वेनेजुएला में अमेरिकी एक्शन से कनाडाई एक्सपर्ट्स परेशान: कनाडा पर भी मिलिट्री प्रेशर की आशंका; ट्रम्प का कनाडा को US स्टेट बनने का ऑफर Today World News

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वॉशिंगटन डीसी5 मिनट पहले

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AI जनरेटेड तस्वीर।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की वेनेजुएला में हालिया कार्रवाइयों के बाद कनाडा में भी डर और चिंता का माहौल है। अमेरिकी सेना हाल ही में वेनेजुएला में घुसकर उसके राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़कर न्यूयॉर्क ले आई थी। इस बीच ट्रम्प के पुराने बयान और धमकियां फिर चर्चा आ गईं जो उन्होंने कनाडा को 51वां अमेरिकी राज्य बनाने के लिए दी थीं।

कनाडा के अखबार द ग्लोब एंड मेल में छपे एक लेख में कहा गया है कि कनाडाई लोगों को इस बात को गंभीरता से लेना चाहिए कि ट्रम्प उनके देश के खिलाफ भी मिलिट्री प्रेशर का इस्तेमाल कर सकते हैं।

इस लेख के लेखक और कनाडाई प्रोफेसर थॉमस होमर-डिक्सन ने कहा कि अगर कनाडा के खिलाफ किसी तरह का सैन्य दबाव डाला जाता है, तो यह साफ होना चाहिए कि इसकी कीमत बहुत भारी होगी।

एक्सपर्ट्स बोले- कनाडा खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा

कनाडा की तरह ही ट्रम्प ग्रीनलैंड को भी अमेरिका में मिलाना चाहते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ग्रीनलैंड और कनाडा में कई समानताएं हैं। दोनों लोकतांत्रिक हैं, आर्कटिक इलाके में स्थित हैं और NATO जैसे सुरक्षा संगठन का हिस्सा हैं, जिस पर ट्रम्प अपना दबदबा बनाना चाहते हैं। इसी वजह से कनाडा खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है।

कनाडा सरकार को सुरक्षा मामलों में सलाह दे चुके वेस्ली वार्क ने कहा कि ओटावा के कई अधिकारी अब भी यह मानने को तैयार नहीं हैं कि हालात इतने बदल चुके हैं। वेस्ली के मुताबिक, वेनेजुएला और ग्रीनलैंड को लेकर ट्रम्प के कदम कनाडा के लिए आखिरी चेतावनी हैं। ये दिखाते हैं कि अमेरिका अब वैसा देश नहीं रहा जैसा पहले हुआ करता था।

कनाडा अपनी निर्भरता अमेरिका पर कम कर रहा

इस बीच कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने सत्ता में आने के बाद से ही अमेरिका पर निर्भरता कम करने की कोशिशें शुरू कर दी थी। वे अब चीन के साथ व्यापार बढ़ाने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। हाल ही में कार्नी ने कहा कि ग्रीनलैंड और डेनमार्क की संप्रभुता का सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन उन्होंने ट्रम्प की कनाडा से जुड़ी पुरानी धमकियों पर कोई टिप्पणी नहीं की।

कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका की तरफ से कनाडा पर सीधा सैन्य हमला होना मुश्किल है, लेकिन आर्थिक दबाव डाला जा सकता है। कार्लेटन यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर स्टेफनी कार्विन ने कहा कि अमेरिका अब पहले से ज्यादा आसानी से कनाडा की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकता है, अगर ऐसा करना राष्ट्रपति की इच्छा के मुताबिक हो।

उन्होंने कहा कि वेनेजुएला के तेल संसाधनों पर ट्रम्प के दबदबे के बाद यह साफ है कि अमेरिका पश्चिमी गोलार्ध में अपना वर्चस्व बढ़ाने के लिए ज्यादा आक्रामक हो सकता है।

अमेरिका मदद के बदले कनाडा पर दबाव डाल सकता है

कार्लेटन यूनिवर्सिटी के ही प्रोफेसर फिलिप लागासे ने एक और आशंका जताई। उनके मुताबिक, अगर कनाडा किसी बड़ी आपदा या ऐसे हालात में अमेरिका पर निर्भर होता है जिसे वह खुद संभाल नहीं सकता, तो मौजूदा अमेरिकी प्रशासन मदद के बदले शर्तें रख सकता है। यह भी संभव है कि अमेरिका मदद करने के बाद वहां से हटने से इनकार कर दे या बदले में मांगें रखे।

इसके अलावा अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा व्यापार समझौते की समीक्षा भी ट्रम्प का ध्यान फिर से कनाडा की ओर खींच सकती है। यह समझौता ट्रम्प के पहले कार्यकाल में हुआ था और अब इसकी समीक्षा होनी है। इस दौरान अमेरिका, कनाडा पर आर्थिक दबाव बना सकता है।

फिलहाल कनाडा अपने करीब 70% निर्यात के लिए अमेरिका पर निर्भर है। मौजूदा समझौते के तहत दोनों देशों के बीच करीब 85% व्यापार बिना किसी टैरिफ के होता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर ट्रम्प ने इस छूट को खत्म करने की धमकी भी दी, तो इससे कनाडा की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हो सकता है।

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