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जालंधर पुलिस की गिरफ्तारी में राजा कंदोला। (फाइल फोटो)
पंजाब के इंटरनेशनल ड्रग स्मगलर राजा कंदोला की 56 साल की उम्र में मौत हो गई। उसे रविवार (25 जनवरी) को मुंबई में हार्ट अटैक आया। राजा कंदोला नवांशहर में जन्मा। फिर साल 2000 से 2026 तक करीब 26 साल तक विवादों में घिरा रहा।
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कंदोला एक आम युवक की तरह इंग्लैंड गया था। वहां वह ड्रग का डीलर बन गया। जब इंग्लैंड की एजेंसियां पीछे पड़ीं तो वह जिंबाब्वे भाग गया और वहां उसे अरेस्ट कर लिया गया। जिसके बाद वहां की जेल में वह सर्बिया के केमिकल एक्सपर्ट से मिला।
जिसके बाद उसने सिंथेटिक ड्रग आइस बनानी शुरू कर दी। इसकी सप्लाई कर वह धीरे-धीरे आइस किंग बन गया। हालांकि मौत से पहले वह ज्यादातर केसों में बरी हो चुका था। आखिरी केस जालंधर में मनी लॉन्ड्रिंग का था। जिसमें उसे सजा मिली हुई थी।
रणजीत सिंह नाम का साधारण पंजाबी कुख्यात ड्रग स्मगलर कैसे बना, जिंबाब्वे की जेल में उसे केमिकल एक्सपर्ट ने कौन सा फॉर्मूला बताया, उस पर दर्ज केसों में वह कैसे बरी होता गया, पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
पढ़ें रणजीत सिंह के राजा कंदोला बनने की पूरी कहानी
- बंगा में जन्मा, 20 साल की उम्र में UK गया: 1970 में रणजीत सिंह का जन्म जिला नवांशहर के कस्बे बंगा के गांव हप्पोवाल में हुआ। शुरूआती एजुकेशन रणजीत सिंह उर्फ राजा कंदोला ने गांव के ही स्कूल से ली। 1990 में 20 साल की उम्र में रणजीत सिंह को पिता ने जॉब के लिए यूके भेज दिया। यहां पर काम करते हुए और जल्दी अमीर बनने की चाहत में लोगों को अवैध तरीके से सीमा पार करवाने का काम शुरू कर दिया। ह्यूमन ट्रैफिकिंग के चलते राजा कंदोला काफी समय तक अमेरिका और फिर जिम्बाब्वे में रहा। इसके अलावा वह ड्रग तस्करी में भी एक्टिव हो गया।

- जिम्बाब्वे की जेल में ड्रग किंगपिन से मुलाकात: राजा कंदोला के ड्रग किंगपिन बनने की कहानी जिम्बाब्वे की एक जेल से 2002 में शुरू हुई। वहां उसकी मुलाकात सर्बिया के रहने वाले जॉन मिलन से हुई। उसी ने इसे ड्रग्स की दुनिया का रास्ता दिखाया। जॉन मिलन को राजा कंदोला का तस्करी का गुरु माना जाता है। मिलन ने ही कंदोला को आइस (मेथामफेटामाइन) बनाने का फॉर्मूला और इस धंधे में होने वाले फायदे के बारे में बताया। उसने कंदोला को सिखाया कि कैसे केमिकल ( एफीड्रिन) से सिंथेटिक ड्रग्स तैयार की जाती है।

- बंगा में घर बनाया, चोरी-छिपे आइस बनाने का आरोप: जिम्बाब्वे में जेल से रिहाई के बाद कंदोला 2004 के करीब पंजाब लौटा। ED के अनुसार उसने बंगा में आलीशान घर बनाया और यहीं पर चोरी-छिपे आइस बनाने का आरोप लगा। कंदोला खुद को लोगों के बीच ट्रैवल एजेंट बताता था। कंदोला पर आरोप हैं कि जॉन मिलन से कॉन्टैक्ट के चलते उसने यहां पर बनाई जाने वाली सिंथेटिक ड्रग्स को विदेश भेजना शुरू कर दिया।
- 200 करोड़ के रैकेट में नाम आया: चर्चा रही है कि कंदोला ने जिम्बाब्वे से लौटने के बाद ही मेथमफेटामाइन को पंजाब और दिल्ली के बाजारों में फैलाना शुरू किया, जिसके कारण उसे आइस किंग कहा जाने लगा। ये ही चर्चा रही कि फरवरी 2012 में मिलन ने ही उसकी आइस ड्रग बनाने की यूनिट खुलवाई थी। जॉन मिलन पर्दे के पीछे रहकर काम करने में माहिर था। 2012 में जब पंजाब पुलिस ने कंदोला के 200 करोड़ के रैकेट का भंडाफोड़ किया, तब मिलन का नाम पहली बार सामने आया।

