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Faridabad News: हरियाणा की स्नेहा दहिया ने कुश्ती में कमाल दिखाया है. 20 साल की उम्र में नेशनल और एशियन गोल्ड जीतकर अब इंटरनेशनल में देश का नाम रोशन करने की तैयारी कर रही हैं. परिवार और अनुशासन के साथ पढ़ाई-खेल संतुलित कर, स्नेहा हौंसले की मिसाल हैं.
फरीदाबाद: हरियाणा में एक कहावत खूब सुनी जाती है.हमारी छोरियां भी छोरो से कम नहीं. यह बात सिर्फ कहने भर की नहीं बल्कि हरियाणा की बेटियां मैदान में उतरकर सच साबित कर रही हैं. ऐसी ही एक बेटी है स्नेहा दहिया, जिसने अपने दम पर न सिर्फ अपने परिवार का गर्व बढ़ाया है बल्कि पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है. कुश्ती के दांव–पेंच सीखने वाली स्नेहा आज इंटरनेशनल लेवल की खिलाड़ी है और देश के लिए कई गोल्ड जीत चुकी है.
Local18 से बातचीत में स्नेहा दहिया ने बताया कि हाल ही में विशाखापट्टनम में हुई नेशनल रेसलिंग चैंपियनशिप में उन्होंने गोल्ड मेडल जीता है. इस जीत के बाद अब उनका अगला लक्ष्य इंटरनेशनल में खेलने का है जिसके लिए मार्च में होने वाली प्रतियोगिता की तैयारी कर रही हैं. स्नेहा ने बताया कि उन्होंने कुश्ती की शुरुआत सिर्फ 4 साल पहले की थी और इस दौरान उन्हें पैर में कई बार चोट भी लगी, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी. उन्होंने सबसे पहले स्टेट लेवल पर गोल्ड जीता फिर अयोध्या में खेले और उसके बाद एशिया कैंप में हिस्सा लिया. एशियन में भी उन्होंने गोल्ड जीता और वहीं से उनका चयन वर्ल्ड के लिए हुआ है जो 2026 में सितंबर में होगा.
स्नेहा पीछे से सोनीपत की रहने वाली हैं, लेकिन इस समय फरीदाबाद में रहकर ट्रेनिंग करती हैं. वह फिलहाल एमडीयू यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ आर्ट्स फाइनल ईयर की छात्रा हैं. कुश्ती में आने की प्रेरणा उन्हें बचपन से ही घर के माहौल से मिली. स्नेहा ने बताया कि उनके नाना जगरूप राठी और मौसी नेहा राठी दोनों इंटरनेशनल स्तर पर खेल चुके हैं. बचपन से ही स्नेहा ने अपने नाना को अखाड़े में कुश्ती करते देखा और वहीं से उनका मन भी कुश्ती की तरफ खिंच गया. आज उनके कोच भी यही दोनों हैं और फरीदाबाद में चल रही श्री जगरूप राठी इंटरनेशनल रेसलिंग एकेडमी में ही वह रोज ट्रेनिंग करती हैं.
मौसी नेहा राठी भी बच्चों को सिखाती है कुश्ती
इस एकेडमी की खास बात यह है कि यहीं पर स्नेहा की मौसी नेहा राठी भी बच्चों को कुश्ती सिखाती हैं. नेहा राठी इंटरनेशनल बॉक्सर रह चुकी हैं और खेल कोटे से पुलिस विभाग में इंस्पेक्टर हैं. वहीं स्नेहा के नाना जगरूप राठी भी खेल कोटे से पुलिस में भर्ती हुए थे. परिवार में खेल का ऐसा माहौल होने की वजह से स्नेहा को कभी किसी दूसरे गेम में जाने का मन ही नहीं हुआ. उन्होंने बताया कि जब से होश संभाला है बस कुश्ती ही देखी है और उसी में करियर बनाने का सपना देखा है.
सुबह 2 घंटे और शाम 2 घंटे ट्रेनिंग
स्नेहा का परिवार उन्हें हर कदम पर सपोर्ट करता है. स्नेहा ने बताया पहला गोल्ड मेडल जीतकर लौटीं तो घर में खुशी का माहौल था और सबकी उम्मीदें और बढ़ गईं. उनके पापा बिजनेसमैन हैं और मम्मी हाउसवाइफ. उनकी एक छोटी बहन भी है जो पढ़ाई कर रही है. स्नेहा पढ़ाई और कुश्ती दोनों को साथ लेकर चलती हैं. सुबह 2 घंटे और शाम 2 घंटे ट्रेनिंग करती हैं. परीक्षा के समय वह एक टाइम की कुश्ती छोड़ देती हैं और पढ़ाई पर फोकस करती हैं ताकि दोनों तरफ से संतुलन बना रहे. खाने-पीने को लेकर भी वह काफी अनुशासित हैं. उन्होंने बताया कि वह पूरी तरह शाकाहारी हैं बाहर का खाना बहुत कम खाती हैं और ज्यादा से ज्यादा देसी घर का खाना ही पसंद करती हैं ताकि फिटनेस बनी रहे और चोटों से बचा जा सके. स्नेहा ने बताया कि पहले काफी चोटें लगी हैं इसलिए अब कोशिश यही रहती है कि खेल में ध्यान देने के साथ-साथ चोट से भी बचें. स्नेहा दहिया आज सिर्फ 20 साल की हैं लेकिन कम उम्र में ही उन्होंने वो कर दिखाया है जो कई लोग सपने में सोचते हैं. उनका लक्ष्य साफ है इंटरनेशनल में देश का नाम चमकाना और आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनना है.
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Vinod Kumar Katwal, a Season journalist with 14 years of experience across print and digital media. I have worked with some of India’s most respected news organizations, including Dainik Bhaskar, IANS, Punjab K…और पढ़ें
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