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Vehicle to Vehicle Communication: भारत में सड़क सुरक्षा को नई ऊंचाई देने की दिशा में सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है. इसके तहत Vehicle-to-Vehicle (V2V) कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी को देशभर में लागू करने की तैयारी है. यह तकनीक बिना मोबाइल नेटवर्क या इंटरनेट के भी काम करेगी और एक वाहन को दूसरे वाहन से सीधे जोड़कर ड्राइवर्स को रियल-टाइम सेफ्टी अलर्ट देगी. इसका मकसद सड़क पर होने वाली अचानक गलतियों और हादसों को पहले ही रोकना है.
खराब मौसम और लंबी यात्राओं में बनेगा ड्राइवर्स का सहारा
यह नई तकनीक खास तौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद साबित होगी जो लंबे सफर करते हैं या खराब मौसम में गाड़ी चलाते हैं. घना कोहरा, स्मॉग, तेज बारिश या रात के समय कम विजिबिलिटी इन सभी हालातों में V2V सिस्टम ड्राइवर्स को समय रहते चेतावनी देकर हजारों हादसों को टाल सकता है. इससे न सिर्फ जानमाल की सुरक्षा बढ़ेगी बल्कि परिवारों को भी राहत मिलेगी.
क्या है Vehicle-to-Vehicle (V2V) टेक्नोलॉजी?
V2V एक आधुनिक कम्युनिकेशन सिस्टम है, जिसमें सड़क पर चल रहे वाहन आपस में जानकारी साझा करते हैं. इसमें गाड़ी की स्पीड, दिशा, दूरी और अचानक ब्रेक जैसी अहम जानकारियां दूसरे वाहनों तक तुरंत पहुंच जाती हैं. इससे ड्राइवर को संभावित खतरे का अंदाजा पहले ही लग जाता है और वह समय पर सही फैसला ले सकता है.
बिना नेटवर्क भी करेगा काम, कैसे?
इस टेक्नोलॉजी को एक्टिवेट करने के लिए वाहन में एक छोटा सा डिवाइस लगाया जाएगा, जो देखने में सिम कार्ड जैसा हो सकता है. यह डिवाइस आसपास मौजूद वाहनों से लगातार सिग्नल भेजेगा और प्राप्त करेगा. चूंकि यह सिस्टम मोबाइल नेटवर्क या इंटरनेट पर निर्भर नहीं है इसलिए दूरदराज और नेटवर्क-फ्री इलाकों में भी भरोसेमंद तरीके से काम करेगा.
भारत में हादसे कैसे कम करेगा V2V सिस्टम?
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी पहले ही इस तकनीक के फायदों पर जोर दे चुके हैं. उनके मुताबिक, V2V से पीछे से होने वाली तेज रफ्तार टक्करों, सड़क किनारे खड़े वाहनों से टकराने और कोहरे के कारण होने वाले मल्टी-व्हीकल एक्सीडेंट्स में बड़ी कमी आएगी. सर्दियों में हाईवे पर होने वाले जानलेवा हादसों को रोकने में यह सिस्टम अहम भूमिका निभाएगा.
हर दिशा से रियल-टाइम अलर्ट मिलेगा ड्राइवर को
V2V की सबसे बड़ी खासियत इसका 360-डिग्री कम्युनिकेशन है. चलती गाड़ी को आगे, पीछे और दोनों साइड से आने वाले वाहनों की जानकारी मिलती रहेगी. यह सिस्टम सुरक्षित दूरी बनाए रखने, पास की गाड़ी के अचानक ब्रेक लगाने, सड़क पर खड़े वाहन और पीछे से तेज रफ्तार में आती ट्रैफिक जैसी स्थितियों के लिए पहले ही अलर्ट देगा. हाईवे और भीड़भाड़ वाले शहरों में यह फीचर बेहद कारगर साबित होगा.
ADAS के साथ मिलकर बनेगी डबल सेफ्टी शील्ड
V2V टेक्नोलॉजी को Advanced Driver Assistance Systems (ADAS) के साथ जोड़ा जाएगा. कई प्रीमियम कारों और SUVs में पहले से कैमरा और सेंसर आधारित सेफ्टी फीचर्स मौजूद हैं. V2V इन सिस्टम्स के ऊपर एक अतिरिक्त सुरक्षा परत जोड़ेगा, जिससे वाहन सिर्फ खुद नहीं बल्कि आसपास की गाड़ियों से भी समझदारी से संवाद कर सकेंगे.
कब तक लागू होगी यह नई तकनीक?
सड़क परिवहन मंत्रालय के अनुसार, V2V टेक्नोलॉजी को 2026 के अंत तक चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना है. शुरुआती दौर में यह सिस्टम नए वाहनों में दिया जाएगा, इसके बाद धीरे-धीरे अन्य कैटेगरी की गाड़ियों में भी इसे शामिल किया जाएगा. इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 5,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है हालांकि ग्राहकों के लिए कीमत को लेकर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है.
V2V के साथ और भी बढ़ेगी सड़क सुरक्षा
सरकार केवल V2V तक सीमित नहीं है. बसों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए भी कई कदम उठाए जा रहे हैं. मौजूदा बसों में फायर एक्सटिंग्विशर, इमरजेंसी हैमर और ड्राइवर की थकान पहचानने वाले सिस्टम लगाए जाएंगे. यह फैसले पुराने हादसों और खराब डिजाइन से जुड़ी चिंताओं को ध्यान में रखकर लिए जा रहे हैं.
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