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3 मिनट पहले
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सवाल– छह महीने पहले मेरे एक दोस्त ने सुसाइड कर लिया। मैं सेकेंड ईयर पोस्ट ग्रेजुएशन का स्टूडेंट हूं। सुसाइड वाली रात उसने मेरे मोबाइल पर कई बार फोन किया, लेकिन मैंने नहीं उठाया। मैं एक दोस्त के रूम में पार्टी कर रहा था।
हमारे ग्रुप के दो और लोगों को उसने फोन किया, लेकिन हममें से किसी ने फोन नहीं उठाया। वो अक्सर आधी रात शराब पीकर फोन करता था। हमें लगा कि उसने पी रखी है, फिर दिमाग खाएगा। लेकिन अगले दिन पता चला कि उसने अपने रूम में फांसी लगा ली।
उस घटना को छह महीने बीत गए हैं, लेकिन मैं उस बात को भुला नहीं पा रहा। मैं एक अजीब से गिल्ट में जी रहा हूं। बार-बार लगता है कि उस रात अगर मैंने उसका फोन उठा लिया होता तो आज वो जिंदा होता। मैं कई-कई रात सो नहीं पाता। शराब बहुत बढ़ गई है। इस गिल्ट से बाहर कैसे निकलूं?
एक्सपर्ट– डॉ. द्रोण शर्मा, कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट, आयरलैंड, यूके। यूके, आयरिश और जिब्राल्टर मेडिकल काउंसिल के मेंबर।
सवाल पूछने के लिए आपका शुक्रिया। आपकी मन:स्थिति को समझा जा सकता है। लेकिन अगर सिर्फ एक लाइन में कहूं तो दोस्त की मृत्यु के लिए स्वयं को दोष देना या जिम्मेदार मानना ठीक नहीं है। आपका गिल्ट इस बात का सबूत बिल्कुल नहीं है कि अपने दोस्त की मौत के लिए आप जिम्मेदार हैं। लेकिन ये इस बात का संकेत जरूर है कि आप एक संवेदनशील और जिम्मेदार इंसान हैं, जो अब एक गहरी तकलीफ से गुजर रहा है।
मैं आगे आपके मनोविज्ञान को डिकोड करने और सेल्फ एसेसमेंट के साथ सेल्फ हेल्प के कुछ टूल्स देने की कोशिश करूंगा। आगे बढ़ने से पहले बता दूं कि सवाल पूछकर आपने अपनी मदद की दिशा में पहला कदम बढ़ाया है। ये बहुत साहस का काम है।

यह सिर्फ ‘दुख’ क्यों नहीं लग रहा?
किसी दोस्त की मृत्यु के बाद दुख, यादें और पछतावा होना सामान्य मानवीय प्रतिक्रिया है। लेकिन यहां कुछ संकेत बताते हैं कि मामला केवल सामान्य शोक (नॉर्मल ग्रीफ) तक सीमित नहीं है।
- घटना के छह महीने गुजरने के बाद भी वही वाकया दिमाग में बार-बार घूम रहा है।
- भीतर कहीं ये एक विचार अटक गया है कि: “मेरी वजह से ऐसा हुआ।”
- इस ग्रीफ का असर नींद और सेहत पर पड़ रहा है। दोनों लगातार बिगड़ रही हैं।
- इस कारण शराब भी बढ़ गई है। शराब पीना अपने दुख से कोप करने का मुख्य तरीका बन गया है।
- यहीं हमारे लिए नॉर्मल ग्रीफ और कॉम्प्लिकेटेड ग्रीफ के फर्क को समझना जरूरी हो जाता है।

शोक (ग्रीफ) और उसके चरण
शोक किसी अपने की मृत्यु के बाद होने वाली स्वाभाविक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है। इसमें शॉक, सुन्नपन, उदासी, गुस्सा, अपराधबोध, याद और तड़प जैसे सारे मनोभाव प्रकट होते हैं। इन सबसे गुजरते हुए इंसान धीरे-धीरे एक्सेप्टेंस यानी स्वीकार्यता की ओर बढ़ता है। ये सभी चरण किसी तय क्रम में नहीं चलते।
अगर इस केस में शोक सामान्य रूप में आगे बढ़ रहा होता, तो छह महीने बाद भी दोस्त की याद आने पर दुख होता। कभी-कभी यह खयाल आता कि “काश मैंने फोन उठा लिया होता,” लेकिन ये विचार लहरों की तरह आते और फिर शांत हो जाते। नींद और पढ़ाई धीरे-धीरे सुधरती और गिल्ट पूरी जिंदगी पर हावी नहीं होता।
कॉम्प्लिकेटेड ग्रीफ- यहां तस्वीर क्यों अलग दिखती है?
इस केस में शोक के साथ एक अपराधबोध भी जुड़ गया है, खासकर उस चीज को लेकर गिल्ट, जो आपने नहीं किया। दिमाग उस एक पल में फंस गया है: “अगर उस दिन मैंने फोन उठा लिया होता तो आज वह जिंदा होता।”
इसे कॉम्प्लिकेटेड ग्रीफ बाय ऑमिशन (complicated grief by omission) कहा जाता है। इसमें शोक आगे नहीं बढ़ता, बल्कि व्यक्ति बार-बार उसी एक पल पर लौटता रहता है।
छह महीने बाद भी नींद खराब है, तबीयत बिगड़ी है और शराब बढ़ी हुई है। ये सब इस बात के संकेत हैं कि दुख हील नहीं हो रहा है, बल्कि कहीं स्टक हो गया है।

