ट्रम्प बोले- नोबेल नहीं मिला, अब शांति पर भरोसा नहीं: ग्रीनलैंड पर कब्जे का विचार इसीलिए आया; नॉर्वे के PM को चिट्ठी लिखकर बताया Today World News

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वॉशिंगटन डीसीकुछ ही क्षण पहले

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गाहर स्टोरे को एक चिट्ठी लिखी है, जिसमें नोबेल न मिलने की शिकायत की गई है।

पोलिटिको की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प ने चिट्ठी में शिकायती लहजे में लिखा है कि 8 जंग रुकवाने के बावजूद उन्हें नोबेल से सम्मानित नहीं किया गया। उन्होंने लिखा कि अब वह सिर्फ शांति के बारे में नहीं सोच रहे। शांति जरूरी है, लेकिन अब वह यह भी सोचेंगे कि अमेरिका के हित में क्या सही है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की उनकी कोशिश की एक वजह यह भी है कि उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिला। ट्रम्प के मुताबिक, नोबेल पुरस्कार न मिलना उनके फैसले को प्रभावित कर रहा है।

जोनास गाहर ने स्थानीय अखबार आफ्टेनपोस्टेन को बताया कि उन्हें ट्रम्प का यह संदेश मिला है। उन्होंने कहा कि यह जवाब उस संदेश के बाद आया। जो उन्होंने और फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने मिलकर ट्रम्प को भेजा था। यह संदेश यूरोपीय देशों पर अमेरिकी टैरिफ बढ़ाने के फैसले के विरोध में भेजा गया था।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अप्रैल 2025 में व्हाइट हाउस में नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गाहर स्टोरे के साथ द्विपक्षीय बैठक की थी।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अप्रैल 2025 में व्हाइट हाउस में नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गाहर स्टोरे के साथ द्विपक्षीय बैठक की थी।

ट्रम्प बोले- ग्रीनलैंड पर हमारा पूरा कंट्रोल होने तक दुनिया सुरक्षित नहीं

रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प ने लेटर में कहा कि डेनमार्क ग्रीनलैंड की रक्षा रूस या चीन से नहीं कर सकता और वैसे भी उनके पास स्वामित्व का अधिकार क्यों है? इससे जुड़ा कोई लिखित दस्तावेज नहीं हैं। बस इतना है कि सैकड़ों साल पहले एक नाव वहां उतरी थी।

उन्होंने कहा, ‘मैंने नाटो की स्थापना के बाद से किसी भी व्यक्ति की तुलना में नाटो के लिए ज्यादा काम किया है। जब ​​तक ग्रीनलैंड पर हमारा पूरा कंट्रोल नहीं होगा, तब तक दुनिया सुरक्षित नहीं है।’

ट्रम्प बोले- NATO को हमारी मदद करनी चाहिए

उन्होंने आगे कहा कि अगर अमेरिका ने ग्रीनलैंड नहीं लिया, तो रूस या चीन इसे ले लेंगे और वे ऐसा कभी नहीं होने देंगे। ट्रम्प का कहना है कि NATO को इस मामले में आगे आना चाहिए और अमेरिका को ग्रीनलैंड दिलाने में मदद करनी चाहिए।

उन्होंने दावा किया कि ग्रीनलैंड अमेरिका के हाथ में होने से NATO और ज्यादा मजबूत और प्रभावी हो जाएगा।

ट्रम्प को मांगने पर भी नोबेल पीस प्राइज नहीं मिला था

ट्रम्प हमेशा नोबेल शांति पुरस्कार लेने की इच्छा जताते रहे हैं। ट्रम्प ने सबसे पहले नोबेल लेने की इच्छा भारत-पाकिस्तान के बीच मई 2025 में हुए संघर्ष को रुकवाने के दावे की साथ जताई थी।

उन्होंने कहा था कि उनके कारण न्यूक्लियर देशों के बीच जंग की स्थिति टली। पाकिस्तान ने ट्रम्प को धन्यवाद देते हुए उन्हें नोबेल के लिए नॉमिनेट भी किया था। हालांकि, भारत हमेशा ट्रम्प के इस दावे को खारिज करता आया है।

अक्टूबर 2025 में वेनेजुएलाई नेता मारिया मचाडो को नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें ‘वेनेजुएला के लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए उनके प्रयासों और तानाशाही से शांतिपूर्ण लड़ाई’ के लिए यह सम्मान मिला था। जब यह मचाडो को मिला तो ट्रम्प ने नाराजगी जताई थी।

