Karnal News: सड़क सुरक्षा पर 40 करोड़ से ज्यादा खर्चे फिर भी बढ़ गया हादसों व मौत का आंकड़ा Latest Haryana News

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करनाल। नेशनल हाईवे-44, छह राजमार्ग, पीडब्ल्यूडी, जिला परिषद और नगर निगम की सड़कों की मरम्मत पर एक साल में 40 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हुए। इसके बावजूद जिले में सड़क हादसों और मौत का आंकड़ा कम नहीं हो पाया। वर्ष 2024 की तुलना में 10 फीसदी तक सड़क हादसे बढ़े हैं। गंभीर हादसों की संख्या में भी करीब 18 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है। हादसों में मौत का ग्राफ भी 15 प्रतिशत तक ऊपर गया है।

इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह सड़कों की खामियां तो हैं ही। साथ में वाहन चालकों की लापरवाही, वाहन का अनफिट होना या बीच रास्ते में खड़ा होना भी हादसों का कारण बना है। पुलिस की ओर से सख्ती बरतते हुए चालानों की संख्या भी बढ़ा दी गई है, इसके बाद भी हादसे कम नहीं हुए।

आंकड़ों पर निगाह डालें तो 2024 में 692 सड़क हादसों में 277 लोगों की जान गई थी, 2025 में हादसों की संख्या 759 पर पहुंच गई और इन हादसों में 342 मौते हुई हैं। हालांकि 2023 में हादसों की संख्या 782 थी, जोकि इस बार से ज्यादा है लेकिन मौतों की संख्या तब इस बार के मुकाबले कम थी।

नेशनल हाईवे-44 व अन्य राजमार्गों पर दुर्घटना संभावित क्षेत्र भी चिह्नित हैं लेकिन संबंधित विभाग करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी इन मार्गों को सुरक्षित नहीं बना पाया है। ऐसे में लोग भी अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। ब्यूरो

अनदेखी : तय समय पर नहीं होती सड़कों की मरम्मत

सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ शुभम और एडवोकेट संदीप राणा का कहना है कि विभागों की ओर से सड़कों पर काम भी कराया जाता है लेकिन मरम्मत व सुरक्षा मानकों का काम तय समय पर शुरू व पूरा नहीं होता। इसलिए लोग हादसों का शिकार होते हैं। अपने काम में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।

– लापरवाही : सर्दी व कोहरे के बाद लगीं सफेद पट्टियां

स्थिति यह है कि सर्दी व कोहरा आने के बाद ही सड़कों पर सफेद पट्टी लगाई गई। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ तेजपाल का कहना है यह भी अधिकारियों की लापरवाही है कि सर्दी आने और कोहरा पड़ने के बाद ही सफेद पट्टियां लगाई जाती हैं। जबकि यह कार्य मानसून जाने के बाद सड़कों की मरम्मत के समय ही शुरू हो जाना चाहिए लेकिन अधिकारी ध्यान नहीं देते।

– जिम्मेदारी : टेंडर में शर्तें हैं, लेकिन काम नहीं होता

जब किसी सड़क के निर्माण का टेंडर जारी होता है तो उसकी शर्तों में यह तय हो जाता है कि डीएलपी यानी डिफेक्ट लाइबिलिटी पीरियड (दोष दायित्व अवधि) जितने समय की है, इस दौरान मरम्मत व सड़क सुरक्षा मानक यानी सफेद पट्टी लगाना, कैट आईज, जैबरा क्रॉसिंग बनवाने का कार्य संबंधित एजेंसी द्वारा ही किया जाएगा। एडवोकेट राजेश शर्मा का कहना है कि अधिकारी ध्यान नहीं देते इसलिए निजी एजेंसी भी काम से बच जाती है। पिछले दो साल में ऐसी लापरवाही पर किसी एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई।

हादसों की स्थिति

वर्ष

कुल हादसे

गंभीर हादसे

मौत

2023

782

305

338

2024

692

277

325

2025

759

318

342

कुल

2233

900

1005

– 90.58 फीसदी हादसों में तेज रफ्तार वजह

हादसे की वजह

2024 (प्रतिशत)

2025 (प्रतिशत)

तेज रफ्तार

278 (74.13%)

375 (90.58%)

गलत साइड मुड़ना

47 (12.53%)

76 (18.36%)

गलत दिशा में वाहन

20 (5.33%)

31 (7.49%)

खतरनाक ओवरटेकिंग

10 (2.67%)

11 (2.66%)

ये हैं कारण

– जर्जर सड़कें : शहर में कोई भी ऐसी सड़क नहीं है, जो गड्ढा मुक्त हो। हाईवे पर भी नाले खुले हैं और अन्य खामियां हैं।

– चालक की लापरवाही : वाहन चालक भी लापरवाही बरतते हैं। आईआरएडी रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में हुए हादसों में तेज रफ्तार, गलत दिशा में व नशे में वाहन चलाना सबसे बड़ी लापरवाही सामने आई है। पुलिस की ओर से 39 हजार चालान हर माह किए जा रहे हैं।

– अनफिट वाहन : शहर में अनफिट वाहन दौड़ रहे हैं। सबसे ज्यादा ओवरलोड वाहन भी देखे जा सकते हैं। आरटीए की सख्ती के बाद भी इन पर लगाम नहीं लगी। आरटीए की ओर से भी हर माह 350 से ज्यादा वाहन इंपाउंड किए जाते हैं।

वर्जन-

सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में हादसों के हालात पर चर्चा की गई थी। अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सड़कों की खामियों को अपने स्तर पर तुरंत पहचानते हुए दूर करें। ताकि लोगों को महफूज सफर मिले। वाहन चालकों से भी यातायात नियमों का पालन करने की अपील है। लापरवाही पर पुलिस चालान कर रही है। – उत्तम सिंह, उपायुक्त

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Karnal News: सड़क सुरक्षा पर 40 करोड़ से ज्यादा खर्चे फिर भी बढ़ गया हादसों व मौत का आंकड़ा