शराब और कॉम्प्लिकेटेड ग्रीफ- जोखिम क्यों ज्यादा है?
कॉम्प्लिकेटेड ग्रीफ की स्थिति में शराब अक्सर सेल्फ मेडिकेशन बन जाती है। शराब पीने से दर्द, गिल्ट और नींद की समस्या से अस्थाई रूप से तो राहत मिलती है, लेकिन ये राहत दरअसल होती नहीं है। ये एक तरह का भ्रम होता है, जो फिजिकल और मेंटल हेल्थ को और ज्यादा डैमेज करता है। शराब और कॉम्प्लिकेटेड ग्रीफ के जोखिम नीचे ग्राफिक में देखिए-

आपके केस में शराब का बढ़ना एक वॉर्निंग साइन है। ये संकेत है इस बात का कि शोक और अपराधबोध से निपटने और उसे मैनेज करने के लिए दिमाग सुरक्षित तरीके नहीं खोज पा रहा है।
CAGE क्वेश्चनायर
क्या शराब समस्या बन रही है?
CAGE क्वेश्चनायर एक शॉर्ट, चार सवालों वाला स्क्रीनिंग टूल है। डॉक्टर या हेल्थकेयर प्रोवाइडर इसका इस्तेमाल शराब के दुरुपयोग या उसकी लत की संभावना का पता लगाने के लिए करते हैं। CAGE क्वेश्चनायर चार शब्दों से मिलकर बना है- कम करना (Cut-down), नाराजगी (Annoyed), अपराधबोध (Guilt) और आंखें खोलने वाला (Eye-opener)। अगर इस क्वेश्चनायर के एक या अधिक सवालों का जवाब “हां” है तो इसका अर्थ है कि एल्कोहल प्रॉब्लम की संभावना है। अगर दो से ज्यादा सवालों का जवाब “हां” हो तो एल्कोहल अब्यूज की संभावना हो सकती है।
आप नीचे ग्राफिक में दिए सवालों का जवाब दें और अपना स्कोर भी चेक करें।

अपनी मेंटल हेल्थ का आकलन करें
सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट
यहां मैं आपको एक सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट दे रहा हूं। नीचे ग्राफिक्स में तीन सेक्शंस में कुल 12 सवाल हैं। सेक्शन A में इमोशनल और कॉग्निटिव प्रतिक्रिया, B में बिहेवियरल और फिजिकल प्रतिक्रिया और C में जीवन और खुशी से जुड़े सवाल हैं।
आपको इन सवालों को ध्यान से पढ़ना है और 0 से 3 के स्केल पर इसे रेट करना है। जैसेकि पहले सवाल का आपका जवाब अगर ‘बिल्कुल नहीं’ है तो 0 नंबर दें और अगर आपका जवाब ‘लगभग हमेशा’ है तो 3 नंबर दें। अंत में अपने टोटल स्कोर की एनालिसिस करें।
नंबर के हिसाब से उसका इंटरप्रिटेशन भी ग्राफिक में दिया है। जैसेकि अगर आपका स्कोर 0 से 15 के बीच है तो इसका मतलब है कि यह सामान्य ग्रीफ है। लेकिन अगर आपका स्कोर 26 से ज्यादा है तो आपको CBT थेरेपी और प्रोफेशनल हेल्प की जरूरत हो सकती है।