उन्होंने कहा था कि जिमी कार्टर के बाद वह पहले राष्ट्रपति हैं जिन्होंने कोई नया युद्ध शुरू नहीं किया।

माचाडो ने अपना नोबेल ट्रम्प को सौंपा

माचाडो ने हाल ही में अपने नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल ट्रम्प को गिफ्ट कर दिया था। ट्रम्प ने गुरुवार को व्हाइट हाउस में वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो से मुलाकात की।

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अगवा करने के बाद यह उनकी किसी भी वेनेजुएलाई नेता से पहली आमने-सामने की मुलाकात थी।

मुलाकात के बाद माचाडो ने कहा, ‘मुझे लगता है कि आज हम वेनेजुएलावासियों के लिए एक ऐतिहासिक दिन है। हम ट्रम्प पर भरोसा कर रहे।’

मारिया ने ट्रम्प को अपना नोबेल शांति पुरस्कार दिया। इस पर लिखा था कि ट्रम्प को वेनेजुएला के लोगों की तरफ से यह भेंट किया जा रहा है। ट्रम्प ने वेनेजुएला की आजादी के लिए जो किया उसे वेनेजुएला के लोग कभी नहीं भूलेंगे।

मारिया ने ट्रम्प को अपना नोबेल शांति पुरस्कार दिया। इस पर लिखा था कि ट्रम्प को वेनेजुएला के लोगों की तरफ से यह भेंट किया जा रहा है। ट्रम्प ने वेनेजुएला की आजादी के लिए जो किया उसे वेनेजुएला के लोग कभी नहीं भूलेंगे।

फोटो के जरिए ग्रीनलैंड को अमेरिका ने चेतावनी दी थी

व्हाइट हाउस में 14 जनवरी को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोक्के रासमुसेन और ग्रीनलैंड की विदेश मंत्री विवियन मोट्जफेल्ट ने बैठक की थी। इस बैठक में कोई बड़ा समझौता नहीं हुआ।

बैठक के बाद व्हाइट हाउस ने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर साझा की, जिसमें ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण को बढ़ावा दिया गया। तस्वीर में सड़क पर ग्रीनलैंड का झंडा लगे दो स्लेज दिखाई दे रही हैं।

एक रास्ता व्हाइट हाउस और अमेरिकी झंडे की ओर जाता है, जबकि दूसरा रास्ता अंधेरे और बिजली की ओर जाता है। जहां चीन और रूस का झंडा लगा है। तस्वीर के साथ कैप्शन लिखा है, “ग्रीनलैंड किस तरफ जाओगे?”

तस्वीर के जरिए ट्रम्प ग्रीनलैंड पर दबाव बनाना चाहते हैं कि अगर चीन-रूस की तरह गए तो अंजाम बुरा हो सकता है। जबकि अमेरिका की तरफ आने से शांति रहेगी।

तस्वीर व्हाइट हाउस ने अपने सोशल मीडिया पर पोस्ट की।

तस्वीर व्हाइट हाउस ने अपने सोशल मीडिया पर पोस्ट की।

ट्रम्प ने 8 यूरोपीय देशों पर 10% टैरिफ लगाया

डोनाल्ड ट्रम्प ने यूरोप के 8 देशों पर 10% टैरिफ लगा दिया है। ये देश ग्रीनलैंड पर अमेरिका के कब्जे की धमकी का विरोध कर रहे थे।

ट्रम्प ने शनिवार को सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, नीदरलैंड और फिनलैंड टैरिफ के दायरे में आएंगे। इन पर 1 फरवरी से टैरिफ लागू होगा।

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका के साथ कोई समझौता नहीं होता है, तो 1 जून से यह टैरिफ बढ़ाकर 25% कर दिया जाएगा। इससे पहले ट्रम्प ने शुक्रवार को व्हाइट हाउस में एक बैठक के दौरान इन देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी थी।

रिपोर्ट- यूरोपीय देशों को NATO छोड़ने के लिए मजबूर कर रहे ट्रम्प

डेली मेल के मुताबिक, अमेरिका ने अगर ग्रीनलैंड पर हमला किया तो इससे NATO के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकता है। साथ ही यूरोपीय नेताओं के साथ सीधा टकराव हो सकता है, जिससे NATO गठबंधन टूटने की कगार पर पहुंच सकता है।

कुछ यूरोपीय अधिकारियों का मानना है कि ट्रम्प के आसपास के कट्टरपंथी MAGA गुट का असली मकसद नाटो को अंदर से खत्म करना है, क्योंकि संसद उन्हें NATO से बाहर निकलने की इजाजत नहीं देगी।

इसलिए ग्रीनलैंड पर कब्जा करके यूरोपीय देशों को NATO छोड़ने के लिए मजबूर किया जा सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर ट्रम्प नाटो को खत्म करना चाहते हैं, तो यह शायद सबसे आसान तरीका हो सकता है।’

ट्रम्प NATO को क्यों कमजोर करना या तोड़ना चाहते हैं?

