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भ्रामरी प्राणायाम एक जाना-माना योग अभ्यास है, जिसमें मधुमक्खी जैसी गुनगुनाहट की आवाज़ के जरिये मन को शांत किया जाता है. आमतौर पर लोग इसे सिर्फ सांस लेकर गुनगुनाने और छोड़ने तक सीमित समझते हैं, लेकिन असल में भ्रामरी इससे कहीं ज्यादा व्यापक अभ्यास है. इसमें सही बॉडी पोस्चर, सांस पर नियंत्रण, हाथों की स्थिति और पूरी एकाग्रता का अहम रोल होता है. दुर्भाग्य से, भ्रामरी को अक्सर अधूरे तरीके से सिखाया जाता है, जबकि शरीर की सही मुद्रा सांस को दिशा देने में मदद करती है और हाथों की स्थिति नर्वस सिस्टम पर असर डालती है. ये सभी पहलू मिलकर दिमाग और नर्वस सिस्टम पर इसके प्रभाव को गहराई देते हैं.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
योग और ध्यान का लंबे समय से अभ्यास कर चुके योग एक्सपर्ट हिमालयन सिद्धा अक्षर ने Health Shots से बातचीत में बताया कि भ्रामरी सिर्फ रिलैक्सेशन का तरीका नहीं है, बल्कि यह हमारे मूड और ऊर्जा को भी बदल सकती है. उनका कहना है कि जब उन्होंने पहली बार भ्रामरी की, तो यह बिखरे हुए विचारों को शांत कर वर्तमान क्षण में ले आई. यह अभ्यास अंदरूनी बेचैनी को कम कर मन को स्थिर करता है.
नर्वस सिस्टम के साथ इंटरैक्ट करती है
भ्रामरी प्राणायाम में ध्वनि को जीवन का मूल तत्व माना गया है. इतिहास गवाह है कि कई संस्कृतियों ने ध्वनि को एक ऐसी शक्ति माना है, जो सूक्ष्म कणों से लेकर पूरे ब्रह्मांड तक को आकार देती है. सिद्ध परंपरा में ब्रह्मांड को अलग-अलग फ्रीक्वेंसीज़ की एक मुश्किल लय माना जाता है, जहां पदार्थ, ऊर्जा और चेतना व्यवस्थित कंपन से जन्म लेते हैं. आधुनिक विज्ञान जहां ध्वनि को सीमित नजरिए से देखता है, वहीं भ्रामरी इसे शरीर पर असर डालने वाला एक वास्तविक और मापने योग्य तत्व मानती है. इस अभ्यास में अपनी ही सांस से पैदा होने वाली कंपन शरीर के भीतर फैलती है और नर्वस सिस्टम के साथ इंटरैक्ट करती है.
सेहत के लिए फायदेमंद
Is Bhramari Pranayama Good For Stress: गुनगुनाने की यह प्रक्रिया सेहत के लिए भी फायदेमंद मानी जाती है. सिद्धों ने यह समझा कि कंपन हमारे टिश्यूज़, शरीर के तरल प्रवाह और नर्वस सिस्टम को प्रभावित करती है. जब आप भ्रामरी करते हैं, तो यह कंपन खोपड़ी और साइनस के जरिये फैलती है, जिससे आसपास के टिश्यूज़ को फायदा मिलता है. हालिया रिसर्च बताती है कि लयबद्ध कंपन दिमाग के रास्तों को सिंक्रोनाइज़ कर सकती है, वेगल टोन को बेहतर बनाती है और पैरासिंपैथेटिक नर्वस सिस्टम को एक्टिव करती है, जिसे शरीर का “रेस्ट एंड डाइजेस्ट” मोड कहा जाता है. इससे हार्ट रेट स्थिर होती है और स्ट्रेस हार्मोन का स्तर घटता है.
भ्रामरी कैसे करें?
किसी शांत जगह पर आराम से बैठें, रीढ़ सीधी रखें और आंखें बंद करें. नाक से गहरी सांस लें और सांस छोड़ते समय होंठ बंद रखते हुए मधुमक्खी जैसी गुनगुनाहट करें. कंपन को सिर और चेहरे में महसूस करें. इसे 6 से 10 बार दोहराएं और अंत में कुछ देर शांत बैठकर अनुभव को महसूस करें. नियमित अभ्यास से तनाव में कमी, मन की स्पष्टता और भावनात्मक संतुलन बेहतर होता है. जैसा कि एक्सपर्ट कहते हैं, भ्रामरी सिर्फ बाहर के शोर को शांत नहीं करती, बल्कि अंदर एक स्थिर और संतुलित अवस्था बनाने में मदद करती है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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