पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: बच्चों को समझाया जाए कि वास्तविकता से कटें नहीं Politics & News

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दुनिया के सारे ही चिराग रोशनी देने के साथ-साथ धुआं भी उठाते हैं। प्रकाश पाना चाहते हैं तो धुएं की तैयारी भी रखिए। केवल सूर्य का प्रकाश ऐसा है, जिसमें धुआं नहीं होता। और उसमें जो तपिश है, वो भी स्वास्थ्य के लिए आवश्यक बन जाती है। इन दिनों हमारे हाथ में एक चिराग है, जिसको सोशल मीडिया कहा जाता है। 9 से 10 घंटे स्क्रीन टाइम वाले बच्चे इस चिराग से रोशनी कम पा रहे हैं और झुलस ज्यादा रहे हैं। दो बड़े खतरे बच्चों के जीवन में उतर गए। पहला, वो परिवार से दूर हो रहे हैं और दूसरा, असली दुनिया से कट रहे हैं। जीवन में फैंटसी कुछ समय के लिए जरूरी है पर यथार्थ का सामना, यथार्थ में जीना ही जीवन का सच है। तो बच्चों को यह कैसे समझाया जाए कि वास्तविकता से कटो मत। एक बात उन्हें जरूर समझाएं कि सबसे बड़ी वास्तविकता है- आत्मा। उसका अगला कदम है परमात्मा। बाकी सारी दुनिया आनी-जानी है। तो सोशल मीडिया जैसी विध्वंसक ताकत से बच्चे स्वयं को कैसे बचाएं, इसके लिए उन्हें आत्मा का स्वाद चखाया जाए। और आत्मा का स्वाद ध्यान से मिलता है।

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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: बच्चों को समझाया जाए कि वास्तविकता से कटें नहीं