आपकी समस्या कहां है?
आप जिस मन:स्थिति से गुजर रहे हैं, अगर उसे साइकोलॉजिकली डिकोड करें तो मुख्य रूप से ये चार चीजें दिखाई देती हैं-
- हाइनसाइड पूर्वाग्रह: बाद में चीजें साफ दिखाई देना।
- पर्सनलाइजेशन: उस दुखद वाकये की पूरी जिम्मेदारी अपने सिर पर ले लेना
- इफ ओनली लूप: अंतहीन रूप से इस लूप में घूमना कि अगर ऐसा होता तो, “अगर मैंने फोन उठा लिया होता तो,” “काश ऐसा हुआ होता तो।”
- एल्कोहल का सहारा: अपनी पीड़ा को दबाने या भूलने के लिए एल्कोहल का सहारा लेना।
जब सेल्फ मेडिकेशन या अपने गम के इलाज के लिए एल्कोहल का सहारा लिया जाता है तो उसका मकसद अपने गिल्ट को मिटाना नहीं, बल्कि उसे अपनी रिएलिटी और आत्मदया में बदलना होता है।
चार हफ्तों का CBT आधारित सेल्फ हेल्प प्लान
इस सेल्फ हेल्प प्लान में रोज नियम से कम-से-कम ये चीजें करनी हैं-
- 10 मिनट लिखना।
- 10 मिनट कोई फिजिकल एक्टिविटी।
- किसी एक इंसान से मिलना, बात करना।
- शराब को लेकर एक क्लीयर फोकस्ड योजना पर काम करना।
सप्ताह 1
(नींद+शराब+इमोशनल लूप)
इमोशनल लूप टाइमबॉक्स
- दिन में 15 मिनट से ज्यादा इस बारे में नहीं सोचना है।
- ख्याल आए तो उसे दूर करने की कोशिश करनी है।
- किसी और काम में खुद को इंगेज करना है। अपना ध्यान वहां से हटाना है।
स्लीप फर्स्ट
- सोने से 2 घंटा पहले डिनर करना है।
- सोने से 1 घंटा पहले स्क्रीन नहीं देखना है।
- याद रखें, शराब “नींद की दवा” नहीं है।
एल्कोहल प्लान
- हफ्ते में कम-से-कम 2 दिन शराब बिल्कुल नहीं पीनी है।
- बाकी दिनों में शराब की मात्रा 30–40% तक कम करनी है।
- अकेले में शराब पीना अवॉइड करना है।
सप्ताह 2
(गिल्ट+एल्कोहल ट्रिगर्स)
● अपने ख्यालों को रीफ्रेज करना
“मुझे लगता है कि काश मैंने फोन उठाया होता, लेकिन उस वक्त तो मुझे उसके आत्महत्या के इरादे के बारे में कुछ पता नहीं था।”
● एल्कोहल ट्रिगर को मैप करना
- कब शराब पीने का मन करता है? (रात में, अकेले होने पर, गिल्ट स्पाइक होने पर)
- उस समय के लिए कोई ऑल्टरनेटिव एक्शन सोचना (वॉक करना, किसी दोस्त को फोन करना, शॉवर लेना, म्यूजिक सुनना)
सप्ताह 3
(एक्सपोजर+मीनिंगफुल रिपेयर)
- एक जगह आप मदद में चूक गए।
- इसके बदले कहीं और किसी की मदद करना।
- अपनी मेंटल हेल्थ को लेकर सजग रहना।
- एल्कोहल को सिर्फ सोशल ड्रिंकिंग तक सीमित करना।
- गिल्ट हो तो भी पीना नहीं, कोई ऑल्टरनेटिव एक्टिविटी करना। जैसेकि डायरी लिखना या वॉक करना।
सप्ताह 4
(रीलैप्स प्रिवेंशन)
- जिन स्थितियों में लूप में फंसने या शराब की तरफ जाने के चांस बढ़ते हैं, उन वॉर्निंग साइन की लिस्ट बनाना।
- जैसे ही कोई वॉर्निंग साइन दिखे या ट्रिगर महसूस हो तो तुरंत अपने रेस्क्यू प्लान पर लौटना। यानी डायरी लिखना, वॉक करना, दोस्त से बात करना, म्यूजिक सुनना।
- खुद को याद दिलाना- “मैं दोषी नहीं हूं, मैं इंसान हूं। मैं दर्द को दबाकर नहीं, समझकर जिऊंगा।”
एक अंतिम जरूरी बात
ये बात मैंने लेख के एकदम शुरुआत में भी कही थी। वही मैं फिर से दोहरा रहा हूं कि आपका अपराधबोध इस बात का सबूत नहीं है कि आपने किसी को मारा। यह इस बात का संकेत है कि आप एक संवेदनशील और जिम्मेदार इंसान हैं। आप दूसरों से जुड़ाव महसूस करते हैं, उनकी परवाह करते हैं। चूंकि आप केयर करते हैं, इसलिए आपको इतनी तकलीफ महसूस हो रही है। कॉम्प्लिकेटेड ग्रीफ से उबरने का मतलब दोस्त के जाने के दुख को भूल जाना नहीं है। इसका मतलब है दर्द को ऐसी जगह रखना, जहां वह आपकी जिंदगी और शराब दोनों को कंट्रोल न करे।
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एक वॉयलेंट और अब्यूसिव पिता के लिए गहरा दुख महसूस करना थोड़ा कनफ्यूजन भी पैदा कर सकता है। जब तक वे जीवित थे, उनसे कोई जुड़ाव नहीं था। और अब जब वो नहीं हैं तो उनका ख्याल आता है, याद आती है और गहरा दुख भी महसूस होता है। मन के लिए यह अंतर्विरोध परेशान करने वाला हो सकता है। आगे पढ़िए…
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मेंटल हेल्थ– पार्टी करता रहा, दोस्त का फोन नहीं उठाया: उस रात उसने आत्महत्या कर ली, क्या दोस्त की मौत का जिम्मेदार मैं हूं?



