[ad_1]
- Hindi News
- Opinion
- Column By Pandit Vijayshankar Mehta Devotion To God Can Fill The Emptiness Of Life
19 घंटे पहले
- कॉपी लिंक
पं. विजयशंकर मेहता
‘हमारे बच्चे लौटकर आएंगे कि नहीं?’ ये सवाल आजकल बहुत सारे माता-पिता मुझसे पूछते हैं। अब इस सवाल के पीछे के दृश्य में चलते हैं कि इनके बच्चे गए कहां? दरअसल इस समय बच्चों को खूब लिखाने-पढ़ाने का ट्रेंड है। बच्चे विदेश चले गए।
वो माता-पिता को बड़े नगर में या विदेश बुलाना चाहते हैं। वो आ नहीं पा रहे हैं, माता-पिता का जाने का मन नहीं है। लिहाजा भारत में कई घर इस समय सूने हो गए। हर दसवें घर में बुजुर्ग अकेले मिल जाएंगे। नन्हे परिंदे को, जब उसके पालक उड़ा देते हैं तो वो ये उम्मीद नहीं करते कि वह फिर उसी डाल पर लौटकर आएगा।
ऐसे में क्या करें? बच्चे चाहकर भी नहीं आ सकते और माता-पिता उन्हें याद करते रहते हैं। बचपन में ही माता-पिता अपने बच्चों का कवच और ढाल बनते हैं। उन्हें बुलडोजर पैरंेटिंग की तरह तैयार किया जाता है, जबकि होनी थी पैराशूट पैरेंटिंग।
बच्चों की समस्याएं सुलझाते-सुलझाते अब माता-पिता खुद परेशानी और समस्या में आ गए। लेकिन ये कोई नया कर्म नहीं है। दशरथ राम को ऐसे ही याद करते रहे। यशोदा कृष्ण के विरह में एेसे ही डूब गईं। इसलिए अब जो विरह माता-पिता के जीवन में आया है, उसको मिटाने का एक तरीका है, ईश्वर भक्ति और बढ़ा दीजिए, तो शायद ये शून्य भर जाएगा।
[ad_2]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: ईश्वर भक्ति से जीवन का खालीपन भर सकता है