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प लंबे समय से NATO को अनुचित मानते हैं। उनका मानना है कि अमेरिका इसमें सबसे ज्यादा पैसा और संसाधन खर्च करता है, जबकि यूरोपीय देश अपने जीडीपी का 2% रक्षा पर खर्च करने के लक्ष्य को पूरा नहीं करते।

पहले कार्यकाल में, उन्होंने NATO सहयोगियों से भुगतान बढ़ाने की मांग की और कहा कि अगर वे नहीं मानेंगे तो अमेरिका उनकी रक्षा नहीं करेगा। 2024 चुनाव अभियान में, ट्रम्प ने कहा कि वे रूस को उन NATO सदस्यों पर जो चाहे करने की अनुमति देंगे जो पर्याप्त खर्च नहीं करते।

ट्रम्प का मकसद “अमेरिका फर्स्ट” नीति को बढ़ावा देना है। जिसमें वे अमेरिकी करदाताओं के पैसे को विदेशी सुरक्षा पर कम खर्च करना चाहते हैं। साथ ही यूरोप को अपनी रक्षा खुद करने के लिए मजबूर करना चाहते हैं।

कुछ विश्लेषकों का मानना है कि ट्रम्प NATO को कमजोर करके रूस के साथ बेहतर संबंध बनाना चाहते हैं। ट्रम्प के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने कहा था कि वे NATO से अमेरिका को निकालने की कोशिश करेंगे। वे इसे पुराना और अमेरिका के लिए बोझ मानते हैं।

हालांकि, कई विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि इससे अमेरिका अलग-थलग पड़ सकता है। यूरोप रूस के प्रभाव में आ सकता है और वैश्विक सुरक्षा कमजोर हो सकती है।

ग्रीनलैंड क्यों इतना खास…

  • खास भौगोलिक स्थिति: ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति बहुत खास है। यह उत्तर अमेरिका और यूरोप के बीच, यानी अटलांटिक महासागर के बीचों-बीच के पास स्थित है। इसी वजह से इसे मिड-अटलांटिक क्षेत्र में एक बेहद अहम ठिकाना माना जाता है।
  • रणनीतिक सैन्य महत्व: ग्रीनलैंड यूरोप और रूस के बीच सैन्य और मिसाइल निगरानी के लिए बेहद अहम है। यहां अमेरिका का थुले एयर बेस पहले से है, जो मिसाइल चेतावनी और रूसी/चीनी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए जरूरी है।
  • चीन और रूस पर नजर: आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन की गतिविधियां बढ़ रही हैं। ग्रीनलैंड पर प्रभाव होने से अमेरिका इस इलाके में अपनी भू-राजनीतिक पकड़ मजबूत रखना चाहता है।
  • प्राकृतिक संसाधन: ग्रीनलैंड में दुर्लभ खनिज, तेल, गैस और रेयर अर्थ एलिमेंट्स के बड़े भंडार माने जाते हैं, जिनका भविष्य में आर्थिक और तकनीकी महत्व बहुत ज्यादा है। चीन इनका 70-90% उत्पादन नियंत्रित करता है, इसलिए अमेरिका अपनी निर्भरता कम करना चाहता है।
  • नई समुद्री व्यापारिक राहें: ग्लोबल वार्मिंग के कारण आर्कटिक की बर्फ पिघल रही है, जिससे नई शिपिंग रूट्स खुल रही हैं। ग्रीनलैंड का नियंत्रण अमेरिका को इन रूटों पर प्रभुत्व और आर्कटिक क्षेत्र में रूस-चीन की बढ़त रोकने में मदद करेगा।
  • अमेरिकी सुरक्षा नीति: अमेरिका ग्रीनलैंड को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा की “फ्रंट लाइन” मानता है। वहां प्रभाव बढ़ाकर वह भविष्य के संभावित खतरों को पहले ही रोकना चाहता है।

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकियों के बाद यूरोपीय देश एकजुट हो गए हैं। कई NATO सदस्य देशों ने ऑपरेशन आर्कटिक एंड्योरेंस नाम से एक संयुक्त सैन्य अभ्यास शुरू किया है। पूरी खबर पढ़ें…

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