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कुरुक्षेत्र। करोड़ों के धान घोटाले पर 39 मंडी सचिव व अन्य अधिकारियों को चार्जशीट किया गया है और पूरे मामले की गहराई से जांच के लिए खाद्य एवं पूर्ति विभाग के प्रधान सचिव डी सुरेश को फील्ड में उतारा है।
हकीकत में यह घोटाला कितना बड़ा है, यह अभी सरकार की ओर से पूरी तरह स्पष्ट नहीं किया गया है लेकिन भारतीय किसान यूनियन के अनुसार यह पांच हजार करोड़ से भी अधिक का घोटाला है।
इसके लिए भाकियू ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर अवगत कराते हुए सीबीआई जांच की मांग उठाई है और इसके पूरा न होने पर हाईकोर्ट का रुख करने का भी मन बनाया है। सरकार ने 39 मंडी सचिवों पर कार्रवाई की लेकिन भाकियू इसे नाकाफी मान रही है। भाकियू अध्यक्ष गुरनाम चढूनी ने रविवार को ही किसानों से ऑनलाइन चर्चा में इस कार्रवाई पर सवाल उठाए और प्रदेश प्रवक्ता राकेश बैंस ने भी इसे बड़े अधिकारियों व अन्य लोगों को बचाने का प्रयास करार दिया है। भाकियू इसे किसानों की मेहनत व अधिकारों का उल्लंघन मान रही है और केंद्र व प्रदेश सरकार को भी बड़ा राजस्व नुकसान करार दे रही है।
भाकियू ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में उठाए सवाल
– मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर 4,83,897 किसानों ने 28,80,192 एकड़ गैर-बासमती धान पंजीकृत की, परंतु कृषि विभाग ने 30,16,285 एकड़ भूमि वेरिफाई की। ऐसे में 1,36,116 एकड़ अधिक रकबा कैसे दर्शाया गया। यह भूमि किसकी है, कहां स्थित है, किसने सत्यापित की यह स्पष्ट नहीं।
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पांच हजार करोड़ से भी ज्यादा हुआ धान घोटाला : भाकियू ने मुख्यमंत्री को भेजा पत्र


