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Health News: मानव सभ्यता के विकास के साथ-साथ स्वास्थ्य की परिभाषा भी बदलती रही है. पहले जहां आयुर्वेदिक पद्धतियां जीवन का अनिवार्य हिस्सा थीं, वहीं आधुनिक समय में रासायनिक उत्पादों ने जीवनशैली पर गहरी छाप छोड़ी है. विशेषकर मौखिक स्वच्छता की बात करें तो आज के युग में टूथपेस्ट, माउथवॉश और केमिकल-आधारित उत्पादों की भरमार है, लेकिन इनके निरंतर और अंधाधुंध प्रयोग ने अनेक नई समस्याएं भी जन्म दी हैं. ऐसे समय में आयुर्वेद की ओर लौटना एक विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता है. इसी दिशा में पतंजलि अनुसन्धान संस्थान ने दंतकांति गंडूष ऑयल पुलिंग को प्रस्तुत किया है, जो न केवल हमारी प्राचीन परंपरा का जीवंत प्रमाण है बल्कि आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी प्रामाणिक और प्रभावशाली है.
आधुनिक जीवनशैली ने हमारे भोजन और रहन-सहन में भारी बदलाव ला दिया है. अत्यधिक मसालेदार भोजन, जंक फूड और चीनी का ज्यादा सेवन न केवल दांतों को कमजोर करता है बल्कि मसूड़ों की बीमारियों, पायरिया, कैविटी, दांतों के गिरने और मुंह से दुर्गंध जैसी समस्याओं को भी जन्म देता है. आज वैश्विक स्तर पर ओरल हेल्थ से जुड़ी समस्याएँ इतनी गंभीर हैं कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य की बड़ी चुनौती माना है. भारत में स्थिति और भी चिंताजनक है क्योंकि यहां दांत और मसूड़ों की बीमारियाँ आम हैं और लोग ओरल हेल्थ को उतनी गंभीरता से नहीं लेते.
पतंजलि दंतकांति गंडूष: आधुनिक विज्ञान से जुड़ा आयुर्वेद
आयुर्वेद में किसी भी प्रकार की दन्त समस्याओं के लिए गंडूष क्रिया का वर्णन किया गया हैं. यह प्रक्रिया केवल मौखिक स्वच्छता तक सीमित नहीं है बल्कि इसका सीधा प्रभाव शरीर के अन्य अंगों पर भी पड़ता है. प्रात:काल मुंह में तेल भरकर कुछ मिनट तक मुख में डाले रखना गंडूष क्रिया कहलाता है. महान आयुर्वेद चिकित्सकों सुश्रुत और वाग्भट्ट ने भी इसे दैनिक दिनचर्या का अभिन्न अंग मानते हुए मौखिक स्वास्थ्य के लिए प्रभावशाली बताया है. गंडूष क्रिया का वर्णन करते हुए लिखा गया है कि इस औषधीय तेल को 4 से 5 मिनट तक मुख में रखना चाहिए और उसके बाद कुल्ला नहीं करना चाहिए, जिससे कि इस औषधीय तेल का प्रभाव लम्बे समय तक मुख में बना रहे. गंडूष न केवल दांतों और मसूड़ों को मज़बूत करता है, बल्कि कंठ, स्वरयंत्र और पाचन क्रिया को भी स्वस्थ बनाए रखने में सहायक है.
पारंपरिक गंडूष प्रक्रिया में तेल या औषधीय द्रव का प्रयोग को आधार मान पतंजलि ने इसे आधुनिक विज्ञान से जोड़ते हुए दंतकांति गंडूष ऑयल पुलिंग विकसित किया है. यह विशेष औषधीय मिश्रण है, जिसे लंबे शोध और वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद तैयार किया गया है. इसमें ऐसे प्राकृतिक घटक शामिल किए गए हैं, जो दांतों और मसूड़ों की मजबूती, मुंह की दुर्गंध को दूर करने और कीटाणुओं को नष्ट करने में कारगर सिद्ध हुए हैं. साथ ही यह उत्पाद पूर्णतः सुरक्षित है, इसमें किसी भी प्रकार के हानिकारक रसायन, अल्कोहल या कृत्रिम तत्व नहीं डाले गए हैं.
