Stock Market News: भारतीय शेयर बाजार में पिछले पांच कारोबारी सत्रों से लगातार दबाव देखने को मिल रहा है. वैश्विक व्यापार को लेकर बढ़ती अनिश्चितता, वाशिंगटन में बदलते राजनीतिक घटनाक्रम और भू-राजनीतिक तनावों ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को कमजोर कर दिया है. इसका असर यह रहा कि बीएसई सेंसेक्स पिछले पांच दिनों में 2,100 अंकों से अधिक टूट गया. 2 जनवरी को जहां सेंसेक्स 85,762.01 के स्तर पर बंद हुआ था, वहीं शुक्रवार को इंट्रा-डे में यह फिसलकर 83,506.79 तक आ गया. इसी तरह निफ्टी भी दबाव में आकर 25,700 के नीचे खिसक गया.
1- विदेशी निवेशकों की जबरदस्त बिकवाली
इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली रही है. वैश्विक अनिश्चितता और उभरते बाजारों से पूंजी निकालने के रुझान के बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 8 जनवरी को अकेले 3,367.12 करोड़ रुपये के शेयर बेच डाले. लगातार हो रही इस निकासी ने घरेलू निवेशकों की धारणा को भी कमजोर किया और बाजार पर दबाव बढ़ता चला गया.
2- ट्रंप का ट्रेड और टैरिफ अनिश्चितता
दूसरा बड़ा कारण अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ट्रेड और टैरिफ से जुड़ी अनिश्चित बयानबाजी है. रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत समेत कई देशों पर सख्त रुख अपनाने की चेतावनी ने निवेशकों को चिंतित कर दिया है. अमेरिका में एक नए बिल की चर्चा है, जिसके तहत रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है. इस तरह की आशंकाओं ने वैश्विक बाजारों के साथ-साथ भारतीय शेयर बाजार में भी डर का माहौल पैदा किया है.
3- भारत-अमेरिका के बीच नतीजा वार्ता
इसके अलावा भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में ठोस नतीजे न निकल पाना भी बाजार की कमजोरी की एक अहम वजह है. मार्च से अब तक करीब छह दौर की बातचीत के बावजूद दोनों देशों के बीच किसी ठोस समझौते पर सहमति नहीं बन सकी है. पहले ही ट्रंप प्रशासन भारत पर कुल 50 प्रतिशत टैरिफ लगा चुका है, जिसमें 25 प्रतिशत बेस टैरिफ और 25 प्रतिशत जुर्माने के रूप में शामिल है. भारत ने इसे अनुचित बताया था, लेकिन समाधान न निकलने से निवेशकों की चिंता बनी हुई है.
4- तेल की कीमतों से तनाव
तेल की कीमतों में बढ़ता तनाव भी बाजार के लिए नकारात्मक साबित हुआ है. रूस से सस्ते तेल की आपूर्ति पर अनिश्चितता और आयात पर भारी निर्भरता के चलते निवेशक वेनेजुएला में जारी घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई और चालू खाता घाटे पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है, जो शेयर बाजार के लिए जोखिम पैदा करती है.
5-गिरता रुपया
इन सबके बीच भारतीय रुपये की कमजोरी ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. पिछले साल करीब 4 प्रतिशत टूटने के बाद रुपया अब डॉलर के मुकाबले 91 के स्तर को पार कर चुका है. भारतीय रिजर्व बैंक के सीमित हस्तक्षेप के बावजूद मुद्रा में जारी गिरावट ने विदेशी पूंजी के प्रवाह और बाजार की स्थिरता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. इन तमाम कारकों के चलते फिलहाल भारतीय शेयर बाजार में दबाव का माहौल बना हुआ है और निवेशक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं.
डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)
Source: https://www.abplive.com/business/sensex-falls-2000-points-last-five-days-while-nifty-falls-2-percent-know-five-reasons-3071665




