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सुधा चंद्रन ने हाल ही में अपनी जिंदगी के एक डरावने अनुभव को साझा किया, जिसे वह आज भी नहीं भूल पाई हैं. गुजरात में शूटिंग के दौरान एक रात होटल के कमरे में उन्हें किसी अजीब मौजूदगी का एहसास हुआ. नींद खुलने पर अलमारी खुली थी और अगले ही पल उनके सीने पर भारी दबाव महसूस होने लगा. शरीर जकड़ गया और आवाज़ भी नहीं निकल पा रही थी. सुधा कहती हैं कि इस अनुभव को याद कर वो आज भी डर जाती हैं.
सुधा चंद्रन ने शेयर किया खौफनाक अनुभव.
नई दिल्ली. टीवी और सिनेमा की दुनिया में दशकों से सक्रिय रहीं सुधा चंद्रन ने पर्दे पर अनगिनत किरदार निभाए हैं. अक्सर वैंप के किरदार से लोगों का दिल दहलाने वाली सुधा चंद्रन की असल जिंदगी का एक डरावना अनुभव आज भी उन्हें सिहरन से भर देता है. हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने एक ऐसी रात को याद किया, जिसने उनकी आस्था और संवेदनशीलता दोनों की परीक्षा ले ली थी. सुधा चंद्रन कहती हैं कि वो एनर्जी को बहुत जल्दी सेंस कर लेती हैं. अगर कहीं कुछ भी गलत होता है तो वो बहुत जल्द ही सेंस कर लेती हैं.
हिंदी रश के साथ लेटेस्ट इंटरव्यू में सुधा चंद्रन ने अपने साथ हुई एक खौफनाक घटना को याद किया. यह घटना उस समय की है जब सुधा गुजरात में शूटिंग कर रही थीं. दिनभर की थकान के बाद वह देर रात होटल लौटीं. सब कुछ सामान्य था. वो रात को 11:30 बजे होटल पहुंचीं खाना खाना और फिर वो मां के साथ बिस्तर पर सोने गईं. सुधा के बगल में उनकी मां भी सो रही थीं. लेकिन रात को अचानक उनके कमरे में ऐसा कुछ हुआ कि उनकी नींद उड़ गई और वो डर से कांपने लगीं.
आधी रात को डर से कांपने लगी थीं सुधा चंद्रन
सुधा चंद्रा कहती हैं कि रात को अचानक जब उनकी नींद खुली तो कमरे की अलमारी खुली हुई थी, जबकि उन्हें पूरा यकीन था कि उन्होंने ऐसा नहीं किया था. सुधा बताती हैं कि उसी पल उन्हें किसी अजीब मौजूदगी का एहसास हुआ. उन्हें लगा जैसे कोई अदृश्य शक्ति धीरे-धीरे उनकी ओर बढ़ रही हो. अगले ही क्षण उनके सीने पर असहनीय बोझ सा महसूस होने लगा. शरीर जैसे जकड़ गया न आवाज निकल पा रही थी, न हाथ-पैर हिल पा रहे थे. मां पास में थीं, फिर भी सुधा खुद को पूरी तरह असहाय महसूस कर रही थीं.
भगवान का नाम लेकर सुधा ने खुद को संभाला
उस डरावने पल में उन्हें लगा कि वह ऊर्जा सिर्फ मौजूद नहीं है, बल्कि उन्हें नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रही है. डर इतना गहरा था कि समय जैसे थम गया हो, लेकिन इसी बेबसी के बीच उन्होंने अपनी आस्था का सहारा लिया. मन ही मन भगवान कार्तिक का नाम लिया और पूरी ताकत जुटाकर मां को छूने की कोशिश की. उसी क्षण जैसे कोई बंधन टूट गया, आवाज़ लौट आई, शरीर हल्का होने लगा और वह दबाव धीरे-धीरे खत्म हो गया.
सुधा चंद्रा कहती हैं कि उन्होंने मां को उठाया और फिर उनकी मां ने तुरंत उन्हें संभाला, विभूति लगाई और उन्हें शांत किया. सुधा कहती हैं कि उस रात के बाद वह देर तक सो नहीं पाईं, लेकिन आस्था की शक्ति पर उनका भरोसा और मजबूत हो गया.
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प्रांजुल सिंह 3.5 साल से न्यूज18 हिंदी से जुड़ी हुई हैं. उन्होंने Manorama School Of Communication (MASCOM) से जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन में डिप्लोमा किया है. वो 2.5 साल से एंटरटेनमेंट डेस्क पर काम कर रही है…और पढ़ें
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‘अचानक मेरे सीने पर…’ पैरानॉर्मल एक्टिविटी का शिकार हुई थीं सुधा चंद्रन, सुनाया उस खौफनाक रात का किस्सा



