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समय बदलता रहा, तकनीक आगे बढ़ती रही, लेकिन कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जो दशकों बाद भी उसी गर्मजोशी से कायम रहते हैं। हिसार आकाशवाणी और उसके श्रोताओं का संबंध भी ऐसा ही है जो अब केवल शहर या प्रदेश तक सीमित नहीं, बल्कि सरहदों पार भी कायम है। एक दौर था जब आकाशवाणी हिसार के दफ्तर में रोज पीली चिट्ठियां पहुंचती थीं। नीली स्याही से लिखे नाम, गांव का पता और नीचे विनम्र आग्रह हमारी फरमाइश जरूर सुनवाएं। गीत सुनाने से पहले फरमाइश करने वाले का नाम पुकारा जाता तो पूरे परिवार के चेहरे पर खुशी झलकती थी। आकाशवाणी में आज भी फरमाइशें आती हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि चिट्ठियों की जगह अब डिजिटल संदेशों ने ले ली हैं पर शब्दों में वही अपनापन महसूस होता है।
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विश्व रेडियो दिवस: पीली चिट्ठियों से ईमेल तक का सफर, श्रोताओं का जुड़ाव अब भी कायम; सरहदों पार से आती थी फरमाइश



