UPSC Story: पिता प्रोफेसर, बेटा MBBS करके बना डॉक्टर, फिर UPSC में हासिल की रैंक 35, लेकिन नहीं बना IAS अफसर Haryana News & Updates

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नई दिल्ली (Dr Shreyak Garg UPSC Story). देश के टॉप मेडिकल कॉलेज की लिस्ट में शामिल महात्मा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान, महाराष्ट्र (MGIMS Sevagram) से डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी करना किसी के लिए भी सुनहरे भविष्य की गारंटी है. लेकिन डॉ. श्रेयक गर्ग के लिए यह सिर्फ एक पड़ाव था, मंजिल नहीं. जब उनके साथ वाले मेडिकल फील्ड में करियर बना रहे थे, तब श्रेयक अपनी आंखों में एक अलग ही सपना पाले हुए थे- यूपीएससी परीक्षा पास करने का. उन्होंने सफेद कोट और स्टेथेस्कोप को किनारे रखकर यूपीएससी के ‘चक्रव्यूह’ में उतरने का फैसला किया. लेकिन यह सफर आसान नहीं था.

यह कहानी एक ऐसी जिद्दी मेहनत की है, जिसमें दो बार की नाकामी ने सफलता की सबसे ऊंची इमारत खड़ी की. डॉ. श्रेयक गर्ग का यूपीएससी सफर किसी रोलर-कोस्टर राइड से कम नहीं रहा. बिना किसी तैयारी के दिए गए पहले प्रयास की विफलता से लेकर 2023 में मेंस की दहलीज पर रुकने तक, उन्होंने हर हार से कुछ न कुछ सीखा. साल 2024 के नतीजों ने आखिरकार उनकी तपस्या का फल दिया, जब उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 35 हासिल कर देशभर को चौंका दिया. सबसे दिलचस्प बात यह रही कि इतनी शानदार रैंक पाकर भी उन्होंने ‘कलेक्टर’ बनने के बजाय ‘डिप्लोमैट’ बनना चुना और भारतीय विदेश सेवा (IFS) को प्राथमिकता दी.

डॉ. श्रेयक गर्ग: तीन साल, तीन प्रयास और ऐतिहासिक सफलता

आईएफएस श्रेयक गर्ग हरियाणा के सोनीपत के रहने वाले हैं. उनके पिता दीनबंधु छोटू राम साइंस एंड टेक्नोलाॅजी यूनिवर्सिटी, मुरथल में प्रोफेसर हैं. श्रेयक गर्ग ने यूपीएससी सिविल सर्विस परीक्षा के 3 अटेंप्ट दिए थे. उन्हें तीसरे प्रयास में सफलता हासिल हुई थी. उनकी कहानी हर उस डॉक्टर के लिए प्रेरणा है, जो मेडिकल की पढ़ाई के बाद सिविल सेवा में करियर बनाने का सपना देख रहा है.

पहला प्रयास: बिना तैयारी का अनुभव

श्रेयक गर्ग ने अपनी एमबीबीएस की पढ़ाई के तुरंत बाद यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में बैठने का फैसला किया था. पहला अटेंप्ट उन्होंने बिना किसी खास तैयारी के दिया था. हालांकि इसमें वे सफल नहीं हुए, लेकिन इस अनुभव ने उन्हें परीक्षा पैटर्न और अपनी कमजोरियों को समझने का मौका दिया. उन्हें समझ आ गया कि यहां केवल ज्ञान नहीं, बल्कि सही रणनीति की जरूरत है. इसीलिए उन्होंने अगले प्रयास से पहले अपनी स्ट्रैटेजी बदली, जिसका असर उनके रिजल्ट में भी नजर आया.

2023 का मेंस और वो अधूरा सपना

साल 2023 में श्रेयक ने अपनी तैयारी को धार दी और पूरी ताकत झोंक दी. उनकी मेहनत का असर दिखा और उन्होंने यूपीएससी प्रीलिम्स की बाधा पार कर ली. लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था; इस साल वे यूपीएससी मेंस परीक्षा में सफल नहीं हो पाए. यूपीएससी के सफर पर निकलने से पहले श्रेयक गर्ग डॉक्टर बन चुके थे.. यानी वह पढ़ाई में बहुत होशियार रहे होंगे. ऐसे में उनके लिए यह हार बड़ी थी. लेकिन श्रेयक ने इसे हार नहीं, बल्कि अगले प्रयास की तैयारी माना.

तीसरा प्रयास: 2024 में रचा इतिहास

यूपीएससी परीक्षा के अपने तीसरे प्रयास में डॉ. श्रेयक गर्ग ने उन सभी कमियों को दूर किया जो पिछले साल रह गई थीं. उन्होंने ‘मेडिकल साइंस’ को अपना वैकल्पिक विषय बनाया और उत्तर लेखन पर दिन-रात काम किया. उनकी मेहनत रंग लाई और UPSC 2024 के परिणामों में वे 35वीं रैंक के साथ टॉपर लिस्ट में शामिल हुए. ऑल इंडिया रैंक 35 होने का मतलब था कि वे आसानी से आईएएस अफसर बन सकते थे. लेकिन श्रेयक का विजन ग्लोबल था. वे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की साख मजबूत करना चाहते थे. इसीलिए उन्होंने आईएएस अफसर के बजाय आईएफएस अफसर बनना चुना.

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