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चीन की सेना के सबसे ताकतवर जनरल और सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) के वाइस-चेयरमैन झांग यूक्सिया के खिलाफ जांच शुरू की गई है। उन पर चीन के न्यूक्लियर हथियार से जुड़ी सीक्रेट जानकारी अमेरिका को लीक करने का आरोप है। चीन के रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि 75 साल के झांग पर अनुशासन और कानून के गंभीर उल्लंघन के आरोप हैं। हालांकि मंत्रालय ने जांच के कारणों का ब्योरा नहीं दिया। झांग को पद से हटा दिया है। यह जानकारी वॉल स्ट्रीट जर्नल ने रविवार को एक रिपोर्ट में दी है। झांग पर CMC के अंदर अपनी अलग गुटबाजी करने और पार्टी में फूट डालने का भी आरोप है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन नेशनल न्यूक्लियर कॉर्पोरेशन के पूर्व महाप्रबंधक गु जून ने झांग के खिलाफ कुछ सबूत दिए हैं। गु जून पर भी कम्युनिस्ट पार्टी के खिलाफ अपराधों के लिए जांच चल रही है। भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही चीनी सरकार वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास के एक प्रवक्ता ने वॉल स्ट्रीट जर्नल से कहा कि यह जांच दिखाती है कि पार्टी नेतृत्व भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि ये कार्रवाई चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग के नेतृत्व में चल रही उस मुहिम का हिस्सा है, जिसका मकसद सेना में सुधार के साथ अफसरों में वफादारी बढ़ाना है। जिनपिंग खुद भी सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के अध्यक्ष हैं। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि कमीशन के एक अन्य सदस्य और जॉइंट स्टाफ डिपार्टमेंट के प्रमुख ल्यू झेनली को भी जांच के दायरे में रखा गया है। सेंट्रल मिलिट्री कमीशन चीन की सेना से जुड़े बड़े फैसले लेने वाली संस्था है। जिनपिंग के बाद सबसे पावरफुल सैन्य अधिकारी थे झांग जनरल झांग चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के एक वरिष्ठ जनरल हैं। जनवरी 2026 तक वे सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) के पहले रैंक वाले उपाध्यक्ष थे, जो चीन की सेना का सबसे ऊंचा कमांड बॉडी है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग खुद CMC के चेयरमैन हैं, इसलिए झांग उनके ठीक नीचे सबसे पावरफुल सैन्य अधिकारी माने जाते थे। चीनी क्रांति के दौरान के एलीट क्लास के नेता और टॉप सैन्य अफसरों के बेटों को ‘प्रिंसलिंग’ यानी ‘छोटा राजकुमार’ कहा जाता है। झांग भी ऐसे ही एलीट क्लास के एक राजकुमार थे। 1968 में 18 साल की उम्र में झांग चीनी सेना में शामिल हुए। 1979 के चीन-वियतनाम युद्ध में झांग भी मोर्चे पर भेजे गए और इसके बाद तेजी से उनकी तरक्की होने लगी। अगस्त 2000 में झांग 13वीं ग्रुप आर्मी के कमांडर बने और 2011 में चीनी जनरल के पद तक पहुंचे। 2020 में झांग 70 साल के हो गए, ये चीन में आर्मी ऑफिसर्स के रिटायर होने की उम्र होती है, लेकिन जिनपिंग ने उन्हें पद पर बनाए रखा। झांग ने राष्ट्रपति बनाने में जिनपिंग की मदद की थी 2023 में जिनपिंग को तीसरी बार राष्ट्रपति बनाने में जनरल झांग ने मदद की थी, लेकिन फिर उनके जिनपिंग से मतभेद गहरे होते गए। इस समय तक झांग ही PLA में बड़े फैसले ले रहे थे। जनरल झांग और CMC के एक और जनरल लियू कई महीनों से कम्युनिस्ट पार्टी की बैठकों से गायब रहने लगे। झांग पहले भी कई बार गायब हो चुके थे। चीन में ऐसा तब होता है, जब किसी ऑफिसर को हटाया जाना होता है या उसकी जिनपिंग से वफादारी पर संदेह खड़ा होता है। 