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-पिछले 15 वर्षों से फ्लैट दिलाने के लिए बार-बार रुपये लेते रहे आरोपी
-पीड़ित की शिकायत के आधार पर पुलिस ने दर्ज की शिकायत
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। बजघेड़ा थाना क्षेत्र में सस्ता फ्लैट दिलाने के नाम पर सेवानिवृत्त कर्नल से 67.38 रुपये की धोखाधड़ी हो गई। पीड़ित ने पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाए हैं कि फ्लैट की पूरी प्रतिभूति राशि 67.38 लाख रुपये का भुगतान करने के बावजूद बिल्डर द्वारा उनको फ्लैट पर कब्जा नहीं दिया गया है। पीड़ित की शिकायत के आधार पर पुलिस ने बिल्डर कंपनी, डेवलेपर कंपनी व निदेशक, प्रमोटर सहित 13 लोगों के खिलाफ बजघेड़ा थाना में प्राथमिकी दर्ज की है। मामले की छानबीन आर्थिक अपराध शाखा-2 की पुलिस कर रही है।
सेक्टर-102 की हेरिटेज मैक्स सोसाइटी निवासी कर्नल संजय कुमार वर्मा (सेवानिवृत्त) ने पुलिस को बताया कि 2010 में उनकी पोस्टिंग सेना मुख्यालय नई दिल्ली में हुई थी। सेवानिवृत होन के बाद वे गुरुग्राम में घर की तलाश कर रहे थे। दिसंबर 2010 में उन्हें मैसर्स ताशी लैंड डेवलपर के अधिकारी की कॉल आई। जिसमें उन्हें उनके प्रोजेक्ट कैपिटल गेटवे सेक्टर-111, गुरुग्राम के बारे में चर्चा करने के लिए दिल्ली बुलाया। जहां पर तरुण कुमार ने उन्हें प्रोजेक्ट का लेआउट प्लान दिखाया। वहीं, कंपनी के निदेशक काशी नाथ शुक्ला व एचए फारूकी ने उन्हें कैपिटल गेटवे टॉवर सेक्टर-111, गुरुग्राम में अपना फ्लैट खरीदने के लिए कहा।
बिल्डर व अन्य लोगों ने 2,900 रुपये प्रति वर्ग फुट की दर पर अच्छा फ्लैट देने का आश्वासन दिया। वहीं, बुकिंग के 36 माह के दरमियान फ्लैट का कब्जा देने की बात कही गई। इसके बाद कर्नल संजय कुमार वर्मा ने तरुण कुमार, काशी नाथ शुक्ला व एचए फारूकी को 13 दिसंबर 2010 और 20 जनवरी 2011 को चेक के माध्यम से तीन लाख रुपये, 25 जुलाई 2011 को 7,68,969 रुपये और 25 जुलाई 2011 को 1,91,550 रुपये दिए गए। एग्रीमेंट होने तक 12,60,519 रुपये का भुगतान कर दिया था। इसके बाद भी उनसे कई तरह से रुपये मांगे गए। उन्हें आवंटित फ्लैट पर जुलाई 2016 तक कब्जा दिए जाने की बात कही गई, जिसके चलते कर्नल संजय ने बाकी राशि का भी समय-समय पर भुगतान कैपिटल गेटवे प्रोजेक्ट के साइट कार्यालय में कर दिया। लेकिन काशी नाथ शुक्ला ने इस प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य बंद कर दिया और सारा रुपया किसी अन्य परियोजना में लगा दिया। इन्होंने कैपिटल गेटवे प्रोजेक्ट को अवैध रूप से गिरवी रखकर 100 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण लिया। इसके बाद शिकायतकर्ता को 11 नवंबर 2024 को 46,05,869 रुपये की बढ़ी हुई मांग के लिए पत्र भेजा। सेवानिवृत्त कर्नल का आरोप है कि फ्लैट की पूरी प्रतिभूति राशि 67.38 लाख रुपयों का भुगतान करने के बावजूद उन्हें बिल्डर द्वारा फ्लैट पर कब्जा नहीं दिया जा रहा।
जांच अधिकारी एएसआई सुमित ने बताया कि मामले की छानबीन आर्थिक अपराध शाखा-2 की पुलिस कर रही है। मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद रिकॉर्ड को आगामी कार्रवाई के लिए आर्थिक अपराध शाखा-2 में भेजा जाएगा।
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Gurugram News: फ्लैट दिलाने के नाम पर सेवानिवृत्त कर्नल से ठगे 67.38 लाख रुपये