प्राकृतिक तेलों की शक्ति से दांत और मसूड़े मजबूत
दंतकांति गंडूष के प्रयोग से मुख की स्वच्छता बनी रहती है. इसके औषधीय तत्व न केवल दांतों की सतह पर चिपके बैक्टीरिया को नष्ट करते हैं, बल्कि मसूड़ों की सूजन और खून आने की समस्या को भी दूर करते हैं. जिन लोगों को पायरिया या कैविटी की शिकायत रहती है, उनके लिए यह उत्पाद एक प्रभावी उपचार के रूप में सामने आया है. इसके अतिरिक्त यह दांतों को चमकदार, मसूड़ों को गुलाबी और सांस को ताज़गीपूर्ण बनाए रखता है.
दन्त कांति गंडूष ऑयल पुलिंग में तुंबुरु का तेल, लौंग का तेल, पुदीना का तेल, नीलगिरी का तेल एवं तुलसी का तेल सम्मिलित है. तुंबुरु तेल, दांतो और मसूड़ों को मजबूती प्रदान करता है, लौंग के तेल में एंटी – इंफ्लेमेटरी गुण विद्यमान है, जो दांत के दर्द में राहत प्रदान करते हैं, पुदीना के तेल में एंटी – वायरल और एंटी – फंगल गुण विद्यमान होते हैं जो मुंह की दुर्गन्ध दूर करने में सहायक होते हैं, नीलगिरी का तेल मुँह के बैक्टीरिया को रोकने में लाभकारी होता है, और तुलसी के तेल में जीवाणुनाशक गुण पाए जाते हैं जोकि दांतो की सड़न से बचाते हैं.
बैक्टीरिया और फंगस पर प्राकृतिक तेलों की निर्णायक मार
पतंजलि अनुसन्धान संस्थान के वैज्ञानिकों ने दन्त कांति गंडूष ऑयल पुलिंग पर शोध कर यह निष्कर्ष निकाला कि यह औषधीय तेल दांतो में पाए जाने वाले बैक्टीरिया और यीस्ट जोकि फंगस का एक प्रकार है, को डोज़ डेपेंडेंटली समाप्त करने की क्षमता रखता है. दन्त कांति गंडूष ऑयल पुलिंग के प्राकृतिक पादप घटको का रासायनिक विश्लेषण GC – MS /MS ने किया, जिससे यह प्रमाणित हुआ कि इस तेल में लिमोनीन, यूकलिप्टोल, लिनालूल, मेंथोल, एस्ट्राजॉल और यूजीनॉल आदि प्रभावशाली घटक पाए गए हैं जोकि मुख के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हैं. दन्त कांति गंडूष ऑयल पुलिंग मुंह में पाए जाने वाले बैक्टीरिया और फंगस जैसे की Streptococcus pyogenes , Proteus mirabilis , Streptococcus mutans , Candida albicans , को समाप्त करने में महत्पूर्ण भूमिका निभाता है. Streptococcus mutans जोकि दांतो में होने वाली cavity का प्रमुख कारक है, यह बैक्टीरिया अपने चारों एक बायोफिल्म बना लेता है, जिसे समाप्त करने में यह तेल प्रभावकारी है.
बायोफिल्म बैक्टीरिया के बनाई गई एक चिपचिपी परत होती है जो उन्हें दवाओं से बचाती है. इस वजह से कई बार एंटीबायोटिक दवाएं भी बेअसर हो जाती हैं. साथ ही साथ यह तेल इस बैक्टीरिया की एसिड बनाने के क्षमता, जिसे एसिडोसिस कहा जाता है, कम करता है. यह तेल Candida albicans जैसे बैक्टीरिया जोकि अधिकांश रूप में मुंह में मिलने वाला बैक्टीरिया है, उसको समाप्त कर उसके द्वारा बनाई गई बायोफिल्म को भेदने की क्षमता रखता है. SEM तकनीक द्वारा किए गए विश्लेषण में पुष्टि हुई कि यह तेल Streptococcus mutans और Candida albicans बैक्टीरिया को एक साथ, क्योंकि अधिकांश समय यह दोनों ही बैक्टीरिया एक साथ पाए जाते हैं और अलग-अलग रूप से भी समाप्त कर सकता है.