24 जनवरी 2026 को झांग के खिलाफ ‘पार्टी के कानून और अनुशासन के उल्लंघन’ का आरोप लगा और उनके खिलाफ जांच शुरू हुई। चीन में भ्रष्टाचार और टॉप लीडरशिप के प्रति वफादारी न दिखाने पर ऐसे ही आरोपों के तहत जांच शुरू की जाती है। कई ऑफिसर इस जांच के पहले ही गायब हो जाते हैं या पद से हटा दिए जाते हैं। ऐसा बहुत कम होता है कि चीन में किसी ऑफिसर के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में जांच शुरू हो और वह बाद में निर्दोष साबित हो जाए। झांग से पहले भी कई ऑफिसर इसी तरह हटाए गए हैं। शी जिनपिंग के करीबी जनरल को पद से हटाया था अक्टूबर 2024 में पार्टी ने CMC के दूसरे उपाध्यक्ष हे वीडोंग को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। 2024 में दो पूर्व रक्षा मंत्रियों को भी भ्रष्टाचार के मामलों में पार्टी से बाहर किया गया था। हे वीडोंग चीन की सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) के दूसरे नंबर के वाइस चेयरमैन थे, जो पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) में दूसरा बड़ा पद है। यह कमीशन राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व में सेना की सर्वोच्च कमान संभालता है। वे मार्च 2025 से सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए थे। हे वीडोंग को शी जिनपिंग का करीबी सहयोगी माना जाता है। दोनों ने 1990 के दशक में फुजियान और झेजियांग प्रांतों में साथ काम किया था। हे को 2022 में सीधे CMC के उपाध्यक्ष के पद पर बैठाया गया था, जो आमतौर पर हाई कमिशन में सर्विस के बाद ही मिलता है। रक्षा मंत्री पर भी लगा था भ्रष्टाचार का आरोप था राष्ट्रपति बनने के बाद से ही शी जिनपिंग सेना में फैले भ्रष्टाचार की रोकथाम में लगे हैं। साल 2204 में चीन के रक्षा मंत्री डोंग जुन का भी एंटी करप्शन ड्राइव में नाम आया था, जिसके बाद उनके खिलाफ जांच बैठाई गई थी। इससे पहले दो पूर्व रक्षा मंत्री ली शांगफू और वेई फेंगहे को पद से हटा दिया गया था। शी का टारगेट सेना में कम्युनिस्ट पार्टी के लिए वफादारी तय करना और इसे ग्लोबल सुपर पावर बनाना है। एक्सपर्ट्स का यह भी मानना है कि यह कार्रवाई भ्रष्टाचार को खत्म करने के साथ-साथ शी जिनपिंग की सत्ता को और मजबूत करने का हिस्सा है। चीन लगातार अपनी सेना को आधुनिक बना रहा चीन लगातार अपनी सेना का आधुनिकीकरण कर रहा है। चीन ने इस साल के अपने सालाना रक्षा बजट में 7.2% की बढ़त की है। इस साल यह 249 अरब डॉलर (1.78 ट्रिलियन युआन) हो गया। यह भारत के 79 अरब डॉलर के सैन्य बजट के मुकाबले करीब 3 गुना ज्यादा है। एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि चीन का वास्तविक डिफेंस खर्च उसकी तरफ से बताए गए खर्च से 40-50% ज्यादा है। चीन अपने सैन्य खर्च को कम दिखाने के लिए अलग-अलग सेक्टर के तहत धन आवंटित करता है। चीन अमेरिका के बाद सेना पर सबसे ज्यादा खर्च करता है। अमेरिका का रक्षा बजट 950 अरब डॉलर के करीब है। जो चीन के बजट से 4 गुना से भी ज्यादा है।
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रिपोर्ट- चीनी जनरल ने न्यूक्लियर सीक्रेट अमेरिका को लीक किया: जिनपिंग के बाद सबसे ताकतवर माने जाते; गुटबाजी करने, पार्टी में फूट डालने का भी आरोप




