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नरवाना। महर्षि दयानंद सरस्वती प्रवासी पक्षी संरक्षण स्थल कालवन में इस वर्ष दूर-दराज देशों से आए प्रवासी पक्षियों का आगमन शुरू हो गया है। अबकी बार शुरुआत में ही मंगोलिया से आया बार-हेडेड गूज पक्षी ज्यादा संख्या में पहुंचे हैं।
सर्दियों की शुरुआत के साथ यहां पक्षियों की चहचहाहट और उड़ानों से पूरा इलाका जीवंत हो उठा है। संरक्षण स्थल के विशेषज्ञों डॉ. टीके रॉय के अनुसार इस बार शुरुआती दिनों में ही बड़ी संख्या में बार-हेडेड गूज, नॉर्दर्न शावलर, कॉर्मोरेंट, स्पूनबिल, ब्लैक विंग्ड स्टिल्ट, एग्रेट और लैपविंग जैसी प्रजातियां पहुंच चुकी हैं।
इनके अलावा भी कई दुर्लभ प्रजातियां हर वर्ष यहां दिखाई देती हैं। यह पक्षी हजारों किलोमीटर की यात्रा तय कर भारत पहुंचते हैं और सुरक्षित वातावरण मिलने के कारण कालवन का यह क्षेत्र उनका पसंदीदा ठिकाना बन चुका है।
स्थानीय पर्यावरणविद डॉ. विजय विश्वास का कहना है कि संरक्षण स्थल का संरक्षण केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है कि वह इस प्राकृतिक धरोहर और जैव विविधता की रक्षा में अपना योगदान दे।
प्रदूषण, अवैध शिकार और जलाशयों का लगातार कम होना इन प्रवासी पक्षियों के लिए गंभीर खतरा बन रहा है। ऐसे में सहयोग और जागरूकता से ही इस समृद्ध प्राकृतिक विरासत को बचाया जा सकता है।
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प्रवासी पक्षियों की यह पहुंची प्रमुख प्रजातियां
1. बार-हेडेड गूज (धनेश)
2. नॉर्दर्न शोवलर (चम्मच बत्तख)
3. कॉर्मोरेंट (पानी काग)
4. स्पूनबिल (चम्मच चोंच बगुला)
5. गूज (हंस)
6. ब्लैक-विंग्ड स्टिल्ट (काली पंख वाली टांगे लंबी जलचिड़िया)
7. एग्रेट (बगुला)
8. लैपविंग (टिटीरी)
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