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फोटो 12 – जमींदारा सोसायटी कार्यालय। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। जिले में 6500 बैग डीएपी खाद बुधवार तक पहुंच जाएगी। डीएपी के अलावा, एनपीके खाद के 1600 बैग मंगवाए गए हैं। खाद के लिए रेवाड़ी से रैक लगेगी। अगले माह से रबी की फसलों की बिजाई शुरू होने वाली है।
15 अक्तूबर से सरसों की बिजाई शुरू हो जाएगी। रबी सीजन में सरसों, जौ व गेहूं की बिजाई के लिए डीएपी 14 हजार व यूरिया खाद की 30 हजार एमटी की जरूरत पड़ेगी। जिले का कुल कृषि योग्य रकबा दो लाख 73 हजार एकड़ है। विभाग ने उच्चाधिकारियों को खाद की मांग भेज दी है।
सरसों की ज्यादा खेती
जिले में रबी सीजन में गेहूं, जौ, चना, गेहूं व मेथी आदि की फसलें उगाई जाती हैं। सरसों किसानों की पसंदीदा फसल है। यह नकदी फसल मानी जाती है। इसमें सिंचाई की कम जरूरत होती है। लागत खर्च भी कम आता है। सरसों का सरकारी रेट भी बढि़या है। इसी प्रकार गेहूं की बिजाई कम क्षेत्र में होती है। सरसों की बिजाई हर साल करीब 55 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में होती है जबकि गेहूं का रकबा 40 हजार हेक्टेयर तक ही पहुंच पाता है।
ज्यादा खाद का उपयोग जमीन के लिए हानिकारक
बिजाई के दौरान किसान प्रति एकड़ 50 किलोग्राम डीएपी डालते हैं। इसी प्रकार यूरिया का छिड़काव पहली सिंचाई के बाद किया जाता है। आजकल डीएपी खाद का किसान ज्यादा मात्रा में इस्तेमाल करने लगे हैं जबकि रासायनिक खाद फसलों के लिए हानिकारक ही माना जाता है। जैविक व गोबर की देसी खाद ज्यादा कारगर होती है। इस खाद से जमीन की प्राकृतिक रूप से उर्वरा शक्ति बढ़ती है। पैदावार भी अच्छी मिल जाती है।
अगले माह से सरसों की बिजाई होगी शुरू
रबी सीजन की बिजाई का समय अक्तूबर व नवंबर है। अक्तूबर में सरसों की बिजाई शुरू हो जाती है। नवंबर प्रथम सप्ताह में गेहूं की बिजाई शुरू हो जाती है। जौ की बिजाई अक्तूबर माह में ही होती है। ऐसे में अगर अभी से खाद की आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में प्रयास किए जाने की जरूरत है तभी किसानों को समय पर खाद मिल सकेगी।
कोट
खाद व बीज का प्रबंध पर्याप्त मात्रा में होना चाहिए। ताकि, बिजाई के काम में देरी न होने पाए। सरकार को बीज की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण करना चाहिए। सरसों के बीज का भाव कम करना चाहिए।
-किसान नेता हरपाल सिंह भांडवा
वर्जन
रेवाड़ी से खाद की रैक लगेगी। दो दिन में खाद जिले में पहुंच जाएगी। डीएपी 6500 व एनपीके खाद 1600 बैग पहुंचेगी। किसान रासायनिक खादों का कम से कम इस्तेमाल करें। खेती में देसी खाद को तवज्जो दें।
– कृष्ण कुमार, एसडीओ, कृषि विभाग।
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Charkhi Dadri News: 6500 डीएपी व 1600 बैग एनपीके खाद बुधवार तक पहुंचेगी


