फिजिकल हेल्थ- फास्टफूड खाने से लड़की की मौत: जंक फूड से ब्रेन, लिवर होता डैमेज, फाइबर वाले फल-सब्जी खाएं, हेल्दी रहें Health Updates

[ad_1]

15 मिनट पहलेलेखक: गौरव तिवारी

  • कॉपी लिंक

यूपी के अमरोहा में 11वीं की छात्रा की ज्यादा फास्टफूड खाने से मौत हो गई। दिल्ली AIIMS में उसका इलाज चल रहा था। डॉक्टर ने बताया कि ज्यादा फास्टफूड खाने से लड़की की आंतें आपस में चिपक गई थीं। पाचन तंत्र पूरी तरह से डैमेज हो गया था।

फूड यानी भोजन क्या है? यह एक तरह का ईंधन है। हमारा शरीर एक उन्नत मशीन की तरह है। इसे भी इंजन की तरह अच्छे से काम करने के लिए ईंधन चाहिए।

अब फर्ज करिए कि कोई कार के इंजन में पानी मिला पेट्रोल-डीजल डाले तो क्या होगा? इंजन खराब होता जाएगा और एक दिन काम करना बंद कर देगा।

इसी तरह फास्टफूड शरीर के लिए मिलावटी ईंधन है। यह धीरे-धीरे शरीर को डैमेज कर रहा है। अगर लगातार फास्टफूड खाते रहे तो एक दिन शरीर भी काम करना बंद कर देगा।

आज फिजिकल हेल्थ कॉलम में समझेंगे कि फास्ट फूड खाने से शरीर में क्या होता है। साथ ही जानेंगे कि-

  • इससे बॉडी ऑर्गन्स पर क्या असर होता है?
  • सब्जियां खाने से क्या होता है?

फास्ट फूड में होता क्या है?

ज्यादातर फास्टफूड मैदे से बने होते हैं। इसमें ढेर सारा नमक, ऐडेड शुगर और पाम ऑयल होता है। ये चीजें खाने में स्वादिष्ट लगती हैं, लेकिन इनमें न के बराबर न्यूट्रिशन होता है।

फास्टफूड खाने से शरीर पर क्या असर होता है?

फास्टफूड में रिफाइंड कार्ब, खूब सारा ऐडेड शुगर, नमक और खराब फैट होते हैं। जबकि फाइबर, विटामिन और मिनरल्स न के बराबर होते हैं। इसलिए यह खाना छोटी आंत में जल्दी पच जाता है और तुरंत दिमाग को खुशी वाला सिग्नल देता है। इससे हमें अच्छा महसूस होता है, लेकिन ब्लड शुगर तेजी से बढ़ जाता है। इसे कंट्रोल करने के लिए पैंक्रियाज ज्यादा इंसुलिन रिलीज करता है। वहीं बड़ी आंत के हेल्दी बैक्टीरिया फाइबर के इंतजार में भूखे रह जाते हैं। इससे पाचन खराब होता है, वजन बढ़ता है और डायबिटीज, फैटी लिवर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

ये किस ऑर्गन पर कैसे असर करता है?

  • फास्टफूड दिमाग में बार-बार खाने की क्रेविंग बढ़ाता है।
  • इसोफेगस में एसिडिटी और जलन पैदा करता है।
  • पैंक्रियाज पर ज्यादा इंसुलिन रिलीज करने का दबाव बढ़ाता है।
  • लिवर में फैट जमा करता है।
  • बड़ी आंत के अच्छे बैक्टीरिया भूखे रह जाते हैं।
  • किडनी पर नमक का बोझ बढ़ता है।

फास्टफूड खाने से किस अंग पर क्या असर होता है, एक-एक करके विस्तार से जानते हैं-

ब्रेन पर क्या असर होता है?

जब हम फास्टफूड खाते हैं, तो हमें खुशी का एहसास होता है। ज्यादा शुगर, नमक और फैट मिलते ही दिमाग में डोपामिन तेजी से रिलीज होता है। ब्रेन को लगता है कि उसे कोई इनाम मिल गया है। यही वजह है कि बार-बार वही खाना खाने का मन करता है। लेकिन यह खुशी थोड़ी देर की होती है।

इसोफेगस पर क्या असर होता है?

फास्टफूड इसोफेगस यानी फूड पाइप को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता है।

  • इसमें मौजूद ज्यादा फैट और मसाले पेट में एसिड बढ़ाते हैं। जब यह एसिड ऊपर की ओर लौटता है, तो इसोफेगस में जलन और सीने में जलती हुई आग जैसा एहसास होता है। इसे एसिड रिफ्लक्स कहते हैं।
  • बार-बार ऐसा होने पर इसोफेगस की अंदरूनी परत कमजोर होने लगती है।
  • धीरे-धीरे निगलने में परेशानी, खट्टी डकारें और सीने में भारीपन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

पैंक्रियाज पर क्या असर होता है?

फास्टफूड खाते ही पैंक्रियाज पर सबसे ज्यादा काम का दबाव पड़ता है।

  • इसमें मौजूद रिफाइंड कार्ब और शुगर खून में तेजी से घुल जाते हैं, जिससे ब्लड शुगर अचानक बढ़ता है।
  • इसे कंट्रोल करने के लिए पैंक्रियाज को बार-बार ज्यादा इंसुलिन रिलीज करना पड़ता है।
  • शुरू में वह संभाल लेता है, लेकिन रोज-रोज ऐसा होने पर वह थकने लगता है।
  • इंसुलिन एक तरह से शुगर पुलिस है। धीरे-धीरे शरीर इंसुलिन की बात मानना कम कर देता है, जिसे इंसुलिन रेजिस्टेंस कहते हैं।
  • यही रास्ता आगे चलकर प्रीडायबिटीज और टाइप-2 डायबिटीज की ओर जाता है।

लिवर पर क्या असर होता है?

