पत्नी खाना बना रही होती है। वे सब्जी काटने को एक साधारण घरेलू काम नहीं मानते; वे इस बहाने यह समझने की कोशिश करते हैं कि उनकी जीवनसाथी को भावनात्मक और शारीरिक सुख-शांति के लिए क्या चाहिए। वे जीवन को साथ-साथ अनुभव करते हैं। हर दिन पत्नी के लिए सब्जियां काटना दरअसल रोज-रोज एक-दूसरे को डेट करने की तरह रोमांस को जीवित रखने का एक तरीका है। संयुक्त परिवारों में- जहां माता-पिता या बुजुर्गों की देखभाल की जिम्मेदारी भी होती है- ऐसे कपल्स सुबह जल्दी उठते हैं और रसोई में कुछ समय साथ बिताते हैं। क्योंकि बाद में दोनों को ही और भी अनेक भूमिकाएं निभानी होती हैं। मुझे नहीं लगता कि ऐसे जोड़े अपने प्रेम को दर्ज कराने के लिए कभी महंगे उपहारों का लेन-देन करते होंगे। वे सामाजिक दबावों, फिल्मों और उपन्यासों से उपजी रूमानी कल्पनाओं का बोझ भी नहीं ढोते। एक गजरा भले ही मामूली-सा लगता हो, लेकिन विश्वास कीजिए, उसका प्रभाव गहरा होता है। वह महंगा नहीं होता, पर उसकी सुगंध देर तक बनी रहती है। वह एक-दूसरे से यह कहने का एक सरल-सा तरीका है कि- मैं तुम्हारे बारे में सोचता या सोचती हूं। प्रेम परफेक्ट नहीं हो सकता; वह केवल सुंदर हो सकता है। फंडा यह है कि खुद से पूछें वो कौन-सी छोटी-छोटी चीजें हैं, जिन्हें आप अपने पार्टनर के लिए इस तरह से कर सकते हैं, जिसकी उन्हें जरूरत थी?
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एन. रघुरामन का कॉलम: जो रोमांस देखे जा सकने वाले जेस्चर्स पर निर्भर नहीं होता उसकी उम्र लम्बी होती है

