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प्लांटेशन के लिए बाहर से पौधे खरीदने के बजाय फॉरेस्ट डिपार्टमेंट शहर की जरूरत को खुद ही पूरा कर पाएगा। दो नई हाईटेक नर्सरी बनाई गई हैं। इसमें से एक नर्सरी बोटेनिक्ल गार्डन और दूसरी दड़वा में बनाई गई है। रोबोटिक कॉन्सेप्ट पर बनाई गई इन नर्सरी में हर किस्म के पौधे उगाए जा रहे हैं। जब ये थोड़े बड़े होते हैं तो उन्हें ग्रीन हाउस में रखा जाता है, ताकि 3-5 फुट के पौधों की प्लांटेशन हो। यहां पर पानी के छिड़काव के लिए मशीनों के जरिए काम हो रहा है। साथ ही पौधों के उगने के िलए सही तापमान भी मेंटेन रखा जा रहा है। ताजी हवा और ह्यूमिडिटी को कंट्रोल करने के लिए अलग मशीनें लगाई गई हैं। बोटेनिकल गार्डन की हाईटेक नर्सरी में करीब 1 लाख से ज्यादा पौधे उगाए जा रहे हैं। इसमें पीपल, नीम और बाकी पौधे शामिल हैं। शहरी एरिया में हरियाली को लेकर चंडीगढ़ पूरे देश में सबसे आगे है। इसी तरह से हरियाली बनी रहे, इसके लिए इस साल की प्लांटेशन की अभी से तैयारी शुरू हो गई है। चंडीगढ़ में हरियाली का एरिया करीब 50% से ज्यादा का है। इसको बनाए रखने के साथ हरियाली की सेकेंड लाइन को तैयार किया जा रहा है, ताकि पुराने पेड़ जब गिर जाएं तो भी उनकी जगह नए पेड़ उतनी देर में तैयार हो सकें। दिल्ली की तरह चंडीगढ़ में भी एयर पॉल्यूशन की समस्या रहती है। ग्रीनरी की जरूरत को देखते हुए जनवरी से प्लांटेशन और बाकी काम शुरू कर दिए गए हैं। पिछले साल करीब 5.77 लाख नए पौधों की प्लांटेशन पूरे शहर में हुई थी, जिसकी सरवाइवल औसतन 80% हुई। अब आगे करीब तीन लाख नए पौधे लगेंगे, लेकिन पौधों की संख्या के साथ ही इस बार क्वालिटी और नए पौधों के रखरखाव पर ज्यादा फोकस रहेगा। चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया खुद हरियाली बढ़ाने को लेकर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। पिछले साल जहां प्लांटेशन हुई, उनका वे खुद सभी जगहों का निरीक्षण कर चुके हैं। चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट सौरभ कुमार ने कहा कि सभी के सहयोग के साथ ग्रीनरी बढ़ाने की तरफ प्रशासन काम कर रहा है। जो पौधे लगते हैं, उनकी सरवाइवल दर और मेंटेन रखने को लेकर भी काम किया जा रहा है। नर्सरी में पौधों को बढ़ने के लिए अनुकूल वातावरण दिया जा रहा पार्कों में डेंस प्लांटेशन, निगम को कहा- 20 पार्कों को आइडेंटिफाई करें… इस साल की प्लांटेशन के लिए तैयारी शुरू हो गई है। इसमें हाल ही में मीटिंग हुई, जिसमें निगम को कहा गया कि वे सदर्न सेक्टरों में 20 उन पार्कों को आइडेंटिफाई करें, जहां डेंस प्लांटेशन की जा सके। शहर के हर सेक्टरों में पार्क हैं। इस कॉन्सेप्ट पर प्लांटेशन की जा रही है कि इन पार्कों में घनी प्लांटेशन को बढ़ा सकें। इसमें अलग-अलग रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के साथ मिलकर भी काम होगा। पार्कों में 5-6 फुट ऊंचाई के पौधे लगेंगे। कार्बन न्यूट्रल सिटी और एयर पॉल्यूशन कंट्रोल के लिए… 2030 तक शहर को कार्बन न्यूट्रल सिटी बनाने का टारगेट है। एक पेड़ औसतन हर साल औसतन 20 से 50 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है, लेकिन यह पेड़ की प्रजाति, उम्र और पर्यावरण पर निर्भर करता है। पूरी तरह विकसित पेड़ एक साल में करीब 21-25 किलोग्राम कार्बन सोख सकते हैं। अपने 100 साल के जीवनकाल में कुल एक टन तक कार्बन जमा कर सकते हैं। एयर पॉल्यूशन की भी समस्या चंडीगढ़ में रहती है, जिसमें भी ज्यादा ग्रीनरी के साथ कंट्रोल करने में फायदा मिलेगा।
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दो हाईटेक नर्सरी में 1 लाख पौधे हो रहे तैयार, इस बार खरीदने नहीं पड़ेंगे – Chandigarh News

