रिलेशनशिप एडवाइज- बॉयफ्रेंड की लेटलतीफी से परेशान हूं: देर से आएगा, फिर सॉरी बोल देगा, लेकिन बिहेवियर नहीं बदलता, मैं क्या करूं Health Updates

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21 मिनट पहले

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सवाल- मैं पिछले तीन साल से एक रिलेशनशिप में हूं। हमारी बॉन्डिंग, समझ और केमिस्ट्री ज्यादातर मामलों में अच्छी है। लेकिन पार्टनर का एक व्यवहार मुझे लगातार परेशान कर रहा है। वह लगभग हर मौके पर लेट होता है। चाहे मूवी देखनी हो, ट्रैवल प्लान हो या फिर उसे ऑफिस ही क्यों न जाना हो। यह सिर्फ एक-दो बार की बात नहीं है, बल्कि एक पैटर्न है।

मैं जब भी इस बारे में बात करती हूं, तो वह हर बार सॉरी बोल देता है। धीरे-धीरे मुझे लगने लगा है कि यह सिर्फ टाइम मैनेजमेंट की समस्या नहीं है। अब हमारा रिश्ता ऐसे मोड़ पर है, जहां हमें शादी का फैसला लेना है तो यह सब सोचकर डर लग रहा है। क्या इसे एक छोटी आदत समझकर नजरअंदाज किया जा सकता है या फिर यह भविष्य में रिलेशनशिप डिससेटिस्फेक्शन की वजह बनेगा? क्या ये एक सीरियस रेड फ्लैग है? मुझे क्या करना चाहिए?

एक्सपर्ट: डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा

जवाब- क्लिनिकल रिसर्च बताती हैं कि रिलेशनशिप या फैमिलीज के भीतर गैरजिम्मेदार एटीट्यूड गंभीर इमोशनल स्ट्रेस का कारण हो सकता है। आपने अपने इमोशनल स्ट्रेस को बेहतर ढंग से आर्टिकुलेट किया है। आपके रिश्ते में प्यार, बॉन्डिंग और केमिस्ट्री अच्छी है, लेकिन फिर भी पार्टनर का गैरजिम्मेदाराना व्यवहार और उसकी हमेशा लेट होने की आदत तनाव पैदा कर रही है। आपका सवाल पूछना ही बताता है कि यह एक गंभीर बात है, जिसे आप नजरअंदाज नहीं कर पा रही हैं।

तो चलिए, इसे स्टेप-बाय-स्टेप समझते हैं कि ये सिर्फ लेट होने की आदत है या कोई और गहरी बात है।

लेटलतीफी क्या सिर्फ लापरवाही है?

अगर कोई व्यक्ति वादा करने के बावजूद बार-बार लेट होता है, तय समय पर नहीं पहुंचता है, तो यह सिर्फ टाइम मैनेजमेंट की समस्या नहीं है। समय पर न पहुंचना सिर्फ घड़ी की सुई से जुड़ा मामला नहीं है, यह सम्मान से जुड़ा मामला भी है।

एक-दो बार देरी हो जाए, तो उसके पीछे ट्रैफिक, थकान, इमरजेंसी जैसे कारण हो सकते हैं। लेकिन अगर यह लगातार होता है, हर जगह होता है, मूवी से लेकर ऑफिस और मीटिंग तक व्यक्ति हर जगह लेट होता है तो यह एक पैटर्न है। पैटर्न हमेशा किसी गहरी बात की ओर इशारा करते हैं।

लेट होने का पैटर्न किस बात का संकेत है?

जब कोई बार-बार लेट होता है, तो वह सिर्फ आपको इंतजार नहीं करवा रहा होता, बल्कि-

  • वह आपके वक्त का सम्मान नहीं करता।
  • वह आपके समय की अनदेखी कर रहा होता है।
  • आपकी खर्च हो रही एनर्जी को हल्के में ले रहा होता है।
  • आपकी प्लानिंग और तैयारी को महत्व नहीं दे रहा होता।
  • आपके कम्फर्ट और इमोशनल स्टेट को सेकेंडरी मान रहा होता है।

ये सारी बातें मिलकर बताती हैं कि मेरा समय ज्यादा महत्वपूर्ण है, तुम्हारा तो एडजस्ट हो जाएगा।

अक्सर ये बातें कही नहीं जातीं, लेकिन व्यवहार में स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं। फर्ज कीजिए, आप मूवी देखने के लिए तैयार होकर इंतजार कर रही हैं और पार्टनर 30 मिनट लेट आता है। उस दौरान आपका मूड, उत्साह और ट्रस्ट सब प्रभावित होता है। ये छोटी बात लगती है, लेकिन बार-बार रिपीट होने होने पर बड़े घाव जैसी बन जाती है।

क्या हर बार सॉरी बोल देना काफी है?

