- Hindi News
- Business
- India Job Growth Surge: Tier 2 & 3 Cities Lead With 1.28 Cr Opportunities
मुंबई59 मिनट पहले
- कॉपी लिंक
छोटे शहरों में भर्तियों की रफ्तार 20% है।
भारत में नौकरियों की लहर मेट्रो सिटी से बाहर इंदौर, जयपुर, अहमदाबाद, कोच्चि और चंडीगढ़ जैसे शहरों में दिख रही है। टियर-2 और 3 शहरों में भर्ती की रफ्तार 20% तक हो गई है, जबकि मेट्रो सिटी में यह 14% रही। लीडिंग जॉब्स एंड टैलेंट प्लेटफॉर्म फाउंडइट के मुताबिक, इस साल 1.28 करोड़ संभावित नौकरियों के साथ छोटे शहरों में हायरिंग तेजी से बढ़ रही है।
अपग्रेड रिक्रूट की रिपोर्ट के मुताबिक AI और बेहतर स्थिरता के कारण कंपनियां छोटे शहरों में ‘रीजनल कैपेबिलिटी कॉरिडोर’ बना रही हैं। 2027 तक एआई एक्सपोजर वाले टेक रोल्स 20% से बढ़कर 32% तक पहुंच सकते हैं। वहीं, 79% एचआर लीडर्स मानते हैं कि छोटे शहरों में टैलेंट के जॉब में ‘टिके रहने की दर’ मेट्रो के बराबर या उससे बेहतर है।
वित्त वर्ष 2024 में इन शहरों का टेक हायरिंग में हिस्सा 12% था जो 2027 तक 19.7% पहुंच सकता है। कंपनियां इन शहरों में इंजीनियरिंग, सपोर्ट, डेटा एनालिटिक्स, बैकएंड ऑपरेशंस जैसी भूमिका को प्राथमिकता दे रही हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर स्किल डेवलपमेंट और रोजगार के नए अवसर बन रहे हैं।
रीजनल कैपेबिलिटी कॉरिडोर्स बन रहे, छोटे शहरों में हाइटेक नौकरियां बढ़ रहीं
कंपनियां कम लागत और व्यापक टैलेंट पूल के लिए टियर-2 शहरों में टैलेंट हब्स तैयार कर रही हैं। इससे भर्ती महानगरों से बाहर फैल रही है। बड़े शहरों में लोग जल्दी-जल्दी नौकरियां बदलते हैं, जबकि छोटे शहरों में कर्मचारी लंबे समय तक टिकते हैं। अपग्रेड रिक्रूट ने टियर-2,3 शहरों से आने वाले प्लेसमेंट मैंडेट्स में 40% वृद्धि देखी है। एक साल में यहां एआई इंजीनियर्स, डेटा एनालिस्ट और ऑटोमेशन स्पेशलिस्ट की मांग 40% बढ़ी है-खासकर बीएफएसआई, आईटी सर्विसेज और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में। अहमदाबाद-गिफ्ट सिटी, कोयंबटूर, कोच्चि, इंदौर और लखनऊ जैसे शहर अब एआई-संबंधित हायरिंग मैंडेट्स के लगभग एक-चौथाई का प्रतिनिधित्व करते हैं। जॉब मार्केट
9 पॉइंट्स में जाने आखिर छोटे शहर क्यों बन रहे जॉब हब?
- राज्य सरकारें छोटे शहरों को ध्यान में रखकर नीतियां बना रही हैं। दरअसल, टियर-1 के मुकाबले इनमें लागत 10%-35% तक कम है।
- तमिलनाडु, कर्नाटक समेत कुछ राज्यों की नीतियों के बाद बड़ी कंपनियां बेंगलुरु, चेन्नई के अलावा छोटे शहरों में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) बढ़ा रही हैं।
- इंडस्ट्री अनुमान के मुताबिक विदेशी कंपनियों के जीसीसी 2030 तक भारत में 9.6 लाख करोड़ रुपए तक निवेश कर सकते हैं। इसके साथ ही एआई और डेटा साइंस जैसी स्किल्स के लिए औसत से 20% तक अधिक वेतन की भी बात कही जा रही है।
- भारत में 1,500 से अधिक जीसीसी से करीब 13 लाख नौकरियां पैदा हुई हैं। 2026 तक 500 से ज्यादा नए जीसीसी जुड़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
- विशाखापट्टनम, कोयंबटूर, जयपुर, वडोदरा, कोच्चि और चंडीगढ़ जैसे शहरों में जीसीसी पहले से ही खुल चुके हैं। ये फाइनेंस, एचआर, सप्लाई चेन, इंजीनियरिंग, आरएंडडी, डिजिटल क्लाउड जैसी सेवाएं देते हैं।
- टियर-2 शहरों में टैलेंट और इन्फ्रास्ट्रक्चर की कम लागत कुल ऑपरेशनल खर्च (टीसीओ) घटाती है, जो टियर-1 की तुलना में 10%-35% तक कम बताई जा रही है।
- महिलाओं के लिए यह बदलाव अहम है। 65% महिला टेक प्रोफेशनल्स घर के पास छोटे शहरों में काम करना पसंद करती हैं, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा 41% है।
- फिनटेक, हेल्थ-टेक और एआई-फर्स्ट वेंचर्स में फंडिंग बढ़ने से प्रोडक्ट, इंजीनियरिंग, ग्रोथ और रेवेन्यू रोल्स में भर्ती बढ़ने की संभावना है। कुल रजिस्टर्ड स्टार्टअप्स में से 50% टियर-2,3 शहरों से हैं।
- नैसकॉम, डेलॉय की इमर्जिंग टेक हब्स रिपोर्ट के मुताबिक जयपुर, इंदौर, कोयंबटूर, अहमदाबाद समेत 26 शहर ‘टेक्नोलॉजी हब’ बन चुके हैं। 60% ग्रेजुएट्स छोटे शहरों से हैं।
———–
ये खबर भी पढ़ें…
Source: https://www.bhaskar.com/business/news/jobs-growth-tier-2-tier-3-cities-india-128-crore-opportunities-137036181.html




