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नई दिल्ली37 मिनट पहले
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अगर आपके फोन पर कॉल आने पर कोई अनजान नाम दिखने लगे, जो आपके कॉन्टेक्ट लिस्ट में सेव नहीं है, तो घबराइए नहीं ये कोई गड़बड़ या ग्लिच नहीं है। ये भारत सरकार का नया CNAP सिस्टम है, जिसकी टेस्टिंग अभी देश के कुछ हिस्सों में शुरू की गई है।
टेलीकॉम कंपनियां इस सिस्टम को धीरे-धीरे एक्टिवेट कर रही हैं। इस नए सिस्टम से बिना किसी थर्ड पार्टी एप के स्पैम कॉल और फ्रॉड से बचाव आसान हो जाएगा। यह कॉल आने पर सबसे पहले कॉलर का आधार से लिंक्ड वेरिफाइड नाम दिखाएगा।

CNAP क्या है?
CNAP यानी कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन। यह एक सरकारी बैकअप वाला कॉलर आईडी सिस्टम है। जब कोई अनजान नंबर से कॉल आएगी, तो फोन पर सबसे पहले वह नाम दिखेगा जो आधार कार्ड से लिंक्ड है। फिर उसके बाद जो नाम आपने कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव किया है, वही आएगा।
मिसाल के तौर पर, अगर आपने मां का नाम ‘मॉम’ सेव किया है, तो कॉल आने पर पहले आधार वाला नाम दिखेगा, फिर ‘मॉम’। यह सिस्टम सिम रजिस्ट्रेशन के रिकॉर्ड्स से डायरेक्ट नाम लेता है।
यह सिस्टम ट्रूकॉलर से अलग है, क्योंकि ट्रूकॉलर यूजर्स के क्राउडसोर्स्ड डेटा पर चलता है, जो कभी-कभी गलत हो सकता है। लेकिन, CNAP में सब कुछ सरकारी वेरिफिकेशन पर बेस्ड है। यानी किसी थर्ड-पार्टी एप की जरूरत नहीं पड़ेगी।
यह डिफाल्ट सुविधा होगी। अगर कोई यूजर यह सुविधा नहीं चाहता, तो वह इसे डिएक्टिवेट भी करा सकेगा। इस सर्विस के लिए टेलीकॉम कंपनियों ने मुंबई और हरियाणा सर्किल में पिछले साल ट्रायल किया था।
ट्राई ने पिछले महीने अप्रूव किया था सिस्टम
टेलीकॉम रेगुलेटर TRAI (ट्राई) और DOT (दूरसंचार विभाग) ने मोबाइल कॉल से होने वाली धोखाधड़ी रोकने के लिए 29 अक्टूबर को नए सिस्टम को लागू करने का अप्रूवल दिया था। बड़ी टेलीकॉम कंपनियां जैसे जियो, एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया इसे अपने नेटवर्क पर इंस्टॉल कर रही हैं। यह प्लान पूरे देश में रोलआउट करने का है। अभी कुछ राज्यों में पायलट प्रोजेक्ट चल रहा है। DoT ने कहा है कि यह डिजिटल सिक्योरिटी को मजबूत करेगा।
यूजर्स को क्या फायदा होगा?
इस सिस्टम से अनजान कॉल्स पर भरोसा बढ़ेगा। स्पैमर्स और फ्रॉड कॉलर्स आसानी से पहचाने जा सकेंगे। कोई एप डाउनलोड करने की जरूरत नहीं, डायरेक्ट फोन पर काम करेगा। खासकर बुजुर्गों और महिलाओं के लिए सेफ्टी बढ़ेगी। कॉल्स में ट्रांसपेरेंसी आएगी, जिससे कॉन्फिडेंस लेवल ऊपर जाएगा। लॉन्ग टर्म में टेलीकॉम सेक्टर ज्यादा ट्रस्टेड बनेगा।
फ्रॉड कॉल रोकने के लिए बदलाव
यह कदम देशभर में धोखाधड़ी वाली कॉल्स और साइबर अपराधों जैसे डिजिटल अरेस्ट और वित्तीय घोटालों को रोकने के लिए उठाया गया है। इससे उपभोक्ता को पता होगा कि उसे कौन कॉल कर रहा है, जिससे वह फर्जी कॉल्स को पहचानने में सक्षम होगा।
इन्हें मिलेगी छूट
- जिन उपभोक्ताओं ने कॉलिंग लाइन आइडेंटिफिकेशन रिस्ट्रिक्शन (CLIR) की सुविधा ले रखी है, उनका नाम कॉल आने पर नहीं दिखेगा।
- यह सुविधा सामान्य उपभोक्ताओं, केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों और महत्वपूर्ण व्यक्तियों को दी जाती है।
- फोन कंपनियां CLIR लेने वाले सामान्य ग्राहकों की पूरी जांच करती हैं और यह सुनिश्चित करती हैं कि जरूरत पड़ने पर कानून प्रवर्तन एजेंसियों को इसका एक्सेस मिल सके।
- बल्क कनेक्शन, कॉल सेंटर और टेली मार्केटर इस सुविधा का फायदा नहीं ले सकते।
यहां सवाल-जवाब में जानें स्पैम कॉल और मैसेज के बारे में…
सवाल- स्पैम कॉल या मैसेज क्या होते हैं?
जवाब- स्पैम कॉल या मैसेज किसी अनजान नंबर से लोगों को किए जाने वाले कॉल या मैसेज होते हैं। जिसमें लोगों को लोन लेने, क्रेडिट कार्ड लेने, लॉटरी लगने, किसी कंपनी की कोई सर्विस या सामान खरीदने का झांसा दिया जाता है। यह सभी कॉल या मैसेज आपकी अनुमति के बिना की जाती हैं।
सवाल- किन लोगों को स्पैम कॉल ज्यादा आ सकते हैं?
जवाब- आमतौर पर स्पैम कॉल उन लोगों को ज्यादा आते हैं, जो स्पैम कॉल उठाते हैं और उसका जवाब देते हैं। स्पैम कॉल का जवाब देने से आपका नंबर कंपनी के पास उन नंबरों की लिस्ट में जुड़ सकता है, जो उनका फोन आम तौर पर उठाते हैं और रिस्पॉन्स देते हैं, क्योंकि एडवर्टाइजमेंट कंपनियां या स्कैमर्स सोचते हैं कि इन लोगों को कभी-न-कभी निशाना बनाया जा सकता है। इसलिए आप जितना कम स्पैम के जाल में फंसेंगे, आपको उतनी ही कम स्पैम कॉल आएंगी।

