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- Pt. Vijayshankar Mehta Column | Indian Culture: Asking Wellbeing Is Nature, Not Habit
1 घंटे पहले
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पं. विजयशंकर मेहता
हमारी भारतीय संस्कृति में किसी की कुशलता पूछना जीवंत कृत्य है। धीरे-धीरे इसे हमने आदत बना लिया, जबकि यह पूछताछ स्वभाव होना चाहिए। हम समाज में किसी से मिलते हैं तो पूछते हैं कैसे हो? वो कहता है अच्छे हैं। न पूछने वाले को मतलब, न बताने वाले को लेना-देना। सच तो यह है कि कुशलता पूछने पर कोई अपना रोना रोने लग जाए तो आप जीवन में दुबारा किसी ने नहीं पूछेंगे।
तुलसीदास जी ने प्रसंग लिखा है कि गरुड़ जी जब पहुंचे तो काकभुशुंडि जी ने उनसे कुशलता पूछी- अति आदर खगपति कर कीन्हा, स्वागत पूछि सुआसन दीन्हा। उन्होंने पक्षीराज गरुड़ का बहुत ही आदर-सत्कार किया और स्वागत-कुशल पूछकर बैठने के लिए सुंदर आसन दिया। जबकि आज धीरे-धीरे सबकुछ औपचारिक हो गया है।
टेक्नोलॉजी के साथ बायोइन्फॉर्मेटिक्स के कारण मनुष्य के भीतर का मनुष्य विस्थापित हो रहा है। एक दिन हम अपने को बायोटेक्नोलॉजिकल मनुष्यों से ही घिरे पाएंगे और उस समय संवेदनाएं बचाना बहुत बड़ी चुनौती हो जाएगा।
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: किसी की कुशलता पूछना आदत नहीं हमारा स्वभाव हो

