पीयू में फिर तनाव: गेट तोड़ने वालों पर एफआईआर से छात्र नाराज, प्रशासन से जवाब मांगने की तैयारी Chandigarh News Updates

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पंजाब यूनिवर्सिटी बचाओ मोर्चा के तहत गेट नंबर 1 का ताला तोड़ने और जबरन अंदर घुसने के मामले में पुलिस आरोपियों की पहचान करने में जुट गई है। वहीं मामले में पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर ने धरने पर बैठे छात्रों में तीखा आक्रोश पैदा कर दिया है। 

छात्रों का कहना है कि जब तक आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा था, तब तक पुलिस द्वारा इस तरह की अचानक कार्रवाई न सिर्फ अस्वीकार्य है, बल्कि माहौल बिगाड़ने वाली भी है। छात्र नेताओं का आरोप है कि प्रशासन और पुलिस दोनों पहले तक किसी भी तनावपूर्ण स्थिति से इनकार करते रहे, ऐसे में एफआईआर दर्ज होना दबाव की राजनीति जैसा कदम है।

अंदर से आए छात्रों ने मारा था पत्थर

सेक्टर 11 थाने में दर्ज एफआईआर के अनुसार पीयू के अंदर से आए छात्र और अन्य के एक बड़े ग्रुप ने पत्थर मारकर गेट पर लगा ताला और चेन तोडी। छात्रों और बाहरी लोगों ने अंदर घुसने से रोकने पर धक्का मुक्की और हाथापाई की। जिससे शिकायकर्ता एसआई प्रतिभा, डीएसपी एसपीएस सोंधी, सेक्टर 17 थाने के एसएचओ रोहित कुमार और वरिष्ठ सिपाही विपिन शर्मा को चोटें आई। सभी घायलों का सेक्टर 16 अस्पताल में मेडिकल करवाया गया।

पुलिस के अनुसार शहर में बीएनएसएस 223 (144 ) लगी होने के बावजूद भारी संख्या में बाहरी लोग इकट्ठे हुए। जबकि नियमनुसार पांच से अधिक लोग इक्ट्ठा नहीं हो सकते। जबकि पुलिस के मना करने और समझाने के बावजूद बाहरी लोग जबरन पीयू में घुसे। पुलिस की ओर से पीयू के अंदर और बाहर वीडियोग्राफी करवाई गई। एसएसपी कंवरदीप कौर ने बताया कि कैमरे से आरोपियों की पहचान की जा रही है। सेक्टर 11 थाना पुलिस ने सेक्टर 31 थाने में तैनात एसआई प्रतिभा की शिकायत पर अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

छात्रों ने पुलिस को दी चेतावनी

धरने पर बैठे छात्र नेताओं ने बताया कि सोमवार को उनकी पीयू प्रशासन और पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक प्रस्तावित है, जिसमें वे एफआईआर और छात्रों पर किसी भी तरह की कार्रवाई के संबंध में जवाब मांगेंगे। उनका साफ कहना है कि यदि प्रशासन स्थिति को संतुलित करने या समाधान निकालने में विफल रहा, तो छात्र अपनी अगली रणनीति तैयार करेंगे और आंदोलन को नए स्तर पर ले जाएंगे। छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कदम उठाया गया या उन्हें परेशान किया गया, तो वे 10 नवंबर से कहीं बड़ा आंदोलन खड़ा कर देंगे। 



पंजाब यूनिवर्सिटी बचाओ मोर्चा के प्रतिनिधि अवतार और गगन ने बताया कि उन्हें अब तक पुलिस या प्रशासन की ओर से एफआईआर को लेकर कोई लिखित सूचना नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि लगातार बैठकों में शांतिपूर्ण आंदोलन सुनिश्चित करने को लेकर कभी भी ऐसी किसी कार्रवाई का उल्लेख नहीं किया गया था। इसलिए सोमवार की बैठक में वे यह स्पष्ट करेंगे कि अचानक एफआईआर दर्ज करने के पीछे की मंशा क्या है। नेताओं ने चेताया कि मामला गिरफ्तारी तक पहुंचा तो माहौल और खराब होगा। इधर रविवार को धरना स्थल पर छात्रों ने 24 नवंबर को होने वाले शहीदी समागम के उपलक्ष्य में पाठ का आयोजन किया। रात में छात्रों के लिए लंगर भी चलता रहा और धरना स्थल पर गतिविधियां देर रात तक जारी रहीं।

क्या है शिकायत में 

38 साल की एसआई प्रतिभा ने शिकायत में बताया 10 नवंबर को पीयू बचाओ मोर्चा के दौरान पीयू के गेट नंबर 1 पर लगी हुई थी। इसके अलावा कई पुलिस अधिकारियों की भी ड्यूटी लगी हुई थी। पुलिस को अंदेशा था कि पीयू में भारी संख्या में बाहरी लोग पहुंच सकते हैं। पुलिस ने पहले से ही गेट नंबर एक के बाहर बैरीगेटिंग की हुई थ्थी। साथ ही गेट को लोहे की चेन लगाकार अस्थाई तौर पर बंद किया हुआ था। सिर्फ पीयू के छात्रों और वहां रहने और नौकरी करने वालों को ही अंदर आने की अनुमति थी। हर बाहरी व्यक्ति की एंट्री पर रोक थी। 7 नवंबर को डीएम के ऑडर के अनुसार शहर में धारा 223 बीएनएसएस लगी हुई थी। 



दोपहर करीब दो से तीन बजे भारी मात्रा में अलग अलग संगठन और ग्रुप के लोग गेट नंबर एक के बाहर इक्ट्ठा हो गए। वह अंदर आने के लिए पुलिस से बहस करने लगे। शिकायत में बताया कि पुलिस उन्हें समझाने के लिए बात कर ही रही थी कि वह जबरन अंदर घुसने की कोशिश करने लगे। जहां सरकारी फोटोग्राफर और वीडियोग्राफर और मीडियाकर्मी भी मौजूद थे। इसी दौरान पीयू के अंदर से छात्र बगैरा ( अन्य) का एक बड़ा ग्रप गेट नंबर एक की तरफ आया और उन्होने पत्थर से गेट पर लगी लोहे की चेन और लॉक तोड़ दिया और गेट खोलने लगे। पुलिस अधिकारियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन तभी बाहर खड़े बाहरी लोगों ने बैरिगेड्स को जबरन हटाकर अंदर घुसने की कोशिश करने लगे। पुलिस क रोकने पर छात्रों और बाहर से आए बाहरी लोगों ने जानबूझकर पुलिसकर्मियों के साथ धक्का मुक्की और हाथापाई की और जबरन अंदर घुस गए और पीयू की लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति भंग की।

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