चंडीगढ़ में देसी पिस्तौल रखने का आरोपी दोषी करार: 2 साल सजा और जुर्माना, 8 गवाह पेश, परिवार का हवाला देकर नरमी की मांग – Chandigarh News Chandigarh News Updates

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चंडीगढ़ के मलोया थाना क्षेत्र में अवैध हथियार रखने के मामले में अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए दो साल की सख्त कैद की सजा सुनाई है। अदालत ने मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद आरोपी को आर्म्स एक्ट के तहत दोषी मानते हुए सजा का आदेश पारित किया। यह मामला 15 फरवरी 2025 का है। थाना मलोया, चंडीगढ़ में आरोपी के खिलाफ धारा 25/54/59 आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया था। मामले में आरोपी अर्जुन ठाकुर उर्फ मुन्ना है। जानिए पूरा मामला सरकारी वकील के मुताबिक, 15 फरवरी 2025 को पुलिस टीम डड्डू माजरा पुल के पास डंपिंग ग्राउंड इलाके में गश्त और अपराध रोकथाम ड्यूटी पर थी। इसी दौरान शाम करीब 6 बजे पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि एक युवक मलोया स्थित राधा स्वामी सत्संग भवन के पास पार्क में अवैध हथियार के साथ बैठा है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और बताए गए युवक को काबू कर लिया। तलाशी के दौरान आरोपी के पास से एक देसी पिस्तौल और दो जिंदा कारतूस बरामद किए गए। पूछताछ में आरोपी हथियार रखने का कोई लाइसेंस या परमिट पेश नहीं कर सका। हथियार और सबूत किए जब्त पुलिस ने मौके पर देसी पिस्तौल और कारतूस को सील कर जब्त किया। जांच के दौरान साइट प्लान तैयार किया गया, गवाहों के बयान दर्ज किए गए और बरामद हथियार को जांच के लिए आर्मर के पास भेजा गया। आर्मर की रिपोर्ट में पिस्तौल को कार्यशील पाया गया। मामले में आर्म्स एक्ट के तहत जिला मजिस्ट्रेट चंडीगढ़ से आवश्यक स्वीकृति भी प्राप्त की गई। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने अदालत में चालान पेश किया। कोर्ट में 8 गवाह किए गए पेश मुकदमे की सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष की ओर से कुल 8 गवाहों को अदालत में पेश किया गया। इनमें जांच अधिकारी, बरामदगी से जुड़े गवाह, मालखाना प्रभारी, आर्मर और जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय का एक कर्मचारी शामिल था। इसके अलावा, बरामद देसी पिस्तौल और कारतूस को अदालत में केस प्रॉपर्टी के तौर पर भी पेश किया गया। बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि मामले में कोई स्वतंत्र गवाह शामिल नहीं किया गया है और आरोपी को झूठा फंसाया गया है। हालांकि अदालत ने माना कि पुलिस गवाहों की गवाही आपस में मेल खाती है और भरोसेमंद है। अदालत ने कहा कि केवल स्वतंत्र गवाह न होने से सरकारी पक्ष का मामला कमजोर नहीं होता, यदि सरकारी गवाहों की गवाही विश्वसनीय हो। अदालत ने यह भी माना कि आर्मर द्वारा हथियार की जांच पर्याप्त है और टेस्ट फायर न होने से मामले पर कोई असर नहीं पड़ता। परिवार की जिम्मेदारी का हवाला देकर नरमी की मांग अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि सरकारी पक्ष ने संदेह से परे साबित कर दिया कि आरोपी के पास से एक देसी पिस्तौल और दो जिंदा कारतूस बिना लाइसेंस बरामद हुए थे। इसके बाद आरोपी अर्जुन ठाकुर उर्फ मुन्ना को आर्म्स एक्ट की धारा 25 के तहत दोषी करार दिया गया। सजा पर सुनवाई के दौरान आरोपी ने खुद को गरीब बताते हुए और परिवार की जिम्मेदारी का हवाला देकर नरमी की मांग की। लेकिन अदालत ने इसे गंभीर अपराध मानते हुए प्रोबेशन का लाभ देने से इनकार कर दिया। अदालत ने आरोपी को दो साल की कैद और 3 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में आरोपी को तीन महीने की अतिरिक्त सख्त कैद भुगतनी होगी। अदालत ने आदेश दिया कि आरोपी ने पहले जो समय जेल में बिताया है, उसे उसकी सजा में जोड़कर माना जाएगा।

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चंडीगढ़ में देसी पिस्तौल रखने का आरोपी दोषी करार: 2 साल सजा और जुर्माना, 8 गवाह पेश, परिवार का हवाला देकर नरमी की मांग – Chandigarh News