लिवर हमारे शरीर का फिल्टर है। फास्टफूड लिवर के काम को सबसे ज्यादा बिगाड़ता है।

छोटी आंत पर क्या असर होता है?

छोटी आंत का काम है खाने से पोषण निकालना, पूरे शरीर को जरूरत के हिसाब से बांटना।

  • फास्टफूड यहां आकर बहुत जल्दी पच जाता है, क्योंकि इसमें फाइबर नहीं होता।
  • शुगर और रिफाइंड कार्ब तुरंत खून में चले जाते हैं।
  • पोषण न के बराबर मिलता है, विटामिन और मिनरल्स नहीं मिल पाते हैं।
  • बार-बार ऐसा होने पर आंत की अंदरूनी परत कमजोर होने लगती है।
  • एंजाइम का संतुलन बिगड़ता है। इससे गैस, सूजन और थकान महसूस होती है।
  • इससे पेट भरा लगता है, लेकिन अंदर से पोषण की कमी बनी रहती है।

बड़ी आंत पर क्या असर होता है?

बड़ी आंत में हमारे शरीर के गुड बैक्टीरिया रहते हैं। उनका खाना फाइबर है, फास्टफूड में फाइबर नहीं होता है तो वे भूखे रह जाते हैं।

किडनी पर क्या असर होता है?

किडनी का काम है, खून को साफ करना। फास्टफूड इसमें रुकावट डालता है।

  • इसमें नमक बहुत ज्यादा होता है।
  • ज्यादा नमक से शरीर में पानी रुकने लगता है।
  • इससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है।
  • किडनी को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।
  • फास्टफूड में मौजूद फॉस्फेट और प्रिजर्वेटिव्स किडनी पर दबाव बढ़ाते हैं।
  • धीरे-धीरे फिल्टर करने की क्षमता कमजोर होने लगती है।
  • पैरों और चेहरे पर सूजन दिख सकती है।
  • लंबे समय तक ऐसा चलता रहा तो किडनी डैमेज का खतरा बढ़ जाता है।

खूब सब्जियां खाने से क्या होता है?

खूब सब्जियां खाने से शरीर को फाइबर, विटामिन्स और मिनरल्स मिलते हैं। पाचन सुधरता है। इम्यूनिटी मजबूत होती है। वजन कंट्रोल में रहता है। डायबिटीज, हार्ट डिजीज और पेट की बीमारियों का खतरा घटता है।

ब्रेन

ब्रेन को पालक और ब्रॉकली पसंद हैं। इनमें फोलेट, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। ये दिमाग को धीरे-धीरे एनर्जी देते हैं। शुगर स्पाइक नहीं होता। न्यूरॉन्स सुरक्षित रहते हैं। याददाश्त और फोकस बेहतर रहता है। ब्रेन शांत होकर काम करता है।

इसोफेगस

इसोफेगस के लिए लौकी और तोरई अच्छी हैं। इनमें पानी और फाइबर ज्यादा होता है। ये पेट के एसिड को माइल्ड करते हैं। जलन कम होती है। सूजन घटती है। फूड पाइप सुरक्षित रहता है।

पैंक्रियाज

पैंक्रियाज को करेला और गाजर सूट करते हैं। इनमें फाइबर और फाइटोन्यूट्रिएंट्स होते हैं। शुगर धीरे खून में जाती है। इंसुलिन अचानक ज्यादा नहीं बनती। पैंक्रियाज को आराम मिलता है।

लिवर

लिवर के लिए चुकंदर और पालक जरूरी हैं। इनमें एंटीऑक्सीडेंट और नाइट्रेट होते हैं। ये लिवर की कोशिकाओं को बचाते हैं। फैट कम जमा होता है। डिटॉक्स एंजाइम अच्छे से काम करते हैं।

छोटी आंत

छोटी आंत को गाजर और बीन्स पसंद हैं। इनमें घुलनशील फाइबर होता है। पाचन धीमा रहता है। पोषक तत्व अच्छे से吸शोषित होते हैं। आंत की परत मजबूत बनी रहती है।

बड़ी आंत

बड़ी आंत के लिए भिंडी और पत्तागोभी फायदेमंद हैं। इनमें प्रीबायोटिक फाइबर होता है। अच्छे बैक्टीरिया बढ़ते हैं। सूजन कम होती है। गट हेल्थ बेहतर रहती है।

किडनी

किडनी को लौकी और खीरा पसंद हैं। इनमें पानी और पोटेशियम संतुलित होता है। सोडियम का असर कम पड़ता है। ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है। किडनी आराम से फिल्टर करती है।

………………

ये खबर भी पढ़िए

फिजिकल हेल्थ- आंखें बतातीं सेहत का हाल: डॉक्टर से जानें आंखों में सूजन, पीलापन या उभार किस बीमारी का संकेत, 11 आई केयर टिप्स

आंखों का रंग बदलना, धुंधलापन, उनका बार-बार फड़कना या मैल बढ़ना। ये सभी संकेत बता सकते हैं कि शरीर में कहां पर क्या समस्या चल रही है। कई बार ये लक्षण डायबिटीज, थायरॉइड, लिवर या नर्वस सिस्टम से जुड़ी बीमारियों का शुरुआती संकेत होते हैं। आगे पढ़िए…

खबरें और भी हैं…

[ad_2]
फिजिकल हेल्थ- फास्टफूड खाने से लड़की की मौत: जंक फूड से ब्रेन, लिवर होता डैमेज, फाइबर वाले फल-सब्जी खाएं, हेल्दी रहें