जरूरत की खबर- गेंहू से ज्यादा हेल्दी ज्वार-रागी: ग्लूटेन फ्री है, जानें न्यूट्रिशनल वैल्यू्, हेल्थ बेनिफिट्स, किन्हें नहीं खाना चाहिए Health Updates

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12 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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कुछ दिनों पहले बॉलीवुड एक्ट्रेस रकुलप्रीत सिंह ने एक इंटरव्यू में अपनी डाइट के बारे में खुलकर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने बताया कि वह पिछले 10 सालों से गेहूं के आटे की जगह ज्वार और रागी जैसे मिलेट्स के आटे का सेवन कर रही हैं।

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या गेहूं के आटे की तुलना में ज्वार-रागी का आटा सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद है? दरअसल, हम रोज खाने के लिए जिस आटे का इस्तेमाल करते हैं, उसका सीधा असर हमारे पाचन, वजन और ब्लड शुगर लेवल पर पड़ता है। ऐसे में ये समझना जरूरी है कि हमें अपनी डेली डाइट में कौन सा आटा शामिल करना चाहिए।

तो चलिए, आज ‘जरूरत की खबर’ में हम ज्वार-रागी के हेल्थ बेनिफिट्स के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • ज्वार और रागी में कौन-कौन से पोषक तत्व होते हैं?
  • क्या गेहूं के आटे को ज्वार-रागी से रिप्लेस करना सही है?

एक्सपर्ट: डॉ. पूनम तिवारी, सीनियर डाइटीशियन, डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ

सवाल- ज्वार और रागी में कौन-कौन से पोषक तत्व होते हैं?

जवाब- यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर (USDA) के मुताबिक, ज्वार और रागी दोनों ही पोषक तत्वों से भरपूर मिलेट्स हैं। इनमें कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट, प्लांट-बेस्ड प्रोटीन और फाइबर अच्छी मात्रा में होते हैं, जो लंबे समय तक ऊर्जा देने और पाचन को बेहतर बनाने में मदद करते हैं।

रागी कैल्शियम और आयरन का अच्छा सोर्स है। वहीं ज्वार में मैग्नीशियम, पोटेशियम और कई सारे एंटीऑक्सिडेंट्स पाए जाते हैं। इसके अलावा दोनों में कई जरूरी विटामिन्स और मिनरल्स होते हैं, जो ओवरऑल हेल्थ को सपोर्ट करते हैं। नीचे दिए गए ग्राफिक से 100 ग्राम ज्वार-रागी की न्यूट्रिशनल वैल्यू समझिए-

सवाल- गेहूं और ज्वार-रागी के आटे की न्यूट्रिशनल वैल्यू में क्या फर्क है?

जवाब- इसमें फर्क कुछ खास पोषक तत्वों की वजह से होता है। जैसेकि-

  • ज्वार और रागी में गेहूं के मुकाबले ज्यादा डाइटरी फाइबर होता है। इससे पाचन बेहतर रहता है और लंबे समय तक पेट भरा महसूस होता है।
  • रागी कैल्शियम से भरपूर होता है, जबकि ज्वार में आयरन, मैग्नीशियम और पोटेशियम अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं। हालांकि गेहूं में भी मिनरल्स होते हैं, लेकिन मिलेट्स की तुलना में कम।
  • गेहूं में ग्लूटेन होता है, जो कुछ लोगों में पाचन संबंधी समस्याएं पैदा कर सकता है। वहीं ज्वार और रागी नेचुरली ग्लूटेन-फ्री होते हैं, इसलिए ये ज्यादा आसानी से पचते हैं।
  • ज्वार और रागी का ग्लाइसेमिक रिस्पॉन्स गेहूं से कम होता है। यानी ये ब्लड शुगर को धीरे-धीरे बढ़ाते हैं। इसलिए ये डायबिटीज और वजन कंट्रोल के लिए बेहतर माने जाते हैं।

सवाल- ज्वार और रागी के क्या हेल्थ बेनिफिट्स हैं?

जवाब- ये दोनों ही पोषक तत्वों से भरपूर मिलेट्स हैं और सेहत को कई तरह से फायदा पहुंचाते हैं। जैसेकि-

