बिस्तर से अचानक गिर जाए न्यू बॉर्न बेबी तो क्या करें? डॉक्टर से समझें लाइफ सेविंग टिप्स Health Updates

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Newborn Fall Prevention Tips: जब आप एक नवजात बच्चे की देखभाल कर रहे होते हैं, तो जिंदगी अचानक बहुत सतर्क हो जाती है. बच्चे के छोटे-छोटे हिलने-डुलने, हाथ-पैर चलाने और पलटने की कोशिशें कई बार ऐसे हादसों का कारण बन सकती हैं, जिनकी कल्पना भी डराने वाली होती है. अक्सर माता-पिता बच्चे को कुछ पल के लिए बिस्तर पर लिटा देते हैं, यह सोचकर कि वह अभी पलटेगा नहीं, लेकिन कई बार यही लापरवाही भारी पड़ जाती है और बच्चा अचानक नीचे गिर जाता है. ऐसे हालात में घबराना स्वाभाविक है, लेकिन सही जानकारी और समय पर लिया गया फैसला बच्चे की जान बचा सकता है. चलिए आपको बताते हैं कि क्या करना चाहिए. 

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

पटना स्थित ऑरो सुपर स्पेशलिटी क्लीनिक की डॉक्टर दीपा सिंह बताती हैं कि “अगर नवजात बिस्तर से गिर जाए, तो सबसे पहले खुद को शांत रखना बेहद जरूरी है. घबराहट में की गई जल्दबाज़ी नुकसान पहुंचा सकती है. बच्चे को तुरंत उठाने से पहले देखें कि वह रो रहा है या शांत है, सांस सामान्य है या नहीं और शरीर में कोई असामान्य हरकत तो नहीं हो रही. अगर बच्चा बेहोश हो, सुस्त पड़ा हो, सिर से खून आ रहा हो या झटके जैसा कुछ महसूस हो, तो यह मेडिकल इमरजेंसी मानी जाती है. ऐसी स्थिति में तुरंत नजदीकी अस्पताल या इमरजेंसी सेवा से संपर्क करना चाहिए.”

वे आगे कहती हैं कि यदि बच्चा होश में है और गंभीर चोट के लक्षण नजर नहीं आते, तो उसे धीरे से गोद में लेकर सांत्वना दें. बच्चे का रोना अक्सर डर और झटके की वजह से होता है उसे शांत करते समय उसके सिर, गर्दन, हाथ-पैर और शरीर के दूसरे हिस्सों को ध्यान से देखें, किसी जगह सूजन, नीला निशान या दर्द की प्रतिक्रिया तो नहीं है, इस पर नजर रखें. अगर कहीं से खून निकल रहा हो, तो साफ कपड़े या गॉज से हल्का दबाव डालें, लेकिन ज्यादा जोर न लगाएं.

इन बातों का रखना चाहिए ध्यान

डॉक्टरों के मुताबिक, एक साल से कम उम्र के बच्चे के गिरने के बाद भले ही वह ठीक दिखे, फिर भी डॉक्टर को जानकारी देना जरूरी होता है. कई बार चोट के लक्षण तुरंत सामने नहीं आते. कुछ घंटों बाद बच्चे का व्यवहार बदल सकता है. जैसे जरूरत से ज्यादा नींद आना, बार-बार उल्टी होना, तेज और असामान्य तरीके से रोना, दूध पीने से मना करना या सामान्य से अलग प्रतिक्रिया देना. ऐसे किसी भी बदलाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

कुछ खास संकेत ऐसे होते हैं, जिनमें बिना देर किए इमरजेंसी रूम जाना जरूरी हो जाता है. जैसे सिर के आगे वाले नरम हिस्से में उभार दिखना, नाक या कान से खून या पीला तरल निकलना, आंखों की पुतलियों का बराबर न होना, रोशनी या आवाज से असहज होना या बच्चे का संतुलन बिगड़ना. ये लक्षण अंदरूनी चोट या सिर पर गंभीर असर की ओर इशारा कर सकते हैं.

काफी महत्वपूर्ण होते हैं 24 घंटे

गिरने के बाद अगले 24 घंटे बच्चे के लिए सबसे अहम होते हैं. डॉक्टर की सलाह के अनुसार बच्चे को आराम करने देना चाहिए, लेकिन जरूरत पड़ने पर बीच-बीच में हल्के से जांच भी करते रहना चाहिए. अगर बच्चा सामान्य तरीके से सांस ले रहा है और ठीक से प्रतिक्रिया दे रहा है, तो उसे सोने दिया जा सकता है. हालांकि, अगर उसे जगाने में परेशानी हो या वह बिल्कुल प्रतिक्रिया न दे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. इस दौरान बच्चे को जोरदार खेल, उछल-कूद या किसी भी तरह की गतिविधि से दूर रखना चाहिए. शांत खेल, गोद में लेकर कहानी सुनाना या स्ट्रॉलर पर हल्की सैर जैसी चीजें सुरक्षित मानी जाती हैं. अगर बच्चा डे-केयर जाता है, तो वहां के स्टाफ को गिरने की जानकारी जरूर दें, ताकि वे अतिरिक्त सतर्कता बरत सकें.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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