DRO को राहत, तहसीलदार के खिलाफ विभागीय जांच शुरू, 1 करोड़ में खरीदी जमीन 21 दिन बाद 5.8 करोड़ में बिकी थी Haryana News & Updates

[ad_1]

Last Updated:

पंचकूला में डीआरओ जोगिंद्र शर्मा को कोर्ट से अंतरिम जमानत मिली, ACB गिरफ्तारी नहीं करेगी. तहसीलदार विक्रम सिंगला पर विभागीय जांच शुरू, पर्ल्स ग्रुप की जमीन फर्जी तरीके से बेची गई थी.

Zoom

गिरफ्तारी से बचने के लिए डीआरओ जोगिंद्र शर्मा ने अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी.

पंचकूला. हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के डीआरओ जोगिंद्र शर्मा को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. एंटी करप्शन ब्यूरो अब उन्हें गिरफ्तार नहीं कर पाएगी. अदालत ने अंतरिम जमानत देते हुए उन्हें जांच में शामिल होने के आदेश दिए हैं. मामले की अगली सुनवाई 17 फरवरी को होगी.

6 फरवरी को गिरफ्तारी से बचने के लिए डीआरओ  जोगिंद्र शर्मा ने अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी. इस पर अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश विक्रमजीत अरोड़ा की अदालत में 11 फरवरी को सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील दीपांशु बंसल ने दलील दी कि एसीबी के पास ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि इस केस में जोगिंद्र शर्मा की कोई भूमिका है.

वकील ने कहा कि पीसी एक्ट की धारा 7A की अनुमति भी एसीबी के पास नहीं है, डिस्क्लोजर रिपोर्ट की कोई वैल्यू नहीं है और न ही रिश्वत की मांग, स्वीकृति या रिकवरी का कोई प्रमाण है.

एसीबी की ओर से सरकारी वकील ने जोगिंद्र शर्मा को मुख्य साजिशकर्ता बताया.दोनों पक्षों की लंबी बहस के बाद कोर्ट ने डीआरओ जोगिंद्र शर्मा को अंतरिम जमानत दे दी और उन्हें जांच में शामिल होने के निर्देश दिए.  पंचकूला DRO को अंतरिम जमानत, ACB नहीं करेगी गिरफ्तारी

उधर, गिरफ्तार तहसीलदार विक्रम सिंगला के मामले में विभागीय जांच भी शुरू हो गई है.एसडीएम चंद्रकांत कटारिया ने कमिश्नर अंबाला को पत्र लिखकर सार्वजनिक डीलिंग से जुड़े पदों पर छह माह से अधिक समय से जमे कर्मचारियों के तबादले की सिफारिश की है.कमिश्नर ने भी डीसी पंचकूला को पत्र लिखकर सरकार के आदेशानुसार कार्रवाई करने को कहा है. अब संबंधित कर्मचारियों के तबादले की तैयारी चल रही है.इसके अलावा, विभाग ने तहसीलदार विक्रम सिंगला से जुड़े सभी रिकॉर्ड भी तलब किए हैं. रजिस्ट्री, गवाहों की सूची और अन्य दस्तावेजों की जांच की जाएगी. एक सप्ताह में रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके बाद कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी.

क्या है मामला

गौरतलब है कि पंचकूला से एक रेवेन्यू अधिकारी के करीबी ने 17 एकड़ जमीन 1 करोड़ रुपये में खरीदी और फिर उसे तीन हफ्ते बाद 5.8 करोड़ रुपये में बेच दिया था और 21 दिन में 4.8 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया. यह जमीन पर्ल्स ग्रुप की थी. अहम बात है कि सुप्रीम कोर्ट ने पर्ल्स ग्रुप से जुड़ी प्रॉपर्टीज को बैचने पर स्टे लगाया हुआ है. लेकिन अफसरों की मिली भगत से यह फर्जीवाड़ा किया गया.

About the Author

authorimg

Vinod Kumar Katwal

Vinod Kumar Katwal, a Season journalist with 14 years of experience across print and digital media. I have worked with some of India’s most respected news organizations, including Dainik Bhaskar, IANS, Punjab K…और पढ़ें

[ad_2]