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संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। ट्रैफिक पुलिस को हाईटेक बनाने व चालान प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए शुरू की गई बॉडी वॉर्न कैमरा योजना दम तोड़ती नजर आ रही है। करीब डेढ़ साल पहले तकनीकी खराबी के चलते 35 पुराने कैमरे वापस जमा कर लिए गए थे, लेकिन आज तक उनके स्थान पर नए कैमरे पुलिसकर्मियों को नहीं मिल पाए हैं। आलम यह है कि सड़क पर मुलाजिम व वाहन चालकों के बीच होने वाली तकरार अब बिना किसी डिजिटल सबूत के रह जाती है। इसकी शुरूआत करते हुए जिले के ट्रैफिक थानों में करीब 40 बॉडी वॉर्न कैमरे आवंटित किए गए थे।
शुरुआती दौर में यह काफी मददगार साबित हुए, लेकिन धीरे-धीरे इनकी बैटरी में दिक्कत आने लगी और कई कैमरे पूरी तरह बंद हो गए थे। डेढ़ साल से कैमरे न होने के कारण कई बार विवाद होने पर पुलिस के पास कोई ठोस सबूत नहीं होता है। बल्कि दूसरा पक्ष अपने मोबाइल में वीडियो बना लेता है ओर आरोप लगाते हुए वीडिया सोशल मीडिया पर वायरल कर देता है। जबकि वर्दी पर कैमरा लगा होने पर कोई भी जानबूझकर अभद्र व्यवहार या कोई गलत टिप्पणी नहीं करता है। कई बार लोग चालान से बचने के लिए मुलाजिम पर ही पैसे मांगने के आरोप तक लगा देते हैं। हालांकि यह कैमरा मुलाजिम व आम लोग दोनों के लिए फायदेमंद है। ऐसे में ट्रैफिक इंस्पेक्टर बिना कैमरों के ही चालान करते हुए दिखाई दे रहे हैं।
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