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बॉलीवुड के लीजेंडरी एक्टर राज कुमार को बेहतरीन डायलॉग डिलीवरी के लिए जाना जाता था. उनकी बुलंद आवाज सुनने के लिए दर्शक थिएटर्स में जाते थे. उनका अपना एक प्रशंसक वर्ग था. वो अपनी कोई भी बात ‘जानी’ से शुरू करते थे. राज कुमार साहब ने अपने करियर में ‘पैगाम’, ‘वक्त’, ‘नीलकमल’, ‘पाकीजा’, ‘मर्यादा’, ‘हीर रांझा’, ‘सौदागर’, क्रांतिवीर जैसी बेहतरीन फिल्में दीं लेकिन उनके बेटे पुरू राज कुमार पर्दे पर पिता के जैसा नाम नहीं कमा पाए. पुरु का पूरा नाम पुरु राव पंडित है. उन्होंने 1996 में फिल्म ‘बाल ब्रह्मचारी’ से बॉलीवुड में कदम रखा लेकिन यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिर गई. पुरु ने ‘हमारा दिल आपके पास है’, ‘मिशन कश्मीर’, ‘उलझन’, ‘खतरों के खिलाड़ी’, ‘अर्जुन’, ‘देव’, ‘भारत भाग्य विधाता’, ‘वध’, ‘ईट का जवाब पत्थर’, ‘एलओसी कारगिल’, ‘दुश्मनी’, ‘जागो’, ‘वीर’ और ‘एक्शन जैक्सन’ जैसी कई फिल्मों में काम किया लेकिन उनका करियर उड़ान नहीं भर पाया. अब पुरू राजकुमार बॉलीवुड से दूर हैं.
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वो 5 सुपरस्टार, जिनके बेटे निकले महाफ्लॉप, डुबोया पिता का नाम, मेकर्स हो गए कंगाल, छोड़ी बॉलीवुड इंडस्ट्री


