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अंबाला: बदलते वक्त के साथ-साथ अब विज्ञान भी खूब तरक्की कर रहा है, जहां भारत में कई बड़ी कंपनी स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर कई बड़ी बीमारियों का सफल इलाज कर रही है. वहीं अब टीबी की बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए (cough against TB) ऐप आ गया है, जिससे भारत सरकार के टीबी मुक्त भारत अभियान को मजबूती मिलेगी. दरअसल, इस ऐप के मदद से अब खांसी की आवाज का विश्लेषण कर एआई, टीबी के रोगियों की पहचान कर पाएगा और ऐप की सहायता से मरीजों को भी लाभ मिलेगा.
कफ अगेंस्ट टीबी ऐप का सफल प्रशिक्षण
बता दें कि अंबाला छावनी नागरिक अस्पताल में कफ अगेंस्ट टीबी ऐप का सफल प्रशिक्षण किया गया, जिसका उद्देश्य टीबी की प्रारंभिक पहचान को तकनीक के माध्यम से और अधिक तेज व प्रभावी बनाना है. इसको लेकर वाधवानी एआई टीम के विशेषज्ञ तुमुल राय ने नागरिक अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मियों को ऐप की तकनीकी कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से जानकारी भी दी है.
कैसे करता है काम
इस बारे में लोकल 18 को ज्यादा जानकारी देते हुए वाधवानी एआई टीम के विशेषज्ञ तुमुल राय ने बताया कि यह ऐप कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से खांसी की आवाज का विश्लेषण करता है और उन विशिष्ट ध्वनियों की पहचान करता है जो टीबी से संभावित रूप से जुड़ी हो सकती हैं. उन्होंने कहा कि ऐप मोबाइल फोन के माइक्रोफोन से खांसी रिकॉर्ड करता है और एआई एल्गोरिदम उसके ऑडियो सिग्नल का विश्लेषण कर प्रेसम्पटिव टीबी मरीजों की पहचान में सहायता करता है.
उन्होंने बताया कि इस ऐप से फील्ड में काम करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को तुरंत टीबी के संदिग्ध मरीजों की पहचान करने और आगे की जांच करने के लिए रेफर करने में मदद मिलेगी. नागरिक अस्पताल की पीएमओ डॉ. पूजा पैंटल ने बताया कि यह ऐप टीबी मुक्त भारत अभियान को मजबूत करने में एक अहम कदम है. उन्होंने उम्मीद जताई कि यह तकनीक फील्ड स्तर पर टीबी की रोकथाम और नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.
स्वास्थ्य कर्मियों को दी जाएगी खास तरह की ट्रेनिंग
वहीं डॉक्टर नीनू गांधी ने बताया कि नागरिक अस्पताल में स्वास्थ्य कर्मियों को आज एक खास तरह की ट्रेनिंग दी गई है, जिसमें उन्हें टीबी की स्क्रीनिंग के बारे में बताया जा रहा है. उन्होंने कहा कि ज्यादातर लोग टीबी की जांच के लिए अपने बलगम का सैंपल नहीं देते हैं. ऐसे में अब एक स्वास्थ्य विभाग कफ अगेंस्ट टीबी ऐप लेकर आया है जिसमें मरीज की खांसी की आवाज का विश्लेषण करके टीबी से संबंधित जुड़ी बीमारी के बारे में पता लगाया जा पाएगा.
उन्होंने बताया कि आज इस ट्रेनिंग के दौरान इस नई तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, ताकि आने वाले समय में इस ऐप की मदद से लोगों को स्वास्थ्य संबंधित सुविधा पहुंचाई जाएगी. उन्होंने बताया कि कुछ समय बाद टीबी के मरीज इस ऐप से अपनी खांसी की जांच कर पाएंगे जिससे उनके समय की बचत होगी, क्योंकि मरीज को अस्पताल में आकर अपने बलगम के सैंपल देने होते हैं, लेकिन इस ऐप से वह घर बैठे ही टीवी की बीमारी के बारे में पता लग पाएगा.
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