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फैटी लिवर सुनने में भले ही हल्की समस्या लगे, लेकिन हकीकत इससे कहीं ज्यादा खतरनाक है. यह बीमारी धीरे-धीरे लिवर में चर्बी जमा होने से शुरू होती है और समय के साथ शरीर के सबसे जरूरी अंगों में से एक को नुकसान पहुंचा सकती है. चिंता की बात यह है कि भारत में फैटी लिवर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. लेकिन इस पर अभी भी उतनी चर्चा नहीं हो रही है, जितनी होनी चाहिए. दरअसल कुछ साल पहले तक फैटी लिवर को सिर्फ ज्यादा शराब पीने से जोड़ा जाता था, लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है. आज लंबा ऑफिस टाइम, घंटों बैठकर काम करना, प्रोसेस्ड और मीठा खाना, कम फिजिकल एक्टिविटी और लगातार तनाव इस बीमारी के बड़े कारण बन रहे हैं. वहीं डॉक्टरों के अनुसार अब बड़ी संख्या में मरीज नॉन अल्कोहलिक फैटी लीवर डिजीज से पीड़ित है. जिससे अब Metabolic Dysfunction-Associated Steatotic Liver Disease कहा जाता है.
हर तीसरा भारतीय फैटी लिवर के चपेट में
एक्सपर्ट्स के अनुसार भारत में फैटी लिवर महामारी का रूप ले चुका है. रिसर्च बताती है कि देश में करीब हर तीसरा वयस्क इस बीमारी से जूझ रहा है. शहरी इलाकों और डायबिटीज या मोटापा से ग्रस्त लोगों में यह आंकड़ा 50 प्रतिशत से भी ज्यादा है. वहीं चौंकाने वाली बात यह है कि कई ऐसे लोग भी फैटी लिवर के शिकार है, जो दिखने में दुबले- पतले और फिट नजर आते हैं.
क्यों नहीं दिखते फैटी लिवर के लक्षण?
फैटी लिवर को खामोश बीमारी कहा जाता है, क्योंकि इसकी शुरुआती स्टेज में इसके लक्षण नजर नहीं आते हैं. दरअसल लिवर के अंदर दर्द महसूस करने की क्षमता नहीं होती है, इसलिए काफी नुकसान होने तक शरीर कोई चेतावनी नहीं देता है. वहीं एक्सपर्ट्स का कहना है कि कई बार लिवर एंजाइम टेस्ट भी नॉर्मल आते हैं, जबकि अंदर चर्बी जमा हो चुकी होती है. जब थकान, पेट के ऊपर हिस्से में भारीपन या वजन घटने जैसे लक्षण दिखते हैं, तब तक बीमारी आगे बढ़ चुकी होती है. इसके अलावा फैटी लिवर सिर्फ मोटे लोगों की बीमारी नहीं है. खासतौर पर भारतीयों में नॉर्मल BMI होने के बावजूद पेट के आसपास चर्बी और इन्सुलिन रेजिस्टेंस फैटी लिवर की बड़ी वजह बनती है. PCOS से पीड़ित महिलाएं, नींद से जुड़ी समस्याएं, लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले लोग और आईटी सेक्टर में काम करने वाले एंप्लॉय भी इसके ज्यादा खतरे में है.
डाइट की आदतें भी बिगाड़ती हैं लिवर
डॉक्टरों के अनुसार कुछ खाने पीने की आदतें चुपचाप लिवर को नुकसान पहुंचाती है. इन आदतों में ड्रिंक और पैकेट वाले जूस शामिल है. इसके अलावा ज्यादा रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट जैसे मैदा और सफेद चावल, अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड, प्रोटीन की कमी और घंटों बैठे रहना और एक्सरसाइज की कमी यह सब आदतें लिवर में फैट जमा होने की प्रक्रिया को तेज कर देती है.
कैसे रखें लिवर को सुरक्षित?
एक्सपर्ट्स बताते हैं कि डिटॉक्स ड्रिंक्स और सप्लीमेंट से फैटी लिवर ठीक होने का कोई ठोस वैज्ञानिक सबूत नहीं मिला है. उल्टा कुछ सप्लीमेंट्स लिवर को और नुकसान पहुंचा सकते हैं. वहीं एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इसका असल इलाज, संतुलित डाइट, नियमित एक्सरसाइज, वजन और तनाव पर नियंत्रण है. इसके अलावा लिवर को सुरक्षित रखने के लिए वजन घटाने से ज्यादा फैट कम करने और मसल्स बचाने पर फोकस करें, हफ्ते में 2-3 दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करें और हर मील में पर्याप्त प्रोटीन लें.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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फैटी लिवर से जूझ रहा हर तीसरा भारतीय, रिसर्च का खुलासा, बिना दर्द बढ़ रही खामोश बीमारी