माफी दो तरह की होती है। एक, जिसमें इंसान सच में अपनी गलती को स्वीकार करता है, उसकी जिम्मेदारी लेता है और भविष्य में उस गलती को न दोहराने की कोशिश करता है। दूसरी, जिसमें माफी सिर्फ कॉन्फ्लिक्ट को खत्म करने का एक टूल भर होती है।

अगर कोई हर बार सॉरी बोल रहा है, लेकिन उसके व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आ रहा है तो इसका मतलब है कि वह माफी आपकी फीलिंग समझकर नहीं, बल्कि उस स्थिति से बाहर निकलने के लिए बोली जा रही है। ऐसी माफी रिलेशनशिप में धीरे-धीरे भरोसे को कमजोर करती है।

क्या यह एक रेड फ्लैग है?

अगर लगातार ये पैटर्न बना हुआ है कि सॉरी बोलने के बाद भी वह हर जगह देर से पहुंचता है तो यह रेड फ्लैग है। लेकिन यह समझना जरूरी है कि यह रेड फ्लैग किस बात का है।

यह रेड फ्लैग यह नहीं कहता कि आपका पार्टनर खराब इंसान है। यह रेड फ्लैग यह कहता है कि-

  • वह जिम्मेदारी लेने में कमजोर हो सकता है।
  • उसे बाउंड्रीज की समझ कम हो सकती है।
  • उसके जीवन में समय और काम का एक सही स्ट्रक्चर नहीं है।
  • उसे यह एहसास नहीं है कि उसका व्यवहार दूसरों पर क्या असर डाल रहा है।

ऐसे पैटर्न वाले लोग अच्छे दिल के हो सकते हैं, लेकिन इनमें सेल्फ-अवेयरनेस की कमी होती है। ये रेड फ्लैग है क्योंकि ये आगे की जिंदगी में बड़ी समस्याओं की वजह बन सकता है।

इसके पीछे क्या साइकोलॉजिकल कारण हो सकते हैं?

किसी के लगातार लेट होने का व्यवहार अक्सर इन कारणों से जुड़ा होता है।

परवरिश- अगर बचपन में समय, अनुशासन या जिम्मेदारी पर जोर नहीं रहा, तो व्यक्ति बड़ा होकर भी इसे गंभीरता से नहीं लेता।

सेल्फ-डिसरिस्पेक्ट- जो व्यक्ति अपने ही समय, रूटीन और कमिटमेंट को महत्व नहीं देता, वह अनजाने में दूसरों के समय को भी कम आंकता है। जैसा रिश्ता हमारा अपने साथ होता है, वैसा ही दूसरों के साथ भी झलकता है।

ब्रेन वायरिंग- कुछ लोगों को इंपल्स कंट्रोल करने, प्रिऑरिटी तय करने या समय का सही अनुमान लगाने में समस्या होती है। यह ADHD (अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर) जैसी कंडीशंस में भी होता है, लेकिन तब व्यक्ति कोशिश करता है, सिस्टम बनाता है। लेकिन यहां सवाल यह है कि क्या वह कोशिश कर रहा है?

पावर डायनेमिक्स- कभी-कभी देर होना एक अनकॉन्शियस पावर मूव भी होता है, जहां एक व्यक्ति जानता है कि दूसरा एडजस्ट कर लेगा। ये रिश्ते में असमानता दिखाता है।

ये कारण जानना इसलिए जरूरी है क्योंकि ये बताते हैं कि समस्या सतह पर है या गहरी। हालांकि कारण चाहे जो हो, ये आपकी जिम्मेदारी नहीं है कि आप इसे ठीक करें।

शादी के बाद इसके क्या परिणाम हो सकते हैं?

