सोने चांदी से नहीं…धान से ज्वेलरी बनाती है ये युवती, हर कोई देखकर रह जाता है दंग, पूछता है-ये कैसे बनाते हैं? Haryana News & Updates

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फरीदाबाद. सोना-चांदी और हीरे की दुनिया में अगर कोई बोले कि गहने धान से बने हैं तो सुनकर चौंकना लाज़मी है. आखिर धान तो रोज़ की थाली का हिस्सा है और गहनों से उसका क्या रिश्ता? दरअशल, हरियाणा के फरीदाबाद के सूरजकुंड मेले में इस बार कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है. अरावली की वादियों के बीच लगे इस हस्तशिल्प मेले में एक स्टॉल सबका ध्यान खींच रहा है यहां धान के दानों से बने हार, झुमके और टॉप्स सजे हुए हैं. लोग पहले तो आंखें फाड़कर देखते हैं. फिर नज़दीक आकर हर चीज़ को गौर से छूते-टटोलते हैं. फिर वही सवाल क्या ये सच में धान से बने हैं?

कोलकाता की पुतुल दास मित्रा इस जूलरी की कारीगर हैं. Local18 से बात करते हुए वो बताती हैं कि ये जूलरी पूरी तरह से धान के दानों से बनती है और खास बात ये है कि इसे धो भी सकते हैं. रोज़मर्रा में जो धान हम खाते हैं उसी को खास प्रोसेस से गुज़ारते हैं. पहले केमिकल प्रोसेसिंग, फिर हैरलडाइज में डालकर एक-एक दाना जोड़ना. इसमें जो रंग इस्तेमाल करते हैं वो पानी से खराब नहीं होते तो लोग आराम से पहन सकते हैं.

पुतुल बताती हैं कि हर डिज़ाइन उनका खुद का है हर गहने को उन्होंने अपना नाम दिया है. हार, झुमके, टॉप्स सब कुछ मौजूद है लेकिन बनाना आसान बिल्कुल नहीं. एक दिन में मुश्किल से दो-तीन जूलरी बन पाती हैं. लगातार काम करो फिर भी दो ही तैयार होती हैं. अभी उनके साथ 15 से 16 महिलाएं काम कर रही हैं सब मिलकर ये अनोखी जूलरी बना रही हैं.

पुतुल पिछले 26 साल से ये काम कर रही हैं. मज़ेदार बात ये है कि उन्होंने ये कहीं से सीखा नहीं ये उनका अपना इनोवेशन है. शुरुआत में उन्होंने धान से राखी बनाना शुरू किया था. राखी बनाते-बनाते उन्हें लगा कि धान के दाने छोटे-छोटे मोतियों जैसे लगते हैं तो क्यों न जूलरी बनाई जाए? फिर क्या था एक्सपेरिमेंट शुरू कर दिया. कई डिज़ाइन फेल हुए मेहनत बेकार गई लेकिन पुतुल ने हार नहीं मानी. धीरे-धीरे यह शौक उनका पेशा बन गया.

50 रुपये से 1000 रुपये तक की जूलरी

कीमत की बात करें तो पुतुल की जूलरी आम लोगों के बजट में है. 50 रुपये से 1000 रुपये तक की जूलरी मिल जाती है. लोग अक्सर समझ नहीं पाते कि ये धान से बनी है, इसलिए उन्होंने स्टॉल पर बड़ा सा धान की जूलरी लिख रखा है. लोग पढ़ते ही चौंक जाते हैं और सवालों की झड़ी लगा देते हैं. पुतुल बताती हैं पिछले साल भी सूरजकुंड मेले में तगड़ा रिस्पॉन्स मिला था इस बार भी लोग खूब पसंद कर रहे हैं.

पुतुल को अब तक मिल चुके हैं कई अवार्ड

पुतुल दास मित्रा की धान की जूलरी भारत ही नहीं अमेरिका, चीन, ब्राज़ील, फ्रांस, इटली, अफ्रीका और ब्रिटेन जैसे देशों तक जा चुकी है. वो दूसरों को ट्रेनिंग भी देती हैं और कहती हैं कि भारत में उनके अलावा कोई और धान की जूलरी बनाना सिखाता ही नहीं. उनके साथ काम करने वाली कई लड़कियों ने खुद का काम भी शुरू किया है. उनकी कला को कई बड़े अवॉर्ड मिल चुके हैं. 2002 में पश्चिम बंगाल सरकार का राज्य पुरस्कार 2014 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से राष्ट्रीय पुरस्कार ताज महोत्सव का बेस्ट आर्टिस्ट अवॉर्ड, त्रिपुरा सरकार से बेस्ट क्राफ्ट पर्सन अवॉर्ड. सच कहें तो धान जैसे सादे अनाज को पुतुल दास मित्रा ने अपनी मेहनत से खास बना दिया है. आज वो हजारों लोगों के लिए सचमुच एक मिसाल हैं.

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