मुख स्वास्थ्य से समग्र शरीर स्वास्थ्य की रक्षा
टेढ़े – मेढ़े दांतो को सीधा करने के लिए लगाए जाने वाले ब्रेसेज़, डेंटल प्लाक को बढ़ावा देते है. यह डेंटल प्लाक बायोफिल्म पारम्परिक और आधुनिक सिलिकॉन, दोनों प्रकार के ब्रेसेज़ पर बनती है. इन बायोफिल्म्स को दन्त कांति गंडूष ऑयल पुलिंग खुराक की मात्रा के आधार पर समाप्त करने में प्रभावी पाया गया है.
आज के समय में जहां एलोपैथिक और केमिकल-आधारित उत्पादों का बाज़ार छाया हुआ है, वहीं दंतकांति गंडूष ऑयल पुलिंग जैसे आयुर्वेदिक उत्पाद न केवल स्वदेशी परंपरा का संरक्षण करते हैं बल्कि मानव स्वास्थ्य को प्राकृतिक ढंग से सुरक्षित भी रखते हैं. आयुर्वेद को वैज्ञानिक ढंग से प्रस्तुत करने और उसका वैश्विक प्रचार-प्रसार करने का जो अभियान पतंजलि ने शुरू किया है, दंतकांति गंडूष उसी का एक सशक्त उदाहरण है.
दंतकांति गंडूष ऑयल पुलिंग का महत्व केवल मौखिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है. आयुर्वेद के अनुसार मुख शरीर का प्रवेश द्वार है और इसकी स्वच्छता का सीधा संबंध पाचन, श्वसन और हृदय स्वास्थ्य से भी है. जब मुख में बैक्टीरिया पनपते हैं तो वे केवल दांत और मसूड़ों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि रक्त प्रवाह के साथ पूरे शरीर में पहुंच जाते हैं. आधुनिक शोध भी इस बात को मानता है कि खराब ओरल हेल्थ का संबंध हृदय रोग, मधुमेह और स्ट्रोक तक से है. इस दृष्टिकोण से देखें तो दंतकांति गंडूष केवल एक माउथ क्लीनर नहीं बल्कि एक समग्र स्वास्थ्य रक्षक है.
परंपरा और विज्ञान का सफल संगम
पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का यह संगम ही पतंजलि के अनुसंधान कार्यों की सबसे बड़ी विशेषता है. दंतकांति गंडूष ऑयल पुलिंग ने यह सिद्ध कर दिया है कि अगर सनातन ज्ञान को वैज्ञानिक कसौटी पर प्रमाणित कर प्रस्तुत किया जाए तो वह न केवल आज की पीढ़ी के लिए उपयोगी होगा बल्कि आने वाले समय में स्वास्थ्य सुरक्षा का मजबूत आधार भी बनेगा.
अंततः यही कहा जा सकता है कि दंतकांति गंडूष ऑयल पुलिंग आयुर्वेद की उस अमर परंपरा का आधुनिक स्वरूप है, जो जीवन को प्राकृतिक ढंग से स्वस्थ और संतुलित बनाए रखने का मार्ग दिखाती है. यह केवल एक उत्पाद नहीं बल्कि एक संदेश है कि अगर हम अपने मूल की ओर लौटें, तो हर समस्या का समाधान प्रकृति की गोद में सहज ही मिल सकता है. आयुर्वेद की इसी पुनर्स्थापना और वैज्ञानिक रूपांतरण का परिणाम है कि दंतकांति गंडूष ऑयल पुलिंग, और यह, वह शक्ति है जिससे लाखों लोगों के जीवन में मुस्कान आएगी और ओरल हेल्थ में सुधार होगा.
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पतंजलि का आयुर्वेदिक समाधान! दंतकांति गंडूष से स्वस्थ मुस्कान और मजबूत मसूड़ों का दावा




