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जीएमडीए रेन वाटर हार्वेस्टिंग और ग्रीन बेल्ट को सड़क से नीचे करने जैसे कदम उठा रहा
मनोज धर द्विवेदी
गुरुग्राम। बारिश में जलभराव से हुई सरकार की किरकिरी के बाद गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) पानी निकासी के लिए कई कदम उठाने जा रहा है। जीएमडीए तालाबों/वाटर बॉडीज, रेन वाटर हार्वेस्टिंग और ग्रीन बेल्ट को सड़क से नीचे करने जैसे कई कदम उठाने जा रहा है। जिले में 1187 तालाब / वाटर बॉडीज हैं। इसमें गुरुग्राम तहसील में 36, बादशाहपुर में 49 और वजीराबाद में 77, कादीपुर में 119 तालाब/वाटर बॉडीज है। यदि बारिश का पानी इन तालाबों/वाटर बॉडीज में संचय किया जाए तो सड़क पर होने वाले जलभराव की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
साइबर सिटी में बारिश के दौरान पूरा शहर थम जाता है और लोग जाम में घंटे फंसे रहते है। इससे सरकार की काफी किरकिरी होती है। हाल में हुई बारिश के शहर में जलभराव का मामला कई दिनों तक सोशल मीडिया में छाया रहा था। नगर निगम और जीएमडीए के प्रयासों के बावजूद पानी निकासी की समस्या बनी रही। ऐसे में अब संबंधित विभाग अभी से बारिश के पानी निकासी के इंतजामों में जुट गए हैं। इसके लिए सभी विभागों से पानी निकासी को लेकर कार्य योजना मांगी गई है। जीएमडीए की योजना है कि बारिश के पानी निकासी के साथ संरक्षण पर ध्यान देने की जरूरत है। इससे गिरते जल स्तर को उठाया जा सकेंगे और जलभराव की समस्या को कम की जा सकती है।
शहरी क्षेत्र के तालाब /वाटर बॉडीज के संरक्षण पर जोर
जिले में 1187 तालाबों/वाटर बॉडीज हैं। इसमें बादशाहपुर तहसील में 49, गुरुग्राम में 36, हरसरू में 84, कादीपुर में 119, मानेसर में 157, पटौदी में 211, सोहना में 259 व वजीराबाद में 77 तालाबों/वाटर बॉडीज हैं। सबसे अधिक जल भराव वजीराबाद, कादीपुर, गुरुग्राम एरिया में होता है। ऐसे में इन जगहों के तालाबों व वाटर बॉडीज में पानी संचय में प्रयोग किया जा सकता है। झाड़सा गांव में एक, घाटा में आठ, कादरपुर में नौ, बादशाहपुर में छह, गुड़गांव गांव में दो, नाहरपुर रुप में पांच और नाथुपूर में तीन चौमा में दो व सुखराली में दो तालाब /वाटर बॉडीज प्रमुख रूप से हैं। जीएमडीए का मानना है कि इन तालाब /वाटर बॉडीज का जीर्णोद्धार करा दिया जाए तो काफी बारिश के पानी का संचय किया जा सकता है। इससे जलभराव से राहत के साथ भूजल स्तर में सुधार होगा। जीएमडीए का शहर तालाब /वाटर बॉडीज के विकास करने पर जोर है। ऐसे तालाब /वाटर बॉडीज का जीएमडीए की टीम मौका मुआयना करने के बाद स्टीमेंट तैयार करेगी। जीएमडीए के मुख्य अभियंता आरएस जांगड़ा ने बताया कि तालाबों के साथ अन्य इंतजामों पर काम किया जा रहा है। उन्होंने तालाबों में पानी का संचय होने से भूजल स्तर में सुधार होगा।
ग्रीन बेल्ट को नीचे किया जाएगा
शहर में अधिकांश सड़कों की ग्रीन बेल्ट का स्तर सड़क से ऊपर है। ऐसे में बारिश का पानी निकासी नहीं होता और सड़क पर जमा रहता है। जीएमडीए की योजना है कि प्रमुख सड़कों के ग्रीन बेल्ट की मिट्टी को निकालकर नीचा किया जाए। जीएमडीए अपनी सड़कों पर लागू करने की कार्य योजना तैयार कर रहा है। पहले शहर की एक प्रमुख सड़क को ऐसा किया जाएगा। इसके बाद अन्य सड़कों पर काम होगा। जीएमडीए के पास 286 किलोमीटर सड़क है।
रेन वाटर हार्वेस्टिंग
गुरुग्राम में दो हजार से अधिक हाईराइज सोसाइटियां है। संबंधित विभाग इन जगहों पर लगे रेन वाटर हार्वेस्टिंग की जांच करेंगे। अच्छे स्तर के रेन वाटर हार्वेस्टिंग लगाने पर जोर दिया जाएगा। प्रशासन का मानना है कि जलभराव रोकने में रेन वाटर हार्वेस्टिंग काफी मददगार हो सकता है। ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों और 500 वर्ग मीटर या उससे अधिक के प्लॉट पर बनी सभी प्रकार की इमारतों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग होनी चाहिए।
ड्रेनेज सिस्टम
जीएमडीए की शहर में पानी निकासी के लिए ड्रेनेज सिस्टम को और मजबूत करने की योजना है। इसके लिए पुराने ड्रेनेज को बेहतर करने के अलावा मुख्य सड़कों के साथ नाले का निर्माण की योजना है। इसके लिए पूरे शहर के पुराने और नए नाले निर्माण के लिए सर्वे कराया गया है। इस सर्वे को सभी विभागों को दिया गया है। बारिश समाप्त होते ही इस पर काम शुरू कर दिया जाएगा। नगर निगम भी इस लेकर कार्य योजना बना रहा है।
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Gurugram News: जल निकासी के लिए बनाई योजना, तालाबों में जाएगा सड़कों का पानी