अक्सर लोग सोचते हैं कि शादी के बाद सब ठीक हो जाएगा। लेकिन सच ये है कि शादी कोई जादू की छड़ी नहीं है। शादी के बाद लोगों के व्यक्तित्व, व्यवहार या बेसिक पैटर्न नहीं बदलते। शादी के बाद ये पैटर्न ज्यादा खुलकर सामने आते हैं और दिखाई देने लगते हैं।

यहां बात सिर्फ मूवी या रेस्त्रां में लेट होने की नहीं है। बात “सेंस ऑफ रिस्पांसबिलिटी” (दायित्वबोध) की है। अगर किसी व्यक्ति में दायित्वबोध नहीं है तो वह छोटी से लेकर बड़ी चीजों तक में रिफ्लैक्ट होता है। जीवन के बड़े, गंभीर मसलों में भी दिखाई देता है। जैसेकि

  • रिश्ते की जिम्मेदारी समझना
  • फैमिली कमिटमेंट्स पूरा करना

ऐसे में एक फैमिली यूनिट के भीतर ये समस्या सिर्फ लेट होने की नहीं होगी, बल्कि कई जगह आप अकेली पड़ सकती हैं। शादी के बाद जिंदगी ज्यादा कॉम्प्लिकेटेड हो सकती है। पार्टनर का गैरजिम्मेदार पैटर्न मानसिक थकान, तनाव और यहां तक कि डिप्रेशन का कारण बन सकता है।

क्या इसे नजरअंदाज किया जा सकता है?

छोटी आदत वही होती है, जो कभी-कभार हो, जिसके लिए व्यक्ति खुद जिम्मेदारी ले और जिसे सुधारने की कोशिश दिखे। अगर तीन साल में भी यह पैटर्न नहीं बदला, तो इसे छोटी आदत कहना खुद को धोखा देना होगा। सम्मान और भरोसा किसी भी रिश्ते की बुनियाद होते हैं। इसे नजरअंदाज करने से आपकी अपनी खुशी पर असर पड़ेगा।

आपको क्या करना चाहिए?

सबसे पहले, इमोशनल नहीं, स्ट्रक्चर्ड बातचीत करें। पार्टनर से “तुम हमेशा लेट होते हो” कहने की बजाय कहें, “जब तुम बार-बार लेट होते हो, मुझे लगता है कि मेरा समय और मेरी तैयारी मायने नहीं रखती।” इससे वो डिफेंसिव नहीं होगा और बात समझेगा।

स्पष्ट सीमा तय करें। अगर मूवी 6 बजे की है, तो बताएं कि मैं 6 बजे निकल जाऊंगी। मैं बार-बार इंतजार नहीं करूंगी। ये बाउंड्री सेट करने से वो सीखेगा। सभी स्टेप ग्राफिक में देखिए-

आखिरी बात

रिश्ते में प्यार, केमेस्ट्री और बॉन्डिंग जरूरी हैं, लेकिन सम्मान, जिम्मेदारी और बदलाव की इच्छा भी उतनी ही जरूरी है। अगर आपका पार्टनर अपने पैटर्न को समझ रहा है, उस पर काम करने के लिए तैयार है, तो यह एक पॉजिटिव साइन है। इसका मतलब है कि ये रिश्ता उसके लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है। ऐसे में अपनी तरफ से संभव मदद की जा सकती है। काउंसलिंग की जा सकती है, सीबीटी थेरेपी की मदद ली जा सकती है। मदद तभी संभव है, जब पहला कदम वह खुद बढ़ाने के लिए तैयार हो।

लेकिन अगर वह लगातार इसे हल्के में लेता है, अपनी आदतों को डिफेंड करता है, बातचीत अवॉइड करता है और काउंसलिंग के लिए तैयार नहीं होता, तो आपको इस बारे में सोचने की जरूरत है। आप वयस्क हैं, समझदार हैं और ये जानती हैं कि हमारी पहली जिम्मेदारी अपने प्रति है। हम अपने प्रियजनों को प्यार कर सकते हैं, लेकिन उन्हें बदलने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। अंत में हमें चुनना खुद को ही होता है।

……………… ये खबर भी पढ़िए रिलेशनशिप एडवाइज- मूवी-रेस्त्रां का बिल मैं ही भरता हूं:गर्लफ्रेंड भी कमाती है पर पैसे नहीं खर्च करती, ये बोझ मुझ पर ही क्यों?

आपने ये तो बताया कि आप दोनों जॉब करते हैं, लेकिन ये नहीं बताया कि क्या आप दोनों बराबर पैसे भी कमाते हैं? यह सवाल इसलिए जरूरी है, क्योंकि अगर कोई 1 लाख रुपए कमा रहा है और दूसरे की सैलरी सिर्फ 20 हजार रुपए है तो खर्च में बराबरी की उम्मीद वाजिब नहीं है। आगे पढ़िए…

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