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फरीदाबाद: फरीदाबाद के सूरजकुंड में जो अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर क्राफ्ट मेला चल रहा है वो फिर से ये साबित कर रहा है कि कला और परंपरा किसी सीमा में बंधी नहीं रहती. मेले में कदम रखते ही हर तरफ से अलग-अलग राज्यों और देशों की खुशबू, रंग और संस्कृति महसूस होती है. कहीं मिट्टी की सोंधी खुशबू है तो कहीं कपड़ों पर बनी बारीक कढ़ाई और कहीं लोक संगीत की धुनें मन को छू जाती हैं. इस बार भी सूरजकुंड मेला सिर्फ खरीदारी की जगह नहीं बना है बल्कि लोगों को अलग-अलग संस्कृतियों से जुड़ने का एक शानदार मौका मिल रहा है.
बांग्लादेशी हस्तशिल्पकार का जादू
बात करें बांग्लादेश से आए हस्तशिल्पकार मोहम्मद शेफरुन की तो Local18 से बातचीत में उन्होंने बताया कि वह हर साल सूरजकुंड मेले में आते हैं. उनके स्टॉल पर जामदानी साड़ियां, कथावर्क वाली साड़ियां, जामदानी सूट पीस और कुर्ते मिल जाते हैं. उन्होंने बताया जामदानी पूरी तरह हाथ से बनती है इसमें मेहनत भी खूब लगती है. एक साड़ी को दो कारीगर मिलकर बनाते हैं. अगर डिजाइन ज्यादा जटिल हो तो एक साड़ी बनने में एक से दो महीने लग जाते हैं. आम जामदानी साड़ी भी कम से कम एक महीने में तैयार होती है.
साड़ियों की कीमत
उनके हिसाब से जामदानी की खासियत उसका अनोखा रंग हल्का वजन और बेहद बारीक डिजाइन है. उनके हाथ में जो साड़ी थी उसकी कीमत 22 हजार रुपये थी. उनके पास एक लाख रुपये तक की जामदानी साड़ियां भी हैं. उन्होंने यह भी बताया कि उनके परिवार की कई पीढ़ियां यही काम कर रही हैं. उनके पिताजी के जमाने से ही घर में जामदानी बनती आ रही है और अब वही परंपरा वह आगे बढ़ा रहे हैं.
हाथों से बुनी जाती हैं साड़ियां
सूरजकुंड मेले में उनके स्टॉल पर जामदानी साड़ियां काफी बिक रही हैं. 4 हजार से लेकर 1 लाख रुपये तक की साड़ियां वहां हैं, लेकिन सबसे ज्यादा मांग 4 से 6 हजार वाली जामदानी साड़ियों की है. कम कीमत वाली जामदानी साड़ी को बनाने में करीब एक हफ्ता लगता है फिर भी ये पूरी तरह हाथ से बुनी जाती है.
धागे की बात करें तो मोहम्मद शेफरुन ने बताया कि बांग्लादेश का उनका इलाका धागे के लिए मशहूर है. वहां बाजार में आसानी से मनचाहा धागा मिल जाता है. पहले धागा रंगा जाता है फिर करघे पर बैठकर जामदानी बुनी जाती है. उनके स्टॉल पर सिल्क साड़ियां भी हैं जिन्हें लोग खूब पसंद कर रहे हैं.
जामदानी साड़ी का वजन सिर्फ 150 ग्राम होता है
बांग्लादेश से ही आए एक और कारीगर अजीजुल हक ने बताया कि उनके पास जाल डिजाइन वाली जामदानी साड़ियां भी हैं जिनमें सिल्क और कॉटन दोनों का मिश्रण होता है. ऐसी एक साड़ी की कीमत 6800 रुपये है जबकि प्योर असली जामदानी साड़ी 4500 रुपये से शुरू हो जाती है. जामदानी साड़ी का वजन सिर्फ 150 ग्राम होता है और इसकी लंबाई 12 हाथ होती है. साड़ी के साथ ब्लाउज भी मिलता है. उनके पास 28 हजार रुपये तक की जामदानी साड़ियां भी हैं.
भारत सरकार करती है मदद
अजीजुल हक ने बताया कि भारतीय सरकार की तरफ से उन्हें काफी सहयोग मिलता है. बांग्लादेश से भारत आने-जाने का किराया मुफ्त है और सूरजकुंड मेले में स्टॉल भी बिना पैसे के मिल जाता है. एक दिन में उनके यहां 10 से 20 जामदानी साड़ियां आराम से बिक जाती हैं. कई ग्राहक तो 25 हजार रुपये तक की साड़ी भी खुशी-खुशी खरीद रहे हैं.
ज्यादातर राजनीति, मीडिया तक ही सीमित
जहां तक भारत और बांग्लादेश के रिश्तों की बात है कारीगरों का कहना है कि जो भी तनाव या विवाद दिखाई देता है वो ज्यादातर मीडिया तक ही सीमित रहता है. असल जिंदगी में दोनों देशों के लोगों के बीच अपनापन और इज्जत साफ नजर आती है. सूरजकुंड मेला इसकी सबसे अच्छी मिसाल है जहां कला के जरिए रिश्ते और भी मजबूत होते दिखाई दे रहे हैं.
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