जालंधर कोर्ट में राजा कंदोला केस की जानकारी देते तत्कालीन ईडी अधिकारी।
पंजाब पुलिस की चूक से बरी हुआ, ED ने शिकंजा कसा
- 200 करोड़ की ड्रग केस, फिर बरी: 2012 में पहली बार पंजाब पुलिस ने कंदोला के 200 करोड़ के रैकेट का भंडाफोड़ किया। इस केस में कंदोला को गिरफ्तार किया गया। कंदोला का लिंक हेरोइन तस्कर जगदीश भोला के साथ भी जोड़ा गया। इसके बाद राजा कंदोला को जालंधर की कोर्ट ने दिसंबर 2023 में ड्रग तस्करी के केस में बरी कर दिया था।
- पंजाब पुलिस केस ड्रग्स का डायरेक्ट कनेक्शन साबित नहीं कर पाई: पंजाब पुलिस कंदोला के खिलाफ यह साबित नहीं कर पाई कि जब्त की गई ड्रग्स सीधे तौर पर कंदोला से जुड़ी थी। इस केस के लंबा खिंचने से कई गवाह बयानों से पलट गए। बचाव पक्ष के वकील ने तर्क दिया कि पुलिस ने रेड और माल जब्ती के दौरान कानूनी प्रक्रियाओं का सही ढंग से पालन नहीं किया था।
- ED ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस किया, पत्नी समेत सजा हुई: ड्रग केस में बरी होने के बाद भी कंदोला को राहत नहीं मिल पाई। इसके बाद ED जालंधर के तत्कालीन अधिकारी निरंजन सिंह की अगुआई में टीम ने कंदोला को मनी लॉन्ड्रिंग केस में नामजद कर लिया। इस केस में 14 अगस्त 2024 को जालंधर की विशेष PMLA अदालत ने राजा कंदोला को मनी लॉन्ड्रिंग का दोषी माना और 9 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई। इस केस में कंदोला की पत्नी राजवंत कौर को भी 3 साल की सजा सुनाई गई।
सिंथेटिक ड्रग्स के धंधे में क्या आया राजा कंदोला कंदोला जॉन मिलन तस्करी के धंधे में लेकर आया। उसने ही कंदोला को समझाया था कि हेरोइन के बजाय सिंथेटिक ड्रग्स (आइस) में फायदा ज्यादा है और इसे पकड़ पाना मुश्किल होता है। पकड़ने जाने पर इसे नशे के तौर पर साबित कर पाना उससे भी ज्यादा मुश्किल होता है।
इससे भी बड़ी बात ये थी कि भारत में आइस को इसलिए चुना गया क्योंकि इसकी तब टेस्टिंग लेब नहीं थी और दूसरा इसे बनाने में इस्तेमाल होने वाले केमिकल मार्केट में आसानी से मिल जाते थे। जॉन मिलन ने ही कंदोला को 2 केमिकल को प्रोसेस करके हाई-क्वालिटी आइस बनानी सिखाई। 2000 के शुरुआती दशक में दक्षिण अफ्रीका और जिम्बाब्वे अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करों के ट्रांजिट पॉइंट (रास्ते) बने।

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पंजाब के बंगा के रहने वाले हाई-प्रोफाइल ड्रग तस्कर राजा कंदोला की मौत हो गई। मुंबई में रह रहे राजा कंदोला को हार्टअटैक आया, जिसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया (पढ़ें पूरी खबर)
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पंजाब का आइस किंग राजा कंदोला की कहानी: जिम्बाब्वे जेल में केमिकल एक्सपर्ट से ड्रग्स बनानी सीखी, मौत से पहले केसों से बरी होता गया – Jalandhar News


