एन. रघुरामन का कॉलम: स्टार्टअप्स को बुजुर्गों की मेडिकल सहायता पर और ‘आरएंडडी’ करनी चाहिए Politics & News

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3 घंटे पहले

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एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

15 जनवरी की दोपहर मेरे व्हाट्सएप पर मैसेज ब्लिंक हुआ। मैसेज खोलते ही नागपुर के धरमपेठ में खरे टाउन स्थित परांजपे स्कूल के मतदान केंद्र से 102 वर्षीय आरएस कुप्पुस्वामी की तस्वीर सामने आई। वे खड़े थे, लेकिन कमर थोड़ी झुकी थी और बाईं तर्जनी पर लगी काली स्याही दिखा रहे थे।

ये महाराष्ट्र में गुरुवार को हुए नगर निकाय चुनाव में वोट डालने का प्रमाण था। मैं उन्हें निजी तौर पर कई कारणों से जानता हूं। वे मेरे पिता के सबसे अच्छे दोस्त थे। दोनों नागपुर रेलवे स्टेशन पर साथ काम करते थे। उनकी दिवंगत पत्नी श्रीमती सरस्वती कुप्पुस्वामी सरस्वती विद्यालय के प्राइमरी सेक्शन में टीचर थीं, जहां मैंने पढ़ाई की।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, सेवानिवृत्त न्यायाधीश सत्येंद्र धर्माधिकारी और कई जाने-माने डॉक्टर्स सहित अनेक प्रोफेशनल इसी स्कूल में पहली से दसवीं तक पढ़े थे। चूंकि स्कूल में कई सेक्शन थे, इसलिए मेरा अनुमान है कि श्रीमती कुप्पुस्वामी ने किसी न किसी रूप से इन सफल लोगों के जीवन को छुआ होगा- क्योंकि उन्होंने जीवन के दस साल इसी स्कूल में बिताए थे।

मैंने तस्वीर भेजने वाली उनकी बेटी भानु को फोन किया। वे सेवानिवृत्त प्रोफेसर हैं। उन्होंने बताया कि उनके पिता अब भी बिना सहारे के चलते हैं, हालांकि उनके आंख और कान पहले की तरह साथ नहीं देते। मैंने कहा कि ‘सुनकर अच्छा लगा कि वे अब भी बिना सहारे चलते हैं, क्योंकि हर साल गिरने की वजह से लाखों बुजुर्ग बिस्तर पकड़ लेते हैं।’

असल में गिरना कभी समस्या नहीं होता। सबसे ज्यादा नुकसान तब होता है, जब गिरने के बाद बुजुर्ग बिना मदद के घंटों गुजार देते हैं। जिन्हें तुरंत मदद मिल जाती है, उनके अस्पताल में भर्ती होने की संभावना काफी कम होती है और वे स्वतंत्र जीवन जी पाते हैं। इसी साल 9 जनवरी से अमेरिका ने ‘फास्टहेल्प’ नामक नया स्लीक मेडिकल अलर्ट डिवाइस लॉन्च किया।

ये वन-टच बटन तत्काल बुजुर्गों को पूरे देश में कहीं भी अनलिमिटेड मदद से जोड़ता है। 300 डॉलर से कम का ये डिवाइस एक बार लिया तो इसमें न कोई कॉन्ट्रैक्ट है, न मासिक बिल और न डिपॉजिट। ‘फास्टहेल्प’ में अत्याधुनिक सेल्युलर एम्बेडेड टेक्नोलॉजी है तो यह आजीवन चलता है और हर जगह काम करता है।

वन टच ई. बटन बुजुर्गों को किसी भी सुविधा से जोड़ता है। वहां ज्यादातर बुजुर्गों ने इसे तुरंत खरीद लिया, क्योंकि लॉन्चिंग के पहले 72 घंटों के लिए 150 डॉलर का डिस्काउंट दिया गया था। इसकी लोकप्रियता का एक कारण यह भी रहा कि पुराने डिवाइसों में मासिक किराया लगता था।

फिलहाल यह 1964 से पहले जन्मे लोगों, यानी बेबी बूमर्स को दिया जा रहा है। 2026 में अब तक का यह सबसे तेजी से बिकने वाला इलेक्ट्रॉनिक आइटम है। इसमें न लैंडलाइन की जरूरत है और न सेलफोन की। बटन दबाते ही ये बुजुर्गों को विशाल सेल्युलर नेटवर्क से जोड़ देता है और उन्हें किसी भी बिल भुगतान से बचाता है।

इसके स्लीक लुक का बड़ा फायदा है कि यह बुजुर्गों को बूढ़ा नहीं, बल्कि खास महसूस कराता है। भारत सरकार की भी एक राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन- 14567 है। यह सेवा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सुबह 8 से रात 8 बजे तक चलती है और जानकारी के साथ-साथ फील्ड इंटरवेंशन सहायता भी देती है।

इसमें आपात स्थिति में एंबुलेंस सेवा और अस्पताल में भर्ती कराना भी शामिल है। हमारे देश में बुजुर्गों की बढ़ती आबादी के चलते हमें भी ऐसे आइडिया पर काम करना चाहिए, ताकि बुजुर्ग किसी मेडिकल इमरजेंसी में कम से कम स्थानीय स्तर पर तो स्वास्थ्य सेवाओं से तत्काल जुड़ सकें। यह हमारे आईटी और टेलीकॉम विशेषज्ञों के लिए भी आइडिया है कि वे ‘फास्टहेल्प’ जैसा या उससे बेहतर उत्पाद बनाएं।

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