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इस्माईलाबाद। पिछले दिनों मारकंडा नदी में आए उफान से आई बाढ़ का पानी तो उतर गया है लेकिन अब इसका असर धान की फसल पर स्पष्ट देखने को मिल रहा है। खेतों से पानी समाप्त होने के साथ अनाज ले चुकी धान भी फसल भी सूखने लगी है, जिसे देख किसानों के चेहरे पर मायूसी छा गई है।
कई किसानों के खेतों में तो अभी भी पानी भरा हुआ है जिसके चलते किसानों को अगली फसल की बुआई की चिंता भी सताने लगी है। इस वर्ष मारकंडा नदी के तटबंध दो बार टूटे हैं और दोनों बार मारकंडा नदी के पानी ने किसानों की फसल पर जमकर कहर बरपाया है। पहली बाढ़ से जैसे-तैसे किसानों ने अपनी फसल को बचाया था और कुछ किसानों ने तो दोहरा खर्च कर दोबारा से धान की रोपाई की थी। इतनी मेहनत करने के बाद भी मारकंडा नदी की बाढ़ ने पकने को तैयार फसल को अपनी चपेट में लेकर बर्बाद कर दिया है। किसान अब बाढ़ की बार-बार मार से तंग आ चुके हैं और मारकंडा नदी से आने वाली बाढ़ का पक्का प्रबंध करने की मांग बार-बार सरकार व प्रशासन से कर रहे हैं। किसानों ने कहा कि गांव नैसी से गांव जलबेहडा तक करीब दो किलोमीटर का बांध बांधने और मारकंडा नदी की सफाई करवाने से हजारों किसानों को इसका फायदा हो सकता है। इसके लिए किसान हर प्रकार से सरकार के साथ है।
27 एकड़ में धान की फसल बर्बाद
गांव नैसी के किसान सतीश कुमार ने बताया कि अपने 27 एकड़ में धान की फसल लगाई हुई थी। पहली बाढ़ से भी फसल को काफी नुकसान हुआ था। उस समय उन्होंने कुछ धान की रोपाई की थी। इस समय धान की फसल निसारे पर थी। मारकंडा नदी की बाढ़ का पानी लगातार 10 दिनों तक बाढ़ की चपेट में आने से उनकी फसल खराब हो गई थी। अब पानी उतरने के साथ फसल भी सूख रही है जिसे देख उनके आंसू निकल रहे हैं। उन्होंने सरकार से मांग रखी है कि किसानों को बाढ़ की मार से बचाने के लिए मारकंडा नदी पर बांध बनाना ही पड़ेगा।
बाढ़ की भेंट चढ़ गई 25 एकड़ फसल
गांव नैसी के किसान संदीप शर्मा ने कहा कि मारकंडा नदी से आने वाली बाढ़ पिछले कई साल से उनकी फसल को बर्बाद कर रही है। कई बार तो उनकी दोनों फसलें मौसम की मार की भेंट चढ़ जाती हैं। इस वर्ष तो दो बार मारकंडा नदी ने उनकी फसलों पर कहर बरसाया है। इसके चलते उसकी 25 एकड़ धान की फसल बर्बाद हो चुकी है। अब फसल के बर्बाद होने का दर्द उनके सहन से परे है। सरकार को किसानों के साथ मिल कर इस समस्या का स्थायी हल निकालना होगा। उन्होंने कहा कि किसान हर प्रकार से सरकार के साथ हैं। मारकंडा नदी पर बांध बांधने से ही इस समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है।
इस्माईलाबाद। सतीश कुमार।

इस्माईलाबाद। सतीश कुमार।

इस्माईलाबाद। सतीश कुमार।

इस्माईलाबाद। सतीश कुमार।

इस्माईलाबाद। सतीश कुमार।
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Kurukshetra News: खेतों से बाढ़ से हुआ जलभराव हटा, बर्बाद फसल देख अब किसानों की आंखों से निकले आंसू