  • इन्हें डेली डाइट में शामिल करने से मेटाबॉलिक हेल्थ बेहतर रहती है। साथ ही लाइफस्टाइल डिजीज का जोखिम कम होता है।
  • इनमें मौजूद फाइबर पाचन को बेहतर बनाता है। साथ ही ब्लड शुगर कंट्रोल रखने में मदद करता है।
  • रागी खासतौर पर कैल्शियम और आयरन से भरपूर होती है, जो हड्डियों को मजबूत बनाती है। साथ ही हीमोग्लोबिन लेवल बढ़ाने में मददगार है।
  • ज्वार में मौजूद मैग्नीशियम, पोटेशियम और एंटीऑक्सिडेंट्स हार्ट हेल्थ को सपोर्ट करते हैं, मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाते हैं। साथ ही कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल में रखने में मदद करते हैं।
  • ज्वार-रागी दोनों ही ग्लूटेन-फ्री होते हैं। इसलिए ये सीलिएक डिजीज वाले लोगों के लिए सुरक्षित माने जाते हैं। सीलिएक डिजीज एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें गेहूं, जौ और राई में मौजूद ग्लूटेन खाने से आंतों को नुकसान पहुंचता है।

नियमित और संतुलित मात्रा में इनका सेवन ओवरऑल हेल्थ के लिए फायेदमंद है। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

सवाल- ज्वार और रागी को डाइट में शामिल करने का सही तरीका क्या है?

जवाब- इसके कई सारे तरीके हैं। जैसेकि-

  • रागी का डोसा, चीला या इडली नाश्ते में शामिल कर सकते हैं।
  • ज्वार का उपमा, पोहा या खिचड़ी बना सकते हैं।
  • रागी की दलिया या माल्ट बच्चों और बुजुर्गों के लिए अच्छा विकल्प है।
  • ज्वार या रागी के आटे को मल्टीग्रेन आटे में मिलाकर यूज कर सकते हैं।

ध्यान रखें, इन्हें हमेशा दाल, सब्जी या दही के साथ लें ताकि डाइट में संतुलन बना रहे।

सवाल- क्या गेहूं के आटे को ज्वार-रागी से रिप्लेस करना सही है?

जवाब- रिप्लेस करने की बजाय इसे संतुलित तरीके से डाइट में शामिल करना बेहतर है। ज्वार-रागी ग्लूटेन-फ्री होने के साथ-साथ फाइबर और मिनरल्स से भरपूर होते हैं। इसलिए ये हेल्थ के लिए ज्यादा फायदेमंद हैं।

वहीं गेहूं कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन का अच्छा सोर्स है। इसलिए बेहतर है कि डाइट में गेहूं और मिलेट्स दोनों के आटे को बारी-बारी से शामिल करें, ताकि शरीर को सभी जरूरी पोषक तत्व मिलते रहें।

सवाल- क्या डायबिटिक लोग ज्वार और रागी खा सकते हैं?

जवाब- हां, डायबिटिक लोगों के लिए गेहूं की बजाय ज्वार-रागी खाना बेहतर माना जाता है। इन दोनों मिलेट्स का ग्लाइसेमिक इंडेक्स गेहूं से कम होता है, जिससे ब्लड शुगर धीरे-धीरे बढ़ती है। हालांकि इनमें कार्बोहाइड्रेट भी होते हैं, इसलिए सीमित मात्रा में ही खाएं। डेली डाइट में शामिल करने से पहले डाइटीशियन से सलाह जरूर लें।

सवाल- क्या बच्चों-बुजुर्गों को ज्वार-रागी की रोटी खिला सकते हैं?

जवाब- हां, उम्र व पाचन क्षमता को ध्यान में रखते हुए बच्चों और बुजुर्गों को ज्वार-रागी की रोटी खिला सकते हैं। कैल्शियम और आयरन से भरपूर रागी बच्चों की ग्रोथ और बुजुर्गों की हड्डियों के लिए फायदेमंद है। बेहतर पाचन के लिए बच्चों और बुजुर्गों को रागी का दलिया, चीला या डोसा जैसे विकल्प देना ज्यादा सही है। शुरुआत कम मात्रा से करें और कोई भी परेशानी होने पर डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

सवाल- क्या ज्वार-रागी का ज्यादा सेवन नुकसानदायक हो सकता है?

जवाब- हां, जरूरत से ज्यादा लेने से गैस या अपच की समस्या हो सकती है। कुछ लोगों को ज्वार-रागी से एलर्जी हो सकती है, उन्हें इसे नहीं खाना चाहिए।

वैसे तो ज्वार-रागी का आटा आमतौर पर सभी के लिए सुरक्षित है। लेकिन कुछ लोगों को डॉक्टर की सलाह के बिना इसका सेवन नहीं करना चाहिए। जैसेकि-

  • जिन्हें थायरॉइड की समस्या है।
  • जिन्हें किडनी से जुड़ी कोई समस्या है।
  • जिन्हें इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) है।
  • जिन्हें पेट दर्द या अपच की समस्या रहती है।

कुल मिलाकर, बेहतर यही है कि ज्वार-रागी को संतुलित मात्रा में और अन्य अनाजों के साथ बारी-बारी से डाइट में शामिल करें।

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