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Ambala News: अंबाला के एडवोकेट पुनीत कवि उड़ान एनजीओ के जरिए 66 बेटियों की पढ़ाई और 27 की शादी का खर्च उठा चुके हैं, यमुनानगर में भी बेटियों को सपनों की उड़ान दे रहे हैं.अंबाला के एडवोकेट पुनीत कवि उड़ान नाम से एनजीओ चलाकर बेटियों को सपनों की उड़ान दे रहे हैं.
अंबाला. आज के दौर में बेटियां देश-विदेश में हर क्षेत्र में चमक रही हैं, लेकिन अनेक गरीब परिवार आर्थिक तंगी के कारण आज भी अपनी उन बेटियों को पढ़ा नहीं पाते हैं. ऐसे परिवारों की उम्मीद बने हैं अंबाला के एडवोकेट पुनीत कवि. जो उड़ान नाम से एनजीओ चलाकर बेटियों को सपनों की उड़ान दे रहे हैं. 2013 में शुरू हुई इस पहल के तहत वे कई बेटियों को अडॉप्ट कर उनकी पढ़ाई का खर्च उठाते हैं और कई गरीब परिवारों की बेटियों की शादी भी करवा चुके हैं.
एडवोकेट पुनीत कवि ने लोकल 18 को बताया कि साल 2009 में उन्होंने समाजिक कार्यों शुरुआत शुरू की थी. उन्होंने बताया कि इस दौरान जब वह अपने आसपास के क्षेत्र में लोगों की समस्या को जानने के लिए जाया करते थे तो अक्सर देखा करते थे कि जिन गरीब परिवारों में दो से अधिक बेटियां है.उन परिवारों में गरीबी के चलते या तो वह बेटियां पढ़ाई से वांछित रह जाती है या फिर वह बचपन से ही अनपढ़ रहने के कारण लोगों के घरों के काम करने की मजबूर हो जाती है.
उन्होंने कहा कि इसी के चलते उड़ान एनजीओ की साल 2013 में उन्होंने अपने इस एनजीओ के जरिए सात बेटियों को एडॉप्ट किया. उन्होंने बताया कि अभी तक 66 बेटियों को अडॉप्ट करके उनकी पढ़ाई का खर्च उठाया जा रहा है. वह 27 गरीब परिवारों की बेटियों की शादी भी करवाई है.
उन्होंने बताया कि उड़ान एनजीओ जरूरतमंद परिवारों की बेटियों को अडॉप्ट करता है, जिसमें वह उनकी पढ़ाई और बालिग होने पर उनकी शादी का खर्चा उठाता है. वह अंबाला के साथ-साथ यमुनानगर में भी कई बेटियों की पढ़ाई का खर्चा उठा रहे हैं और उनसे जितना हो पाता वह बेटियों के सपने को उड़ान देने का काम करते हैं. उन्होंने बताया जब वह किसी गरीब परिवार के पास जाते हैं तो उनके माता पिता के चेहरे पर एक खुशी होती है कि उनकी बेटी अब अपने सपनों की उड़ान को भर पाएगी.उन्होंने कहा कि इसके साथ ही कोई भी गरीब परिवार जब उनसे बेटी की शादी के लिए मदद मांगता है तो वह उनकी पूरी सहायता करते है. इसमें उनकी टीम लड़की के जन्म प्रमाण पत्र के साथ-साथ जरूरी दस्तावेज ओर लड़के के जरूरी दस्तावेज की जांच करते हैं.
उन्होंने बताया कि उनके पिता ने गांव के कई लोगों को साथ लेकर खुद मजदूरी करते हुए पुराने समय में स्कूल के हॉल का निर्माण भी करवाया था. उन्होंने बताया कि एनजीओ का उद्देश्य है कि आज के समय में बेटियां अपने आप को किसी भी कारण कमजोर ना समझें और वह उभर कर आगे आएंगे.
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Vinod Kumar Katwal, a Season journalist with 14 years of experience across print and digital media. I have worked with some of India’s most respected news organizations, including Dainik Bhaskar, IANS, Punjab K…और पढ़ें
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