{“_id”:”6919db7063274dc66e0b9d98″,”slug”:”video-tourists-in-geeta-mahotsav-2025-11-16″,”type”:”video”,”status”:”publish”,”title_hn”:”कुरुक्षेत्र: उत्साह और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर रहा ब्रह्मसरोवर, उमड़ी पर्यटकों की भीड़”,”category”:{“title”:”City & states”,”title_hn”:”शहर और राज्य”,”slug”:”city-and-states”}}
अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का दूसरा दिन उत्साह और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर रहा। रविवार होने के कारण सुबह से ही पर्यटकों का हुजूम उमड़ पड़ा। ब्रह्मसरोवर से लेकर संस्कृति मंच, शिल्प और सरस मेला व मेला ग्राउंड सहित ब्रह्मसरोवर परिसर में हर जगह रौनक बनी रही। हजारों लोग विभिन्न राज्यों की झलकियां देखने और अपनी संस्कृति-परंपरा से जुड़ने पहुंचे।
सुबह गीता रन में बड़ी संख्या में युवाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों ने हिस्सा लिया। ब्रह्मसरोवर क्षेत्र में आयोजित इस रन का उद्देश्य गीता के संदेश, कर्म और अनुशासन को प्रसारित करना रहा। प्रतिभागियों की ऊर्जा और जोश ने पूरे माहौल को जीवंत कर दिया।वहीं दिनभर हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पंजाब से आए कलाकारों ने अपनी पारंपरिक लोकधुनों और नृत्यों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।हिमाचल की नाटी ने शांति और सौहार्द की छाप छोड़ी, जबकि राजस्थान के कालबेलिया ने अपनी उमंग भरी तालों से माहौल गरमा दिया। जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड के लोकनृत्य और पंजाब के भांगड़ा-गिद्धा ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। कलाकारों की रंगीन वेशभूषा और ऊर्जावान प्रस्तुतियों ने महोत्सव को नई चमक दी। शाम होते ही ब्रह्मसरोवर पर आयोजित सांध्यकालीन महाआरती ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
शिल्पकारों के चेहरे पर छाई मुस्कान
रविवार की भारी भीड़ का सकारात्मक असर सरस व शिल्प मेले में खूब दिखाई दिया। जहां पर्यटकों ने जमकर खरीददारी भी की। मिट्टी के बर्तन, लकड़ी के सजावटी सामान, हस्त निर्मित उत्पाद, पारंपरिक आभूषण और हैंडलूम आइटम्स खूब बिके। शिल्पकारों ने कहा कि दूसरे दिन की बिक्री ने उम्मीद से ज्यादा खुशी दी है।
[ad_2]
कुरुक्षेत्र: उत्साह और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर रहा ब्रह्मसरोवर, उमड़ी पर्यटकों की भीड़