सवाल- इन कंपनियों के पास आपका मोबाइल नंबर आता कहां से है?
जवाब- ज्यादातर लोगों के मन में यही सवाल उठता है कि मैंने इस कंपनी की कोई कोई सर्विस नहीं ली तो कंपनी के पास मेरा मोबाइल नंबर आखिर कहां से पहुंचा। दसअसल, यूजर ही अपने मोबाइल नंबर जाने-अनजाने में इन कंपनियों तक पहुंचाते हैं।
कुछ ऐसी कंपनियां हैं, जो थर्ड पार्टी को आपका मोबाइल नंबर या ईमेल ID, उम्र या आपके शौक जैसा आपका पर्सनल डेटा बेचती हैं। जब आप किसी सर्विस के लिए साइन अप करते हैं तो कुछ कंपनियां अपनी टर्म्स एंड कंडीशन में इस बात का जिक्र करती हैं कि वे आपके डेटा का इस्तेमाल एडवर्टाइजमेंट के लिए या थर्ड पार्टी के साथ शेयर करने के लिए कर सकती हैं, लेकिन हममें से कोई कभी वो टर्म्स एंड कंडीशन पढ़ने की जहमत नहीं उठाता है।
जैसे कि-
- जब भी हम कोई सोशल मीडिया अकाउंट बनाते हैं तो वहां अपना नंबर रजिस्टर करते हैं।
- जब हम प्ले स्टोर से कोई ऐप डाउनलोड करते हैं तो उसे अपने फोन नंबर समेत अपने पूरे फोन को एक्सेस करने की परमिशन देते हैं।
- किसी मॉल या शॉपिंग वेबसाइट से खरीदारी करते समय अपना मोबाइल नंबर दर्ज करते हैं।
- अपना फोन नंबर इंटरनेट पर किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, वेबसाइटों पर बिना जांचे-परखे डाल देते हैं।
यहीं से ये कंपनियां आपके नंबर को दूसरी कंपनियों को बेच देती हैं। जिसके बाद एडवर्टाइजमेंट कंपनियां आपको कॉल या मैसेज भेजने लगती हैं।
सवाल- स्पैम कॉल आने पर क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?
जवाब- स्पैम कॉल को पहचानना आसान नहीं है क्योंकि ये नंबर सामान्य मोबाइल नंबर से मिलते-जुलते होते हैं। इसलिए अगर गलती से आपने स्पैम कॉल को उठा लिया है तो कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए। जैसे कि-
- अगर आपके पास कोई ऐसा फोन आता है, जिसमें कॉल करने वाला खुद या AI रिकॉर्डिंग के जरिए कोई नंबर दबाने के लिए कहे तो तुरंत फोन काट दें, क्योंकि स्कैमर्स आपसे जुड़ी जानकारी प्राप्त करने के लिए इस ट्रिक का उपयोग करते हैं।
- फोन कॉल में पूछे जा रहे किसी भी सवाल का जवाब न दें। खासकर उन सवालों का, जिसका जवाब “हां” या “ना” में दिया जा सकता है।
- अगर किसी अनजान कॉल को लेकर आपको कोई संदेह हो तो कभी भी पर्सनल जानकारी जैसे खाता नंबर, हॉबी, उम्र या पहचान से जुड़ी कोई जानकारी न दें।
- आपके पास कोई ऐसी कॉल आती है, जिसमें कॉलर द्वारा बैंक या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी होने का दावा करके आपसे पर्सनल डिटेल मांगी जा रही है तो तुरंत फोन काट दें।
- सत्यापन के लिए बैंक या सरकारी एजेंसी की वेबसाइट पर दिए गए फोन नंबर पर कॉल करें। किसी वैलिड सोर्स से फोन कॉल आने से पहले आम तौर पर ईमेल या मैसेज प्राप्त होता है।
- अगर फोन कॉल पर आपसे कोई पर्सनल जानकारी तुरंत देने के लिए दबाव डाला जा रहा है तो सावधानी बरतें।

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फोन आने पर कॉलर का वेरिफाइड नाम दिखेगा: सरकार ने ट्रूकॉलर जैसे सिस्टम CNAP की टेस्टिंग शुरू की, टेलीकॉम कंपनियां एक्टिवेट कर रही सिस्टम

